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अमर उजाला संवाद: शिक्षकों ने कहा-संशाधनों की कमी नई शिक्षा नीति में बाधक, शिक्षक प्रशिक्षण पर दिया जोर
Wed, 22 Jul 2026 01:59 PM IST
Rohit Singh
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:59 PM IST
सार
एमजी कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि तकनीकी शिक्षा नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण पहल है और इसका लाभ प्रत्येक छात्र तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सामने पढ़ाई के साथ कई तरह की चुनौतियां हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा।
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संवाद में जुटे शिक्षक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
नई शिक्षा नीति (एनईपी) को लेकर शहर के इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का कहना है कि इसे लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी है। उनका यह भी कहना है कि मातृभाषा में पढ़ाई से भाषा संबंधी दिक्कत दूर हो गई है।
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उन्होंने बच्चों को समय पर तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया। अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को संवाद कार्यक्रम में एनईपी पर मंथन के लिए विभिन्न स्कूलों से प्रधानाचार्य व शिक्षक मौजूद थे। एमजी कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि तकनीकी शिक्षा नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण पहल है और इसका लाभ प्रत्येक छात्र तक पहुंचना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सामने पढ़ाई के साथ कई तरह की चुनौतियां हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा। राजकीय हाईस्कूल, सीहापार के प्रधानाचार्य डॉ. आलोक ने कहा कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा देना भी आवश्यक है। नई शिक्षा नीति में इसके प्रावधान किए गए हैं।
डीबी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अंगद प्रसाद ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, बौलिया के अध्यापक अन्नपूर्णानंद द्विवेदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति बेहतर है। इससे बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
डीबी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अंगद प्रसाद ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, बौलिया के अध्यापक अन्नपूर्णानंद द्विवेदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति बेहतर है। इससे बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
बच्चों को सही समय पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इस्लामिया गर्ल्स कॉलेज गोरखनाथ की अध्यापक महमूद आलम ने कहा कि शिक्षा सभी बच्चों का अधिकार है और उन्हें सही शिक्षा मिलनी चाहिए।
अध्यापिका जरीन खान, सरवत रेहाना, राजकीय हाईस्कूल बेलीपार की अध्यापिका प्रतिभा उपाध्याय और मुरारी इंटर कॉलेज, सहजनवां के प्रवक्ता जयराज सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भाषाई दिक्कत दूर हुई है। बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकते हैं। किताबें भी अच्छी हैं, लेकिन इसके साथ तकनीकी ज्ञान देना भी जरूरी है।
बोले-शिक्षक
अध्यापिका जरीन खान, सरवत रेहाना, राजकीय हाईस्कूल बेलीपार की अध्यापिका प्रतिभा उपाध्याय और मुरारी इंटर कॉलेज, सहजनवां के प्रवक्ता जयराज सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भाषाई दिक्कत दूर हुई है। बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकते हैं। किताबें भी अच्छी हैं, लेकिन इसके साथ तकनीकी ज्ञान देना भी जरूरी है।
बोले-शिक्षक
सहायक पुस्तकों के सहारे पढ़ाई
मुरारी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मेजर साकेत ने कहा कि आज मूल पुस्तकों का अभाव है। सहायक पुस्तकों के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है। पाठ्यक्रम के अनुरूप विषयवस्तु भी उपलब्ध होनी चाहिए। कोठारी आयोग के बाद पहली बार ऐसी शिक्षा नीति बनी है। उन्होंने कहा कि बच्चों का ड्रॉपआउट रोकना जरूरी है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के साथ बच्चों को कौशल से जोड़ना होगा। अध्यापकों का प्रशिक्षण भी जरूरी है।
सुविधाएं बढ़ जाएं तो तकनीकी शिक्षा का मिलेगा लाभ
रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य महेश सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आने से भाषाई दिक्कत दूर होने की बात स्पष्ट हुई है। हालांकि, जिन विद्यालयों में संसाधनों की कमी है, वहां सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। तभी बच्चे तकनीकी शिक्षा का बेहतर तरीके से लाभ उठा सकेंगे।
मुरारी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य मेजर साकेत ने कहा कि आज मूल पुस्तकों का अभाव है। सहायक पुस्तकों के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है। पाठ्यक्रम के अनुरूप विषयवस्तु भी उपलब्ध होनी चाहिए। कोठारी आयोग के बाद पहली बार ऐसी शिक्षा नीति बनी है। उन्होंने कहा कि बच्चों का ड्रॉपआउट रोकना जरूरी है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के साथ बच्चों को कौशल से जोड़ना होगा। अध्यापकों का प्रशिक्षण भी जरूरी है।
सुविधाएं बढ़ जाएं तो तकनीकी शिक्षा का मिलेगा लाभ
रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य महेश सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आने से भाषाई दिक्कत दूर होने की बात स्पष्ट हुई है। हालांकि, जिन विद्यालयों में संसाधनों की कमी है, वहां सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। तभी बच्चे तकनीकी शिक्षा का बेहतर तरीके से लाभ उठा सकेंगे।