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Hisar News: अदालत ने फर्जी सरकारी शिक्षक बनकर कार लोन लेने के दोषी की अपील ठुकराई
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हिसार। फर्जी दस्तावेज के सहारे खुद को सरकारी शिक्षक बताकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 3.40 लाख रुपये का कार लोन लेने वाले परमजीत को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) मंगलेश चौबे की अदालत ने मंगलवार को कोई राहत नहीं दी। अदालत ने उसकी अपील खारिज कर दी। अब इस मामले में सजा के लिए अंतिम फैसला 9 अप्रैल को सुनाया जाएगा।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार वर्ष 2013 में बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि परमजीत ने खुद को सरकारी शिक्षक बताते हुए राशन कार्ड, सैलरी सर्टिफिकेट और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज जमा कराए थे जो सभी फर्जी पाए गए। उसने हिसार के सिरसा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का पता दिया और अपनी मासिक आय 37 हजार रुपये बताई।
जांच में पता चला कि न तो वह शिक्षक था और न ही उसके द्वारा जमा किए गए सैलरी सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज वास्तविक थे। बैंक द्वारा दिए गए पते पर जांच की गई तो वहां उस नाम का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इस मामले में पुलिस ने परमजीत और सह-आरोपी दिलबाग सिंह को गिरफ्तार किया था। 7 मार्च 2019 को सीजेएम अदालत ने दोनों को धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए 5-5 साल की सजा सुनाई। सह-आरोपी दिलबाग सिंह को एडीजे की अदालत ने 22 जनवरी 2026 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।
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अदालत में चले अभियोग के अनुसार वर्ष 2013 में बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि परमजीत ने खुद को सरकारी शिक्षक बताते हुए राशन कार्ड, सैलरी सर्टिफिकेट और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज जमा कराए थे जो सभी फर्जी पाए गए। उसने हिसार के सिरसा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का पता दिया और अपनी मासिक आय 37 हजार रुपये बताई।
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जांच में पता चला कि न तो वह शिक्षक था और न ही उसके द्वारा जमा किए गए सैलरी सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज वास्तविक थे। बैंक द्वारा दिए गए पते पर जांच की गई तो वहां उस नाम का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इस मामले में पुलिस ने परमजीत और सह-आरोपी दिलबाग सिंह को गिरफ्तार किया था। 7 मार्च 2019 को सीजेएम अदालत ने दोनों को धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में दोषी ठहराते हुए 5-5 साल की सजा सुनाई। सह-आरोपी दिलबाग सिंह को एडीजे की अदालत ने 22 जनवरी 2026 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।