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Kangra News: पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा की बहाली के लिए फूटा लोगों का गुस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 23 Mar 2026 06:57 AM IST
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गुलेर में रेल सेवा की बहाली को लेकर प्रदर्शन करते लोग। -स्रोत : जागरूक पाठक
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रानीताल/गुलेर (कांगड़ा)। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा की बहाली में देरी अब एक जनांदोलन का रूप लेने लगी है। रविवार को रानीताल में ज्वालामुखी रोड पर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और टैक्सी चालकों ने केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान रेल नहीं तो वोट नहीं का ऐलान करने हुए कहा कि अब आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर ट्रेन दौड़ती चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से रेलवे बोर्ड केवल ट्रायल के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। नॉर्दर्न रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर द्वारा ट्रैक को फिट घोषित करने और नौ मार्च का टाइम टेबल जारी होने के बावजूद परिचालन रोक दिया है। कांगड़ा रेल संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि रेल राज्य मंत्री स्थानीय दबाव में आकर इस जीवनरेखा को शुरू नहीं होने दे रहे हैं।
रेल सेवा बंद होने का सबसे बुरा असर क्षेत्र के आर्थिक ढांचे पर पड़ा है। होटल, टैक्सी और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग अब बेरोजगारी की कगार पर हैं। अंग्रेजों के समय की इस ऐतिहासिक रेलवे लाइन पर हजारों परिवारों का रोजगार निर्भर था, जो अब बर्बाद हो चुका है। गुलेर, रानीताल और नंदपुर भटोली के लोगों ने चेताया है कि शीघ्र ट्रेनें नहीं चलीं तो आगामी चुनावों में मतदान का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
9 मार्च का टाइम टेबल जारी होने और सेफ्टी कमिश्नर की हरी झंडी के बाद भी ट्रेनों का न चलना समझ से परे है। ऐसा लगता है कि रेल राज्य मंत्री स्थानीय दबाव में आकर इस जीवनरेखा को शुरू नहीं होने दे रहे हैं। अब हमें कोरे आश्वासन नहीं, पटरी पर दौड़ती ट्रेन चाहिए। -पीसी विश्वकर्मा, अध्यक्ष, कांगड़ा रेल संघर्ष समिति
रानीताल, गुलेर और नंदपुर भटोली के लोगों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले 4 साल से हमें केवल तारीख पर तारीख मिल रही है। अगर प्रशासन और केंद्र सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को उग्र किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। - लक्की, निवासी ज्वालामुखी रोड
रेल सेवा ठप होने से कांगड़ा घाटी का पर्यटन, होटल और टैक्सी कारोबार पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। जो उद्यमी कल तक लोगों को रोजगार देते थे, वे आज खुद बेरोजगारी की कगार पर खड़े हैं। हमारा पूरा व्यापार रेलवे पर निर्भर था, जिसे बहाल करना अब अनिवार्य है। -अभिनव शर्मा, निवासी ज्वालामुखी
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से रेलवे बोर्ड केवल ट्रायल के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। नॉर्दर्न रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर द्वारा ट्रैक को फिट घोषित करने और नौ मार्च का टाइम टेबल जारी होने के बावजूद परिचालन रोक दिया है। कांगड़ा रेल संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि रेल राज्य मंत्री स्थानीय दबाव में आकर इस जीवनरेखा को शुरू नहीं होने दे रहे हैं।
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रेल सेवा बंद होने का सबसे बुरा असर क्षेत्र के आर्थिक ढांचे पर पड़ा है। होटल, टैक्सी और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग अब बेरोजगारी की कगार पर हैं। अंग्रेजों के समय की इस ऐतिहासिक रेलवे लाइन पर हजारों परिवारों का रोजगार निर्भर था, जो अब बर्बाद हो चुका है। गुलेर, रानीताल और नंदपुर भटोली के लोगों ने चेताया है कि शीघ्र ट्रेनें नहीं चलीं तो आगामी चुनावों में मतदान का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
9 मार्च का टाइम टेबल जारी होने और सेफ्टी कमिश्नर की हरी झंडी के बाद भी ट्रेनों का न चलना समझ से परे है। ऐसा लगता है कि रेल राज्य मंत्री स्थानीय दबाव में आकर इस जीवनरेखा को शुरू नहीं होने दे रहे हैं। अब हमें कोरे आश्वासन नहीं, पटरी पर दौड़ती ट्रेन चाहिए। -पीसी विश्वकर्मा, अध्यक्ष, कांगड़ा रेल संघर्ष समिति
रानीताल, गुलेर और नंदपुर भटोली के लोगों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले 4 साल से हमें केवल तारीख पर तारीख मिल रही है। अगर प्रशासन और केंद्र सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को उग्र किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। - लक्की, निवासी ज्वालामुखी रोड
रेल सेवा ठप होने से कांगड़ा घाटी का पर्यटन, होटल और टैक्सी कारोबार पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। जो उद्यमी कल तक लोगों को रोजगार देते थे, वे आज खुद बेरोजगारी की कगार पर खड़े हैं। हमारा पूरा व्यापार रेलवे पर निर्भर था, जिसे बहाल करना अब अनिवार्य है। -अभिनव शर्मा, निवासी ज्वालामुखी