अमर उजाला युवा संवाद: युवाओं ने कहा - गुरु ही गढ़ते हैं व्यक्तित्व, एआई सिर्फ जानकारी देता है
युवाओ ने संवाद में कहा कि एआई जानकारी उपलब्ध करा सकता है, जबकि गुरु अनुभव, प्रेरणा और जीवन का वास्तविक मार्गदर्शन देते हैं। इसलिए आधुनिक युग में भी गुरु-शिष्य परंपरा की प्रासंगिकता पहले की तरह बनी हुई है।
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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अमर उजाला कार्यालय में आयोजित युवा संवाद में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता और बदलते दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। संवाद में शामिल युवाओं ने माना कि तकनीक और एआई ज्ञान प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं लेकिन जीवन मूल्यों, संस्कारों और व्यक्तित्व निर्माण में गुरु का स्थान आज भी सर्वोच्च है।
संवाद की शुरुआत गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की गई। युवाओं ने बताया कि यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, विवेक और जीवन के सही मार्ग का पथ प्रदर्शक माना गया है।
गुरु केवल विषयों का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का कार्य भी करते हैं। संवाद के दौरान युवाओं ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर अपने विचार साझा किए।
उनका कहना था कि आज एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी भी विषय की जानकारी कुछ ही क्षणों में मिल सकती है। पढ़ाई, शोध और नई-नई जानकारियां हासिल करने में एआई उपयोगी साबित हो रहा है। इसके बावजूद वह मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्य और जीवन जीने की कला नहीं सिखा सकता।
गुरु का जीवन में होना बेहद जरूरी
युवाओं ने बताया कि गुरु शिष्यों के भीतर अनुशासन, संवेदनशीलता, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारियों का भाव विकसित करते हैं। यही गुण व्यक्ति को सफल होने के साथ एक अच्छा इंसान भी बनाते हैं।
युवाओं ने बताया गुरु और एआई में अंतर
- गुरु व्यक्तित्व, संस्कार और जीवन मूल्यों का निर्माण करते हैं।
- एआई केवल जानकारी और त्वरित उत्तर उपलब्ध कराता है।
- एआई सीखने का प्रभावी माध्यम है लेकिन मानवीय संवेदनाएं नहीं सिखा सकता।
- तकनीक और गुरु का संतुलित समन्वय ही बेहतर शिक्षा और व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।