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अयोध्या चढ़ावा चोरी: SIT जांच में एक और खुलासा, AI कैमरे लगवाने की हुई थी सिफारिश; ट्रस्ट ने नहीं लिया संज्ञान
Tue, 14 Jul 2026 04:43 AM IST
Digvijay Singh
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 14 Jul 2026 04:43 AM IST
सार
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि पुलिस की ओर से कई बार ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सलाह दी गई थी कि परिसर में एआई कैमरे लगवाए जाएं।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि पुलिस की ओर से कई बार ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सलाह दी गई थी कि परिसर में एआई कैमरे लगवाए जाएं। साथ ही कुछ चिह्नित संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की दखल बढ़ाई जाए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके। लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारियों, खासकर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इन सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया। उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जिसका अंजाम करोड़ों रुपये की चोरी के रूप में सामने आया।
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राम मंदिर देश के सबसे संवेदनशील मंदिरों में शामिल है। इसलिए पुलिस-प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हमेशा सतर्क रहता है। यही वजह है कि यहां सीआरपीएफ, एसएसएफ, पीएसी और पुलिस के साथ निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं। करीब ढाई हजार जवानों की तैनाती रहती है। एटीएस की भी एक टीम स्थायी रूप से मौजूद रहती है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने कुछ ऐसे स्थान चिह्नित किए थे, जो बेहद संवेदनशील हैं। वहां ट्रस्ट ने पुलिस की तैनाती नहीं की थी।
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इसको लेकर पुलिस की ओर से सुझाव दिया गया था कि इन स्थानों पर पुलिस बल बढ़ाया जाए, जिससे बेहतर तरीके से निगरानी की जा सके। लेकिन पुलिस अधिकारियों की बात ट्रस्ट ने सिरे से खारिज कर दी थी। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी और पुलिस की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है।
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मंदिर परिसर में वाहनों को स्कैन करने वाली डिवाइस आज तक नहीं आ सकी
मंदिर परिसर में वाहनों की आवाजाही बड़े पैमाने पर होती रहती है। ऐसे में वाहनों की स्कैनिंग बेहद जरूरी हो जाती है। इसके लिए करीब छह साल पहले लगभग 60 करोड़ रुपये की स्कैनिंग डिवाइस खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके बाद फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूमती रहीं। अयोध्या पुलिस ने भी सुरक्षा विभाग को कई पत्र भेजे, लेकिन इसका बजट आज तक स्वीकृत नहीं हो सका। लिहाजा छह साल से मामला सिर्फ फाइलों में ही अटका हुआ है, जबकि वाहनों की स्कैनिंग सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। बिना स्कैनिंग के वाहनों की आवाजाही सुरक्षा के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।
ऐसे कैमरे, अपराधी दिखते ही निगरानी में आते
जिन एआई कैमरों को लगाने की पुलिस ने सिफारिश की थी, उनके जरिये वहां आने-जाने वाले अपराधियों पर पूरी नजर रखी जा सकती थी। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि वर्तमान में हर अपराधी का डाटा पुलिस के पास उपलब्ध है। जैसे ही कोई अपराधी एआई कैमरों की जद में आता, उसकी लोकेशन और मूवमेंट का पता चल जाता और निगरानी आसानी से की जा सकती थी।
अब ये सब करना होगा
अब जब करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी की घटना सामने आई है, तब सभी जिम्मेदार हरकत में आए हैं। एसआईटी और पुलिस ऐसी सभी हाईटेक व्यवस्थाएं करने की सिफारिश कर रही हैं, जिससे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर हो सके। एसआईटी की विस्तृत जांच पूरी होने के बाद 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन सभी बिंदुओं पर चर्चा होगी। आने वाले समय में मंदिर परिसर हाईटेक कैमरों से लैस होगा। साथ ही पुलिस की सख्ती भी बढ़ेगी।