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Srinagar News: अजरबैजान में फंसे कश्मीरी छात्रों के अभिभावकों ने किया प्रदर्शन
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- बच्चों को सुरक्षित निकालने की विदेश मंत्रालय से की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ईरान और इस्रराइल के बीच जारी संघर्ष के चलते अजरबैजान में फंसे कश्मीर के छात्रों के अभिभावकों ने मंगलवार को श्रीनगर में प्रदर्शन किया। प्रेस कॉलोनी में अपनी बच्चों की सुरक्षित निकासी के लिए कुछ अभिभावक इकट्ठा हुए। उन्होंने मांग की कि अजरबैजान में फंसे उनके बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला जाए।
साथी ही उन्होंने कहा कि अन्य जगहों से बच्चों को सुरक्षित निकाला गया है जिसके लिए हम विदेश मंत्रालय का शुक्रिया अदा करते हैं लेकिन जिनके बच्चे अभी अजरबैजान में हैं उन्हें वहां तनाव के चलते नहीं निकाला जा पा रहा है। एक छात्र के पिता रियाज अहमद ने कहा कि पहले बच्चों को कोम ले जाया गया फिर बॉर्डर के जरिए अजरबैजान और आर्मेनिया पहुंचाया गया। हमने एक पैरेंट्स बॉडी बनाकर दिल्ली जाकर विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वहां कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। सभी को एक साथ नहीं निकाला जा सकता। हमें कहा गया कि हम बच्चों के टिकट बुक करें और सरकार उन्हें बॉर्डर तक एस्कॉर्ट देगी। पहले भी हमने टिकट बुक कराए थे लेकिन वे कैंसिल हो गए। हमें अजरबैजान से बच्चों को वापस लाने की तारीख भी दी गई थी और 50-50 बच्चों के ग्रुप बनाने को कहा गया था। हमने निर्देशों के अनुसार सब किया लेकिन बच्चों की निकासी नहीं हो पाई।
उन्होंने कहा कि हम मध्यम वर्गीय लोग हैं। दो बार टिकट बुक कराए। अब बच्चों को निकालने के लिए एग्जिट कोड मांगा जा रहा है जो हमारे बस की बात नहीं है। कुछ बच्चों को कोड मिला है, कुछ को नहीं। हमने 8-10 हजार रुपये खर्च कर वीजा भी बनवाया है। बच्चे और उनके परिवार दोनों ही बेहद परेशान हैं। हमारी सरकार से बस यही अपील है कि जल्द से जल्द हमारे बच्चों को सुरक्षित वापस लाया जाए।
एक अन्य अभिभावक आसिफा ने कहा कि कश्मीर के करीब 200 छात्र इस समय अजरबैजान बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय से अपील है कि अजरबैजान सरकार से बातचीत कर बच्चों को निकलने की अनुमति दिलाई जाए। जिन बच्चों के टिकट कैंसिल हो चुके हैं उन्हें जल्द री-शेड्यूल किया जाए। अजरबैजान बॉर्डर पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहां की सरकार से अनुमति नहीं मिल रही। हम आर्मेनिया के रास्ते बच्चों को लाने के लिए भी तैयार थे लेकिन भारतीय एंबेसी ने ही अजरबैजान से टिकट बुक कराने की सलाह दी थी। ऐसे में अब सरकार से अनुरोध है कि इस मुद्दे का तुरंत समाधान निकाला जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ईरान और इस्रराइल के बीच जारी संघर्ष के चलते अजरबैजान में फंसे कश्मीर के छात्रों के अभिभावकों ने मंगलवार को श्रीनगर में प्रदर्शन किया। प्रेस कॉलोनी में अपनी बच्चों की सुरक्षित निकासी के लिए कुछ अभिभावक इकट्ठा हुए। उन्होंने मांग की कि अजरबैजान में फंसे उनके बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला जाए।
साथी ही उन्होंने कहा कि अन्य जगहों से बच्चों को सुरक्षित निकाला गया है जिसके लिए हम विदेश मंत्रालय का शुक्रिया अदा करते हैं लेकिन जिनके बच्चे अभी अजरबैजान में हैं उन्हें वहां तनाव के चलते नहीं निकाला जा पा रहा है। एक छात्र के पिता रियाज अहमद ने कहा कि पहले बच्चों को कोम ले जाया गया फिर बॉर्डर के जरिए अजरबैजान और आर्मेनिया पहुंचाया गया। हमने एक पैरेंट्स बॉडी बनाकर दिल्ली जाकर विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि वहां कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। सभी को एक साथ नहीं निकाला जा सकता। हमें कहा गया कि हम बच्चों के टिकट बुक करें और सरकार उन्हें बॉर्डर तक एस्कॉर्ट देगी। पहले भी हमने टिकट बुक कराए थे लेकिन वे कैंसिल हो गए। हमें अजरबैजान से बच्चों को वापस लाने की तारीख भी दी गई थी और 50-50 बच्चों के ग्रुप बनाने को कहा गया था। हमने निर्देशों के अनुसार सब किया लेकिन बच्चों की निकासी नहीं हो पाई।
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उन्होंने कहा कि हम मध्यम वर्गीय लोग हैं। दो बार टिकट बुक कराए। अब बच्चों को निकालने के लिए एग्जिट कोड मांगा जा रहा है जो हमारे बस की बात नहीं है। कुछ बच्चों को कोड मिला है, कुछ को नहीं। हमने 8-10 हजार रुपये खर्च कर वीजा भी बनवाया है। बच्चे और उनके परिवार दोनों ही बेहद परेशान हैं। हमारी सरकार से बस यही अपील है कि जल्द से जल्द हमारे बच्चों को सुरक्षित वापस लाया जाए।
एक अन्य अभिभावक आसिफा ने कहा कि कश्मीर के करीब 200 छात्र इस समय अजरबैजान बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय से अपील है कि अजरबैजान सरकार से बातचीत कर बच्चों को निकलने की अनुमति दिलाई जाए। जिन बच्चों के टिकट कैंसिल हो चुके हैं उन्हें जल्द री-शेड्यूल किया जाए। अजरबैजान बॉर्डर पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहां की सरकार से अनुमति नहीं मिल रही। हम आर्मेनिया के रास्ते बच्चों को लाने के लिए भी तैयार थे लेकिन भारतीय एंबेसी ने ही अजरबैजान से टिकट बुक कराने की सलाह दी थी। ऐसे में अब सरकार से अनुरोध है कि इस मुद्दे का तुरंत समाधान निकाला जाए।