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Bilaspur News: 65 साल बाद भी अधिकारों को तरसे भाखड़ा विस्थापित, 23 फरवरी को धरना

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 19 Feb 2026 11:58 PM IST
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Bhakra displaced people still yearn for their rights even after 65 years, protest on February 23
कोसरियां में आयोजित जिला ग्रामीण भाखड़ा सुधार समिति की बैठक में मौजूद ग्रामीण। स्रोत: समिति
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वन अधिकार, पुनर्वास, मुफ्त बिजली-पानी और रॉयल्टी में हिस्सेदारी की मांगें दोहराई
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समिति बैठक में लिया निर्णय, क्षेत्र के सभी प्रभावित परिवारों से भागीदारी का आह्वान

संवाद न्यूज एजेंसी
शाहतलाई (बिलासपुर)। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक जैश्री देवी कोसरियां में सुखदेव चंदेल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में 23 फरवरी को प्रस्तावित धरने को सफल बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि क्षेत्र के सभी भाखड़ा विस्थापित इस धरने में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि विस्थापित पिछले करीब 65 वर्ष से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं, जिससे वे अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि 60 के दशक में भाखड़ा बांध निर्माण के समय प्रभावित लोगों को कई प्रकार के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन पुनर्वास, मूलभूत सुविधाएं और स्थायी समाधान आज तक नहीं मिल पाए। बैठक में समिति ने अपनी लंबित मांगों को दोहराते हुए कहा कि वन भूमि पर बने विस्थापितों के आवास, खेती योग्य भूमि और पशुशालाओं को वन अधिकार अधिनियम-2006 के तहत अधिकार और पट्टे प्रदान किए जाएं। भाखड़ा विस्थापितों की भूमि का शीघ्र बंदोबस्त किया जाए। जिन परिवारों को अब तक प्लॉट आवंटित नहीं हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्लॉट दिए जाएं। इसके अतिरिक्त कटे हुए बिजली और पानी के कनेक्शन तुरंत बहाल करने, विस्थापितों को बिजली व पानी निशुल्क उपलब्ध करवाने की मांग उठाई गई। समिति ने विस्थापितों के बच्चों को बीबीएमबी एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने, भाखड़ा डैम से मिलने वाली रॉयल्टी का 25 प्रतिशत हिस्सा विस्थापितों के कल्याण पर खर्च करने की मांग भी रखी। इसके अलावा भाखड़ा डैम से सिंचाई और पेयजल उठाने की अनुमति देने, भूमिहीन विस्थापितों को भूमि उपलब्ध करवाने तथा सतलुज नदी पर विभिन्न स्थानों पर पुलों के निर्माण की मांग प्रमुखता से उठाई गई। मछुआरों के हितों के लिए विशेष योजना बनाने और सतलुज नदी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में क्षेत्र के अनेक विस्थापित परिवारों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समिति पदाधिकारियों ने सभी विस्थापितों से 23 फरवरी के धरने में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर एकजुटता का परिचय देने का आह्वान किया। बैठक में समिति के प्रधान देश राज शर्मा और उपाध्यक्ष श्रीराम चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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