Live
MP Assembly Session 2026 Live: भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में नहीं हुई चर्चा, कांग्रेस का सदन से वॉक आउट
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ। भागीरथपुरा के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में गतिरोध बना रहा। विपक्ष सदन में चर्चा की मांग करता रहा। एक बार सदन 10 मिनट के लिए स्थगित भी हुआ। बाद में कांग्रेस ने सदन से वॉकआफट किया।
लाइव अपडेट
MP: बजट पर कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने वित्तीय प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने राज्य के हालिया बजट पर चर्चा करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बजट का आकार भले ही 9 प्रतिशत बढ़ाया गया हो, लेकिन यही वास्तविक विकास दर नहीं कहलाती।
सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में राजस्व व्यय का अनुपात अत्यधिक है। उनके अनुसार कुल बजट का लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा राजस्व व्यय में जा रहा है, जबकि पूंजीगत व्यय केवल 22 प्रतिशत है। उन्होंने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यह संतुलित और दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन का संकेत नहीं है।
उन्होंने वित्तीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार 3 प्रतिशत की सीमा के आधार पर कर्ज ले रही है, जबकि केंद्र की अनुमति से इसे 3.5 से 4 प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है। सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कर्ज लेने की होड़ मची है और इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल की तुलना भी की।
राष्ट्रीय राजनीति का संदर्भ देते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि वर्ष 2014 में “हर-हर मोदी, घर-घर मोदी” का नारा था, लेकिन 2025 के बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा शुरू किए गए गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में भारत की वैश्विक साख अलग थी।
उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी का उदाहरण देते हुए कहा कि संवाद और समन्वय की राजनीति ही वैश्विक नेतृत्व की पहचान होती है। वर्तमान परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश की विरासत को मिटाने का प्रयास हो रहा है। सिंह ने महात्मा गांधी के विचारों पर कथित हमलों और मनरेगा जैसी योजनाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई।
श्रीराम को लेकर भाजपा विधायक सीताशरण शर्मा ने आपत्ति ली। कहा तमीज से बात करें। आपत्तिजनक शब्द न बोले। मामले को लेकर हंगामा विलोपित करने की मांग। मनरेगा का नाम जीरामजी को लेकर कांग्रेस विधायक ने कहा था। वहीं, सत्ता पक्ष के विधायकों ने कहा कि राम का अपमान हमेशा कांग्रेस ने किया। हंगामा जारी है।
भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी सरकार पर उठाए सवाल..
ग्वालियर जिले के राजमाता विजय राधे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का ध्यानाकर्षण लगाया गया। तत्काल जांच कर भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की गई। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार किए गए हैं। बैठकों में भी किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं ली गई। अब मामले के सभी कागजात हाई कोर्ट में पेश किए गए हैं। मामला विचाराधीन है। कई नियमों में हमने संशोधन किए हैं। वहीं नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि चार साल बाद भर्ती क्यों की। शासन से क्यों अनुमति नहीं ली गई। मैं भी college की समिति का सदस्य हूं। इस कांड में हम क्यों फंसे। यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है? हम तीन-तीन विधानसभा के सदस्यों ने आपत्ति की थी। 26 पद कैसे भर लिए गए ? यह पूरी भर्ती निरस्त होनी चाहिए। कृषि मंत्री कंसाना ने कहा कि भर्ती नियम से हुई है। कोई अनियमितता नहीं हुई। कुशवाहा ने कहा कि2022 में भर्ती करनी थी। 2026 में कैसे की गई भर्ती। कोई अनुमति नहीं ली गई है।
भागीरथपुरा पर चर्चा नहीं होने के कारण कांग्रेस का सदन से वॉकआउट
भागीरथपुरा मुद्दे पर कांग्रेस चर्चा की मांग कर रही है। इस पर सदन में हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित होने के बाद फिर शुरु हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा नहीं करना चाहती है। सदन की कार्यवाही शुरु होने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भागीरथपुरा पर चर्चा होनी चाहिए। क्या सरकार पूरे मध्य प्रदेश को भागीरथपुरा बनाना चाहती है। भागीरथपुरा के मुद्दे पर चर्चा न होने के कारण कांग्रेस ने सदन से वॉकआफट किया।नेता प्रतिपक्ष ने उठाए स्वच्छ पानी और मुआवजे पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या मध्य प्रदेश में स्वच्छ पानी देने, मृत्यु पर मुआवजा बढ़ाने और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं की जा सकती। अध्यक्ष ने जवाब दिया कि इन मामलों में कार्यवाही पहले ही शुरू हो चुकी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नगरी प्रशासन और संबंधित मंत्री की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मध्य प्रदेश की जनता को शुद्ध पानी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंदौर में भ्रष्टाचार हो रहा है। सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है, यह समझ से परे है। इस मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि पूर्व घटनाओं में छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े अधिकारियों को बचा लिया जाता है। उन्होंने पूछा कि जब महापौर कहते हैं कि अधिकारी उनके फोन नहीं उठाते, तो ऐसे में उनका पद पर बने रहने का अधिकार ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सात बड़े टेंडर पूरे नहीं हुए और इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, यह स्पष्ट नहीं है। अगर कार्रवाई नहीं हुई है, तो आज इस व्यवस्था को सुधारना जरूरी है। इसलिए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा होना चाहिए। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि भागीरथपुरा मामले में न्यायालय में आयोग बनाया गया है और आयोग को अपना काम शुरू करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करने से इनकार कर दिया।
लखन गंगोरिया ने कहा- भागीरथपुरा सिर्फ इंदौर का नहीं, पूरे प्रदेश का मामला
कांग्रेस विधायक लखन गंगोरिया ने कहा कि यह सिर्फ इंदौर का भागीरथपुरा मामला नहीं है, यह पूरे प्रदेश का गंभीर मुद्दा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस पर चर्चा क्यों नहीं हो रही और सरकार गोल-गोल जवाब देकर चर्चा से क्यों बच रही है। उन्होंने बताया कि जबलपुर में भी दूषित पानी सप्लाई की शिकायतें आई हैं। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह व्यवस्था का मामला है और चर्चा सिर्फ भागीरथपुरा के कांड पर हो रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कैलाश जी, आप पूरे प्रदेश के मंत्री हैं, केवल भागीरथपुरा के नहीं। उन्होंने कहा कि हमने कई जगहों पर लोगों को दूषित पानी पीते देखा है, यह सिर्फ इंदौर का मुद्दा नहीं है।
कांग्रेस विधायक ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की जरूरत जताई
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि इंदौर को अब तक आठ बार स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है, जो सभी के लिए गर्व की बात है। लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने शहर के नाम पर कलंक लगा दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकारी, महापौर और मंत्री दिल्ली जाकर पुरस्कार लेते हैं, तो भागीरथपुरा कांड के बाद महापौर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मंत्री ने जिम्मेदारी क्यों नहीं ली?
विधायक ने आगे कहा कि कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पुरस्कार लेने के लिए वे भी गए थे। गोवर्धन सिंह ने कहा कि जब पुरस्कार लेने की बारी आती है, तो मंत्री और महापौर आगे आते हैं, जबकि कार्रवाई सिर्फ अधिकारियों पर होती है।
जयवर्धन सिंह ने बताया कि उनके सवाल में 20 मौतों की जानकारी दी गई, जबकि परिषद में 32 मौतों की जानकारी मिली। उन्होंने पूछा कि बाकी मृतकों के परिवारों को मुआवजा कब मिलेगा। इसके लिए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री ने अमृत योजना के लिए बड़ी राशि खर्च करने की बात कही है, लेकिन हादसे के बाद क्या किया जाएगा, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
उमंग सिंघार ने साधा निशाना
उमंग सिंघार ने कहा कि अन्य वर्ग के अधिकारियों को लाभ दिया गया, जबकि दलित और आदिवासी अधिकारियों को हटा दिया गया। कैलाश विजयवर्गीय ने इस पर आपत्ति जताई। उमंग सिंघार ने कहा कि अगर आप (कैलाश विजयवर्गीय) जिम्मेदारी लेते हैं, तो आपको इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूरे इंदौर में पानी की यही स्थिति है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट दी, फिर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। सिंघार ने सवाल उठाया कि अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कही ये बात
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय ने स्वयं स्वीकार किया है कि गलती हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 करोड़ रुपये ठेकेदार को अग्रिम दिए गए। योजनाएं बन रही हैं, लेकिन पांच साल बाद। उन्होंने कहा कि सरकार और उसके अधिकारी सांप की तरह रेंगते हुए काम करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सिंघार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं को भागीरथपुरा जाने से रोकने का प्रयास किया गया, जबकि वे वहां केवल संवेदना व्यक्त करने गए थे। उन्होंने कहा कि उनका इंदौर से पुराना संबंध है, वे वहां पढ़े हैं और कई साल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इंदौर में इतने घोटाले क्यों हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी आरटीआई के जवाब में नगर निगम ने बताया कि एक रात में पांच किलोमीटर सीवेज लाइन डाली गई। सरकार आंकड़े छिपाना चाहती है। हाईकोर्ट ने भी टिप्पणी की है कि सरकार की कलाबाजियां चल रही हैं।
सिंघार ने कहा कि केवल इंदौर ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में ऐसी स्थिति है। क्या सरकार शुद्ध पानी नहीं दे सकती? यह उनकी आवाज नहीं, बल्कि घरों की खामोशी है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को जीवन का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वच्छ पानी को जीवन के अधिकार से जोड़ा है। आप पानी देकर कोई कृपा नहीं कर रहे, यह आपका संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि अव्यान साहू 10 साल की मनौती के बाद पैदा हुआ था, लेकिन उसकी मौत हो गई। ऐसे में हम कैसे चैन से खाना खा सकते हैं? सरकार इसे हत्या नहीं मान रही, फिर ऐसे में मंत्री पद पर कैसे बने रह सकते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों के साथ भी भेदभाव किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि पूरा सत्ता पक्ष चाहता है कि स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न हो। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इंदौर में जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनसे पूछ लिया जाए। यदि वे कहें कि इस विषय पर चर्चा न हो, तो चर्चा न कराई जाए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने माना है कि गलती हुई और कार्रवाई भी की गई। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि टेंडर की फाइलें बहुत धीमी रफ्तार से चलती हैं। अध्यक्ष महोदय, जब तक फाइलों पर दबाव नहीं डाला जाता, वे आगे नहीं बढ़तीं।
उन्होंने कहा कि जनता को शुद्ध पानी देना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। भागीरथपुरा की घटना महज एक हादसा नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की मौत है जो लोग सरकार और प्रशासन पर करते हैं। लोग नल खोलकर पानी भरते हैं और वही पानी बच्चों व बुजुर्गों को देते हैं। उन्होंने कहा कि एक परिवार ने 10 साल की मनौती के बाद बेटी पाई थी, लेकिन उस बच्ची की भी मौत हो गई।