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Lucknow News: कोर्ट के आदेश पर एडीएम ट्रांस गोमती जांच अधिकारी नियुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 08 Jan 2026 02:04 AM IST
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लखनऊ। कोर्ट के आदेश से कुर्क हो चुके मकान का आवंटन करने के मामले में एडीजे रविंद्र प्रसाद गुप्ता के आदेश के बाद लखनऊ मंडल के अपर आयुक्त राधेश्याम ने मामले के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही के लिए अपर जिलाधिकारी ट्रांस गोमती को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। अपर आयुक्त ने पत्र लिखकर एडीजे कोर्ट को बताया कि एडीएम निर्धारित समय में जांच करके कोर्ट को और उन्हें अवगत कराएंगे।
याचिकाकर्ता मिहिरध्वज ने कोर्ट में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी। चार दिसंबर को एडीजे कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए आदेश की एक प्रति मंडलायुक्त को भेजी थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि मंडलायुक्त जांच करें कि नाका थाना क्षेत्र के विजय नगर स्थित विवादित मकान को 26 अगस्त 2008 से 13 जून 2024 के दौरान कोर्ट के आदेश से कुर्क किया गया था। मकान के कुर्क रहने के दौरान किन परिस्थितियों में उस मकान को न्यायिक तहसीलदार सदर लखनऊ की गलत रिपोर्ट के आधार पर निगरानी कर्ता मिहिरध्वज के पक्ष में तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट, कंट्रोल ऑफिसर ने आवंटित किया। यही नहीं, उस मकान पर कब्जा भी दे दिया।
कोर्ट ने कहा कि मंडलायुक्त यह भी जांच करें कि इस पूरे मामले के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। मंडलायुक्त इस मामले के लिए जिम्मेदार लोगों पर विधिक कार्यवाही करते हुए आदेश की तारीख से तीन माह के अंदर अपनी रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराएं। कोर्ट ने आदेश के अनुपालन के लिए आदेश की प्रति मुख्य सचिव और जिलाधिकारी को भी भेजने का आदेश दिया था।
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याचिकाकर्ता मिहिरध्वज ने कोर्ट में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी। चार दिसंबर को एडीजे कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए आदेश की एक प्रति मंडलायुक्त को भेजी थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि मंडलायुक्त जांच करें कि नाका थाना क्षेत्र के विजय नगर स्थित विवादित मकान को 26 अगस्त 2008 से 13 जून 2024 के दौरान कोर्ट के आदेश से कुर्क किया गया था। मकान के कुर्क रहने के दौरान किन परिस्थितियों में उस मकान को न्यायिक तहसीलदार सदर लखनऊ की गलत रिपोर्ट के आधार पर निगरानी कर्ता मिहिरध्वज के पक्ष में तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट, कंट्रोल ऑफिसर ने आवंटित किया। यही नहीं, उस मकान पर कब्जा भी दे दिया।
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कोर्ट ने कहा कि मंडलायुक्त यह भी जांच करें कि इस पूरे मामले के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। मंडलायुक्त इस मामले के लिए जिम्मेदार लोगों पर विधिक कार्यवाही करते हुए आदेश की तारीख से तीन माह के अंदर अपनी रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराएं। कोर्ट ने आदेश के अनुपालन के लिए आदेश की प्रति मुख्य सचिव और जिलाधिकारी को भी भेजने का आदेश दिया था।