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Kangra News: ढलियारा के ‘खूनी मोड़’ पर हादसे रोकने के लिए एक्शन प्लान तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 12 Apr 2026 06:56 AM IST
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ढलियारा में खूनी मोड़ से पहले करीब 300 मीटर पहले पुलिस प्रशासन द्वारा बनाई गई चेकपोस्ट। स्रोत :
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खतरनाक मोड़ों से पहले बनेगी चेक पोस्ट, श्रद्धालुओं को हिंदी-पंजाबी में जागरूक करेगा पुलिस प्रशासन
खास खबर...
एनएचएआई और एक्सपर्ट एजेंसी के साथ मिलकर ढूंढा जाएगा स्थायी समाधान
सतीश डढवाल
देहरागोपीपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-503 पर मुबारिकपुर से रानीताल के बीच स्थित ढलियारा के ‘खूनी मोड़’ पर लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संवेदनशील क्षेत्र में अब बहुस्तरीय सुरक्षा योजना लागू की जाएगी।
पुलिस प्रशासन की ओर से खतरनाक मोड़ से पहले एक स्थायी चेक पोस्ट स्थापित की जा रही है, जहां 3 से 4 पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। ये कर्मी विशेष रूप से पंजाब से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को रोककर उन्हें सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक करेंगे।
चालकों को हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में तीखे मोड़ों पर वाहन चलाने के नियम, गति नियंत्रण और जरूरी सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। चेक पोस्ट पर पुलिस की तैनाती सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगी, क्योंकि अधिकांश हादसे इसी समयावधि में सामने आए हैं।
चेक पोस्ट पर मौजूद पुलिस कर्मियों के पास वायरलेस सेट भी होगा। यदि कोई वाहन तेज रफ्तार या लापरवाही से चलता पाया जाता है, तो तुरंत सूचना देहरा के हनुमान चौक पर तैनात ट्रैफिक पुलिस को दी जाएगी, जहां संबंधित वाहन चालकों के चालान किए जाएंगे।
इसके साथ ही पुलिस प्रशासन स्थायी समाधान की दिशा में भी काम कर रहा है। जल्द ही एनएचएआई अधिकारियों को मौके पर बुलाकर सड़क की बनावट और खतरनाक मोड़ों का तकनीकी आकलन कराया जाएगा। एक निजी विशेषज्ञ एजेंसी की मदद से हादसों के कारणों का गहन अध्ययन भी किया जाएगा।
यदि जांच में सड़क निर्माण या डिजाइन में किसी प्रकार की खामी सामने आती है, तो इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके।
कोट्स...
- ढलियारा क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस का फोकस अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता और रोकथाम पर भी है, ताकि इन मोड़ों को सुरक्षित बनाया जा सके।
-नवदीप सिंह, एएसपी, देहरा
गति नियंत्रण ही सबसे प्रभावी उपाय
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश वालिया के अनुसार इस स्थान की भौगोलिक एवं संरचनात्मक परिस्थितियां सड़क सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। किसी भी सड़क के कर्व का डिजाइन निर्धारित डिजाइन स्पीड के अनुरूप किया जाता है, ताकि वाहन सुरक्षित रूप से मोड़ पार कर सकें। संबंधित स्थान पर कर्व अत्यधिक शार्प हैं, जो उच्च गति पर वाहन संचालन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
प्रारंभिक निर्माण के समय यह सड़क दो लेन मानकों के अनुसार विकसित की गई थी। जबकि बाद में मोड़ों को काटकर इसे लगभग तीन लेन के बराबर चौड़ा कर दिया गया। इस परिवर्तन के कारण सड़क की ज्यामिति और मूल डिजाइन स्पीड के बीच असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से ढलान वाले हिस्से में वाहन गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। इससे चालक मोड़ों पर नियंत्रण खो देते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में संरचनात्मक सुधार के साथ-साथ तत्काल प्रभाव से गति नियंत्रण सबसे प्रभावी उपाय है। इसके अंतर्गत चेतावनी संकेत, स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन तथा ट्रैफिक एनफोर्समेंट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
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एनएचएआई और एक्सपर्ट एजेंसी के साथ मिलकर ढूंढा जाएगा स्थायी समाधान
सतीश डढवाल
देहरागोपीपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-503 पर मुबारिकपुर से रानीताल के बीच स्थित ढलियारा के ‘खूनी मोड़’ पर लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संवेदनशील क्षेत्र में अब बहुस्तरीय सुरक्षा योजना लागू की जाएगी।
पुलिस प्रशासन की ओर से खतरनाक मोड़ से पहले एक स्थायी चेक पोस्ट स्थापित की जा रही है, जहां 3 से 4 पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। ये कर्मी विशेष रूप से पंजाब से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को रोककर उन्हें सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक करेंगे।
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चालकों को हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में तीखे मोड़ों पर वाहन चलाने के नियम, गति नियंत्रण और जरूरी सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। चेक पोस्ट पर पुलिस की तैनाती सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगी, क्योंकि अधिकांश हादसे इसी समयावधि में सामने आए हैं।
चेक पोस्ट पर मौजूद पुलिस कर्मियों के पास वायरलेस सेट भी होगा। यदि कोई वाहन तेज रफ्तार या लापरवाही से चलता पाया जाता है, तो तुरंत सूचना देहरा के हनुमान चौक पर तैनात ट्रैफिक पुलिस को दी जाएगी, जहां संबंधित वाहन चालकों के चालान किए जाएंगे।
इसके साथ ही पुलिस प्रशासन स्थायी समाधान की दिशा में भी काम कर रहा है। जल्द ही एनएचएआई अधिकारियों को मौके पर बुलाकर सड़क की बनावट और खतरनाक मोड़ों का तकनीकी आकलन कराया जाएगा। एक निजी विशेषज्ञ एजेंसी की मदद से हादसों के कारणों का गहन अध्ययन भी किया जाएगा।
यदि जांच में सड़क निर्माण या डिजाइन में किसी प्रकार की खामी सामने आती है, तो इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके।
कोट्स...
- ढलियारा क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसों को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस का फोकस अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता और रोकथाम पर भी है, ताकि इन मोड़ों को सुरक्षित बनाया जा सके।
-नवदीप सिंह, एएसपी, देहरा
गति नियंत्रण ही सबसे प्रभावी उपाय
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश वालिया के अनुसार इस स्थान की भौगोलिक एवं संरचनात्मक परिस्थितियां सड़क सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। किसी भी सड़क के कर्व का डिजाइन निर्धारित डिजाइन स्पीड के अनुरूप किया जाता है, ताकि वाहन सुरक्षित रूप से मोड़ पार कर सकें। संबंधित स्थान पर कर्व अत्यधिक शार्प हैं, जो उच्च गति पर वाहन संचालन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
प्रारंभिक निर्माण के समय यह सड़क दो लेन मानकों के अनुसार विकसित की गई थी। जबकि बाद में मोड़ों को काटकर इसे लगभग तीन लेन के बराबर चौड़ा कर दिया गया। इस परिवर्तन के कारण सड़क की ज्यामिति और मूल डिजाइन स्पीड के बीच असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से ढलान वाले हिस्से में वाहन गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। इससे चालक मोड़ों पर नियंत्रण खो देते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में संरचनात्मक सुधार के साथ-साथ तत्काल प्रभाव से गति नियंत्रण सबसे प्रभावी उपाय है। इसके अंतर्गत चेतावनी संकेत, स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन तथा ट्रैफिक एनफोर्समेंट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

ढलियारा में खूनी मोड़ से पहले करीब 300 मीटर पहले पुलिस प्रशासन द्वारा बनाई गई चेकपोस्ट। स्रोत :