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Gorakhpur News: चिड़ियाघर में मिला प्राकृतिक वास तो पेंटेड स्टॉर्क के बाड़े में आए नए मेहमान
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वर्ष 2021 में लखनऊ से लाए गए थे चार जोड़े विदेशी पक्षी पेंटेड स्टॉर्क
गोरखपुर। चिड़ियाघर में पहली बार विदेश पक्षी ‘पेंटेड स्टॉर्क’ की ब्रीडिंग हुई है। बाड़े में इनको प्राकृतिक वास मिला तब जाकर ब्रीडिंग के लिए माहौल बन सका। पेंटेड स्टॉर्क ने दो बच्चे दिए हैं जिसके बाद अब चिड़ियाघर में इनकी संख्या 10 हो गई है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में लखनऊ चिड़ियाघर से चार जोड़े पेंटेड स्टॉर्क लाए गए थे। इसके बाद से ही चिड़ियाघर प्रबंधन इनकी ब्रीडिंग की तैयारी कर रहा था। दरअसल, पेंटेड स्टॉर्क ऊंचे पेड़ों पर रहते हैं और वहीं पर घोंसला बनाकर ब्रीडिंग करते हैं। पहले इनके लिए घोंसले बनाए गए लेकिन उसमें इन्हें प्राकृतिक वास नहीं मिला जिससे ब्रीडिंग में समस्या आई। लगातार कुछ साल तक प्रबंधन ने कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद बाड़े में बांस का प्लेटफॉर्म बनाया गया। वहां पर सूखी लकड़ियां बिछा दी गईं। इसमें तुलसी, बबूल, जंगल जलेबी, ईमली, यूकेलिप्टस और नीम की लकड़ियां शामिल थीं। लकड़ी रखने के बाद पक्षियों ने खुद की उठाकर अपना घोंसला बनाना शुरू किया। अक्तूबर 2025 में इन्होंने घोंसला बनाना शुरू किया और जनवरी के अंत में अंडे दिए। फरवरी के अंत में अंडे फूट गए थे लेकिन घोंसला ऊपर होने की वजह से वहां कोई नहीं देख पा रहा था। अब घोंसले में दो नए मेहमान दिखने लगे हैं।
चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और भोजन कर रहे हैं। मां इनके लिए भी तालाब से मछली लाकर खिला रही है।
ये है खासियत
डॉ. योगेश ने बताया कि पेंटेड स्टॉर्क मूल रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के पक्षी हैं। भारत के अलावा ये श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इनकी पहचान इनके आकर्षक रंगों से होती है। गुलाबी पंख, सफेद शरीर और काले धब्बों की वजह से ये बेहद खूबसूरत नजर आते हैं। पेंटेड स्टॉर्क बेहद शांत और सामाजिक स्वभाव के पक्षी माने जाते हैं। चिड़ियाघर में यह खास आकर्षण का केंद्र हैं। यहां की हरियाली, तालाब और मौसम इनके लाइफस्टाइल के अनुकूल है।
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गोरखपुर। चिड़ियाघर में पहली बार विदेश पक्षी ‘पेंटेड स्टॉर्क’ की ब्रीडिंग हुई है। बाड़े में इनको प्राकृतिक वास मिला तब जाकर ब्रीडिंग के लिए माहौल बन सका। पेंटेड स्टॉर्क ने दो बच्चे दिए हैं जिसके बाद अब चिड़ियाघर में इनकी संख्या 10 हो गई है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में लखनऊ चिड़ियाघर से चार जोड़े पेंटेड स्टॉर्क लाए गए थे। इसके बाद से ही चिड़ियाघर प्रबंधन इनकी ब्रीडिंग की तैयारी कर रहा था। दरअसल, पेंटेड स्टॉर्क ऊंचे पेड़ों पर रहते हैं और वहीं पर घोंसला बनाकर ब्रीडिंग करते हैं। पहले इनके लिए घोंसले बनाए गए लेकिन उसमें इन्हें प्राकृतिक वास नहीं मिला जिससे ब्रीडिंग में समस्या आई। लगातार कुछ साल तक प्रबंधन ने कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद बाड़े में बांस का प्लेटफॉर्म बनाया गया। वहां पर सूखी लकड़ियां बिछा दी गईं। इसमें तुलसी, बबूल, जंगल जलेबी, ईमली, यूकेलिप्टस और नीम की लकड़ियां शामिल थीं। लकड़ी रखने के बाद पक्षियों ने खुद की उठाकर अपना घोंसला बनाना शुरू किया। अक्तूबर 2025 में इन्होंने घोंसला बनाना शुरू किया और जनवरी के अंत में अंडे दिए। फरवरी के अंत में अंडे फूट गए थे लेकिन घोंसला ऊपर होने की वजह से वहां कोई नहीं देख पा रहा था। अब घोंसले में दो नए मेहमान दिखने लगे हैं।
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चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और भोजन कर रहे हैं। मां इनके लिए भी तालाब से मछली लाकर खिला रही है।
ये है खासियत
डॉ. योगेश ने बताया कि पेंटेड स्टॉर्क मूल रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के पक्षी हैं। भारत के अलावा ये श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इनकी पहचान इनके आकर्षक रंगों से होती है। गुलाबी पंख, सफेद शरीर और काले धब्बों की वजह से ये बेहद खूबसूरत नजर आते हैं। पेंटेड स्टॉर्क बेहद शांत और सामाजिक स्वभाव के पक्षी माने जाते हैं। चिड़ियाघर में यह खास आकर्षण का केंद्र हैं। यहां की हरियाली, तालाब और मौसम इनके लाइफस्टाइल के अनुकूल है।