पर्यावरण बचाएं: अमर उजाला संवाद में महिलाओं ने उठाई आवाज; कहा- सिविक सेंस लाएं, कचरा न फेंके, पेड़ बचाएं
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने शहर की सफाई, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। महिलाओं ने बढ़ती गंदगी और प्लास्टिक के उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कपड़े या जूट के बैग का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक का प्रयोग कम करें।
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कचरे का सही तरीके से निस्तारण करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि लोग गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डालें और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाएं, तो शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है।
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने शहर की सफाई, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।
महिलाओं ने बढ़ती गंदगी और प्लास्टिक के उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कपड़े या जूट के बैग का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक का प्रयोग कम करें। कार्यक्रम में पेड़ों की कटान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
वक्ताओं ने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं लेकिन इसके साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। चर्चा के दौरान नगर की सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने, जगह-जगह कूड़ेदान लगाने तथा लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। महिलाओं ने कहा कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो स्वच्छ और हरित वातावरण का सपना साकार हो सकता है।
स्नेहिल नारी संस्थान की सदस्य सविता सिंह ने कहा कि हर जगह पेड़ों की कटाई हो रही है। जहां सड़क निर्माण हो रहा है, वहां पेड़ों को बचाया जाना चाहिए। पेड़ और पेयजल की समस्या का समाधान जरूरी है। महेश्वरी सिंह ने कहा कि निर्माण कार्यों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
सुनीता सिंह ने कहा कि नौका विहार क्षेत्र में अक्सर जाम लगता है। सड़क किनारे ठेले लगते हैं। जो महिलाएं ठेला लगाकर रोजगार कर रही हैं, उनके लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। दीप्ती अग्रवाल ने कहा कि आग लगने की स्थिति में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। घंटाघर क्षेत्र में फायर स्टेशन होना चाहिए।
सड़क समतल नहीं है, जिससे बच्चे अक्सर गिर जाते हैं। नाला ऊंचा बना होने से ई-रिक्शा भी पलट चुका है। मारवाड़ी युवा मंच की कविता गोयल ने कहा कि सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ गया है। मेडिकल रोड पर दुकानदारों ने सामान सड़क तक फैला रखा है। मोहद्दीपुर से कुनराघाट तक कट काफी दूर होने से लोगों को परेशानी होती है।
एडवोकेट पूजा गुप्ता ने कहा कि गोरखपुर में काफी बदलाव आया है। आज महिलाएं पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हैं। कार्यक्रम में मुक्तकेशी त्रिपाठी, डिंपल शुक्ला, अर्चना सिंह, सुमन लता सहाय ने भी अपनी बात रखी।
वह लावारिस दिव्यांग महिलाओं को सड़क से उठाकर आश्रम में रखती हैं। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार भी कराती हैं। पुलिस की सूचना पर हिंदू और मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार अलग-अलग अंतिम संस्कार किया जाता है। हर महीने ब्लड डोनेशन कैंप भी आयोजित करती हैं। कॉलोनियों में सफाई की स्थिति खराब है। नालियों पर कब्जा कर लिया गया है और स्लैब सड़क तक बढ़ा दिए गए हैं। कुछ लोग कोनों में कचरा फेंक देते हैं: पुष्पलता सिंह, मातृ आंचल सेवा संस्थान
नकहा ओवरब्रिज के नीचे गंगानगर कॉलोनी में मजदूर टिनशेड डालकर रहते हैं। वहां 30 से 40 बच्चे हैं, जो दिनभर घूमते रहते हैं लेकिन पढ़ाई नहीं करते। उनकी पूरी पीढ़ी बर्बाद हो रही है: सीमा पांडेय, सचिव, स्नेहिल नारी संस्थान
गोरखपुर में सिविक सेंस की जरूरत है। छात्रसंघ चौराहे के पास डॉक्टरों के क्लीनिक हैं लेकिन लोग सड़क पर कचरा फेंक देते हैं। नाला बनते ही उसमें कचरा भर जाता है। पहले गोरखपुर को बड़ा देहात कहा जाता था लेकिन अब लोग इसे शहर कहते हैं। यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए तो शहर अपने आप सुंदर हो जाएगा। हर काम सरकार नहीं कर सकती: प्रियंका अग्रवाल, नई उमंग संस्था
छात्रसंघ चौराहे के पास कुछ अस्पतालों के सामने रात में कचरा पड़ा रहता है। लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए हैं, जिससे वहां से गुजरने में परेशानी होती है। सरकारी दफ्तरों में सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। कोर्ट परिसर में भी काफी गंदगी रहती है: डॉ. प्रियंका सिंह, महिला अस्पताल