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Gorakhpur News: टेलीग्राम एप के जरिये चला रहे थे गिरोह, कोडवर्ड में मिलता था इनपुट
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महिलाओं को झांसा देकर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का मामला
महिलाएं विरोध न करें इसके लिए खाता खुलवाने की एवज में देते थे रुपये
आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले ट्रांजेक्शन के सबूत
गोरखपुर। महिलाओं को झांसा देकर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले गिरोह के नेटवर्क को पुलिस खंगाल रही है। पुलिस की अभी तक की जांच में पता चला है कि यह गिरोह टेलीग्राम के जरिये संचालित हो रहा था। वहां जालसाज कोड वर्ड के जरिये बात करते थे। इसके बाद ग्रामीण इलाकों में बैठे गिरोह के अन्य गुर्गे महिलाओं के खाते से ट्रांजेक्शन करते थे।
पुलिस के मुताबिक, टेलीग्राम पर गिरोह के किसी भी व्यक्ति का असली नाम नहीं दिखता था। वहां पर उनका निकनेम ही दिखता था। गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस को 10 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, एक बैंक पासबुक, एक एटीएम कार्ड और एटीएम की तीन पर्चियां मिली हैं। मोबाइल फोन में कई खातों से लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अब इनके सहारे उन लोगों तक पहुंच रही है जिनके नाम से खाते खाेले गए थे। अब तक की जांच में तीन से चार महिलाएं सामने आई हैं जिनके नाम से खाते खोलकर उसमें रुपये मंगाए गए थे।
आरोपियों ने इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा दिया था। इसके बाद से इनसे सभी दस्तावेज ले लिए। भरोसा दिलाने के लिए महिलाओं को 1500 से 2500 रुपये भी दिए।
दरअसल, खोराबार थाना पुलिस ने शनिवार को साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह के चार गुर्गों को पकड़ा था। आरोप है कि पकड़े गए जालसाज, ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खाते खुलवाते थे। बाद में उसका इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। इसे वे यूसडीटी और बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीडा थाना क्षेत्र के नौसड़ निवासी वंश निषाद, रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल निवासी शोभित गौड़, एम्स थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी निवासी शक्ति जायसवाल और एम्स इलाके के आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवम पटवा के रूप में हुई। सीओ कैंट अरुण कुमार एस ने बताया कि आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन की मदद से इनके नेटवर्क की जांच की जा रही है। जल्द ही गिरोह के दूसरे गुर्गों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पांच से 10 हजार तक कमीशन
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के गुर्गों को टेलीग्राम के जरिये ही टास्क मिलता था। इसे घर से ही ऑपरेट करते थे। किसी को खाता खुलवाने की जिम्मेदारी तो किसी को उसमें से रुपये निकालने की दी जाती थी। इसके लिए उन्हें पांच से 10 हजार रुपये तक कमीशन मिलते थे। पकड़े गए सभी आरोपी कैरियर का काम करते थे। अब पुलिस इन्हें निर्देश देने वाले की तलाश कर रही है।
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आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले ट्रांजेक्शन के सबूत
गोरखपुर। महिलाओं को झांसा देकर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले गिरोह के नेटवर्क को पुलिस खंगाल रही है। पुलिस की अभी तक की जांच में पता चला है कि यह गिरोह टेलीग्राम के जरिये संचालित हो रहा था। वहां जालसाज कोड वर्ड के जरिये बात करते थे। इसके बाद ग्रामीण इलाकों में बैठे गिरोह के अन्य गुर्गे महिलाओं के खाते से ट्रांजेक्शन करते थे।
पुलिस के मुताबिक, टेलीग्राम पर गिरोह के किसी भी व्यक्ति का असली नाम नहीं दिखता था। वहां पर उनका निकनेम ही दिखता था। गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस को 10 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, एक बैंक पासबुक, एक एटीएम कार्ड और एटीएम की तीन पर्चियां मिली हैं। मोबाइल फोन में कई खातों से लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अब इनके सहारे उन लोगों तक पहुंच रही है जिनके नाम से खाते खाेले गए थे। अब तक की जांच में तीन से चार महिलाएं सामने आई हैं जिनके नाम से खाते खोलकर उसमें रुपये मंगाए गए थे।
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आरोपियों ने इन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा दिया था। इसके बाद से इनसे सभी दस्तावेज ले लिए। भरोसा दिलाने के लिए महिलाओं को 1500 से 2500 रुपये भी दिए।
दरअसल, खोराबार थाना पुलिस ने शनिवार को साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह के चार गुर्गों को पकड़ा था। आरोप है कि पकड़े गए जालसाज, ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खाते खुलवाते थे। बाद में उसका इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। इसे वे यूसडीटी और बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीडा थाना क्षेत्र के नौसड़ निवासी वंश निषाद, रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल निवासी शोभित गौड़, एम्स थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी निवासी शक्ति जायसवाल और एम्स इलाके के आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवम पटवा के रूप में हुई। सीओ कैंट अरुण कुमार एस ने बताया कि आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन की मदद से इनके नेटवर्क की जांच की जा रही है। जल्द ही गिरोह के दूसरे गुर्गों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पांच से 10 हजार तक कमीशन
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के गुर्गों को टेलीग्राम के जरिये ही टास्क मिलता था। इसे घर से ही ऑपरेट करते थे। किसी को खाता खुलवाने की जिम्मेदारी तो किसी को उसमें से रुपये निकालने की दी जाती थी। इसके लिए उन्हें पांच से 10 हजार रुपये तक कमीशन मिलते थे। पकड़े गए सभी आरोपी कैरियर का काम करते थे। अब पुलिस इन्हें निर्देश देने वाले की तलाश कर रही है।