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Gorakhpur News: नागपंचमी आज, नाग देवता की पूजा कर श्रद्धालु मांगेंगे सुख-समृद्धि
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-नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध लव चढ़ाने की चली आ रही परंपरा
गोरखपुर। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार को नागपंचमी के रूप में मनाई जाएगी। इस दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करेंगे।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि पंचमी तिथि का मान पूरे दिन रहेगा और शाम 6:49 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी। सूर्योदय सुबह 5:33 बजे होगा। सुबह 6:47 बजे तक हस्त नक्षत्र और इसके बाद चित्रा नक्षत्र रहेगा। सुबह 7:58 बजे तक साध्य योग के बाद शुभ योग बनेगा। इस दौरान नाग देवता की पूजा-अर्चना कर दूध लावा अर्पित करने से भगवान शिव व नाग देवता की अति कृपा बरसेगी।
पंडित विकास मालवीय के अनुसार, नागपंचमी पर व्रत रखने और नाग देवता के पूजन की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागों की उत्पत्ति महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी से हुई थी। पुराणों में नाग लोक का उल्लेख पाताल लोक के रूप में मिलता है और भोगवती पुरी को इसकी राजधानी बताया गया है। नागों से जुड़े प्रसंग गरुड़ पुराण, भविष्य पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में मिलते हैं। नागपंचमी केवल नाग पूजन का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में नागों के विशेष स्थान को दर्शाने वाला पर्व भी है। बता दें कि नागपंचमी को लेकर रविवार को बाजार में लावा 10 रुपये के पैकेट से लेकर 50 रुपये पैकेट तक बिका।
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गोरखपुर। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार को नागपंचमी के रूप में मनाई जाएगी। इस दिन नाग देवता की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करेंगे।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि पंचमी तिथि का मान पूरे दिन रहेगा और शाम 6:49 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी। सूर्योदय सुबह 5:33 बजे होगा। सुबह 6:47 बजे तक हस्त नक्षत्र और इसके बाद चित्रा नक्षत्र रहेगा। सुबह 7:58 बजे तक साध्य योग के बाद शुभ योग बनेगा। इस दौरान नाग देवता की पूजा-अर्चना कर दूध लावा अर्पित करने से भगवान शिव व नाग देवता की अति कृपा बरसेगी।
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पंडित विकास मालवीय के अनुसार, नागपंचमी पर व्रत रखने और नाग देवता के पूजन की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागों की उत्पत्ति महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी से हुई थी। पुराणों में नाग लोक का उल्लेख पाताल लोक के रूप में मिलता है और भोगवती पुरी को इसकी राजधानी बताया गया है। नागों से जुड़े प्रसंग गरुड़ पुराण, भविष्य पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में मिलते हैं। नागपंचमी केवल नाग पूजन का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में नागों के विशेष स्थान को दर्शाने वाला पर्व भी है। बता दें कि नागपंचमी को लेकर रविवार को बाजार में लावा 10 रुपये के पैकेट से लेकर 50 रुपये पैकेट तक बिका।
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