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महिलाएं खेती से लेकर विज्ञान तक हर क्षेत्र में आगे : प्रो. सोमनाथ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 01:47 AM IST
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Women are ahead in every field from agriculture to science: Prof. Somnath
कुरुक्षेत्र। कार्यक्रम के दौरान संबोधन करते कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा । विज्ञप्ति - फोटो : 1
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रांगण में इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (आईसीसी) की ओर से विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में “फॉस्टरिंग इनक्लूसिव कैंपस फॉर वीमेन : रोल ऑफ आईसीसी” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि आज के समय में समाज काफी हद तक पुरुष प्रधान बन गया है, जो एक गंभीर और चिंताजनक विषय है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी सकारात्मक परंपराओं और मूल्यों को याद करते हुए महिलाओं को समान सम्मान और अधिकार प्रदान करें। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं खेती से लेकर विज्ञान तक लगभग हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रही हैं।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भी लगभग 99 प्रतिशत गोल्ड मेडलिस्ट में छात्राएं आगे हैं। चाहे इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लाइफ साइंस या अन्य विज्ञान के क्षेत्र हों, हर जगह छात्राएं प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
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मुख्य अतिथि भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां (सोनीपत) की कुलगुरु प्रो. सुदेश ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण और समानता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। जब तक महिलाओं को शिक्षा, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है।

प्रो. सुदेश ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनों से ही नहीं बल्कि समाज की सकारात्मक सोच, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से सुनिश्चित की जा सकती है। शिक्षण संस्थानों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी बेहद जरूरी है ताकि वे किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा सकें। उन्होंने कहा कि आईसीसी जैसे मंच महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ सेंटर-एक की प्रो. अनु मेहरा ने संसाधन व्यक्ति के रूप में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े कानूनों और प्रक्रियाओं पर व्याख्यान दिया। दोपहर बाद आयोजित दूसरे सत्र में विवि की सीडीओई निदेशक प्रो. मंजुला चौधरी ने महिलाओं के लिए समावेशी शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों से कार्यशाला के संबंध में फीडबैक भी लिया गया। इस अवसर पर प्रो. प्रीति जैन, प्रो. आशिमा गक्खर, प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. निर्मला चौधरी, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्रो. अनिता भटनागर, डॉ. वंदना दवे सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों, व विद्यार्थियों ने भाग लिया।
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