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खुलासा: पांच हजार रुपये में बांग्लादेश से घुसपैठ कर रहे डकैत, लूटपाट करने के लिए बनाते हैं ऐसी रणनीति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 12 Oct 2021 07:17 PM IST
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Bangladeshi robbers are attacking in Lucknow.
मुठभेड़ में घायल हुए बदमाश। - फोटो : amar ujala

चिनहट के मल्हौर इलाके में रविवार रात पुलिस मुठभेड़ में दबोचे गए तीन बांग्लादेशी डकैतों ने चौंकाने वाले राज खोले हैं। इस मुठभेड़ में जहां दो बदमाश घायल हुए तो वहीं एक सिपाही भी चोटिल हो गया। बांग्लादेशी डकैतों का गिरोह राजधानी की पॉश कॉलोनियों में रेकी कर खासकर रेलवे लाइन के किनारे मकानों में डकैती डालता था।



इन डकैतों ने बताया कि ये लोग बांग्लादेश से भारत की सीमा में पश्चिम बंगाल के रास्ते महज पांच हजार से दस हजार रुपये खर्च कर घुसपैठ कर लेते हैं और फिर सरगना द्वारा बताए गए देश के अलग-अलग शहरों में जाकर डकैती को अंजाम देते हैं। ये रेल ट्रैक के किनारे झोपड़ी बनाकर रहते थे जिससे पुलिस गश्त से बच सकें। इस गिरोह की तलाश पुलिस को एक साल से थी।

डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन के मुताबिक, गोमतीनगर इलाके में डकैती डालने वाले गिरोह के बारे में जानकारी जुटा रही सर्विलांस टीम ने रविवार देर रात बांग्लादेशी डकैतों को चिनहट इलाके में घेर लिया था। मल्हौर स्टेशन के पास पुलिस से घिरे बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में दो डकैत घायल हो गए। वहीं एक अन्य को पुलिस ने पकड़ लिया।

पुलिस गिरफ्त में आए डकैतों में बांग्लादेश के खुलना मोर्लगंज के सनकीभगा निवासी शेख रूबेल उर्फ रबीउल, रेंडा शोरन के अमरागासिया का आलम उर्फ अल और बार्गेहाट कलिकाबरी का रबीउल शामिल हैं। पूछताछ में तीनों ने कुबूल किया कि राजधानी में उनके गिरोह के आठ और सदस्य सक्रिय हैं जो विभिन्न इलाकों में फैले हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है।

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Bangladeshi robbers are attacking in Lucknow.
घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala

फरार डकैतों में खुलना का हमजा, सनकीभगा का असलम, चिटगांव का नासिर उर्फ नसीर, खुलना का बिल्लाल, सुटोबुदरा का नूर इस्लाम, बरीसाल का शुमान और नूर खान शामिल हैं। पुलिस गिरफ्त में आए तीनों डकैतों के खिलाफ चिनहट में चार मुकदमे दर्ज हैं। वहीं इस गिरोह के खिलाफ चिनहट, विभूतिखंड, गोमतीनगर, माल, वाराणसी के रोहनिया, मध्य प्रदेश के कटनी में मुकदमा दर्ज है। पुलिस ने आरोपियों के पास से पिस्तौल, कारतूस, तमंचा, बांका, लोहे का सब्बल, दो पायल, 30,600 रुपये, पांच हजार बांग्लादेशी रुपये, आधार कार्ड व बैंक पासबुक बरामद की है।

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Bangladeshi robbers are attacking in Lucknow.
- फोटो : amar ujala

पश्चिम बंगाल की तरफ से करते हैं अवैध घुसपैठ
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, यह गिरोह पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों से भारत में प्रवेश करता है। इसके बाद वह देश के कई प्रदेशों में फैल जाते हैं। इस गिरोह के निशाने पर राजधानी, मेट्रोपॉलिटन सिटी, बड़े व औद्योगिक जिले होते हैं। गिरोह के सदस्य इन जिलों में रेलवे स्टेशन के आसपास खाली मैदान पर अपना ठिकाना बनाते हैं। इसके लिए झुग्गी बस्ती बसा लेते है जिसमें कुछ सामान्य लोगों को भी बसा लेते है ताकि कोई संदेह न करे। इसके बाद दिन में कूड़ा बीनने, कबाड़ी, चाय व फेरीवाला बनकर बंद मकानों व कम सदस्यों वाले मकानों की रेकी करते हैं। खासकर ऐसे मकान जहां पर बुजुर्ग और महिलाएं हो।

रेकी के बाद रात को एक से तीन बजे के बीच में 8-10 लोग धावा बोलते हैं। चादर या परदे से परिवार के सदस्यों को बंधक बनाते हैं। डराने के लिए असलहे व धारदार हथियार का प्रयोग करते हैं। विरोध पर हमला भी करते हैं लेकिन गोली चलाने में गिरोह हिचकता है, ताकि किसी को पता न चले कि डकैत घर के अंदर घुसे हैं। इसके बाद कीमती जेवरात व नकदी समेटकर निकल जाते हैं। दो से तीन सदस्य वारदात स्थल के आसपास व झाड़ियों में छिपकर पुलिस की हरकतों और घर में आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखते हैं।

Bangladeshi robbers are attacking in Lucknow.
मुठभेड़ में घायल हुआ बदमाश। - फोटो : amar ujala

रेल ट्रैक का किनारा सबसे सुरक्षित ठिकाना
डकैतों ने पुलिस को बताया कि भारत व बांग्लादेश सीमा पर नदी पार कर वह 24 परगना में प्रवेश करते हैं। यहां कुछ लोग सीमा पार कराने का काम करते है। इसके बदले प्रति व्यक्ति 5 से 10 हजार रुपये लेते हैं। इसके बाद ट्रेन से गिरोह के सदस्य सरगना द्वारा बताए गए शहरों की तरफ रुख करते हैं। वहां रेलवे पटरी के आसपास के जंगलों में अपना सामान छिपा देते हैं। डकैतों ने बताया कि रेल ट्रैक पर पुलिस की गश्त नहीं होती है। इसलिए यह हमारे लिए सुरक्षित रास्ता होता है। पास के रेलवे स्टेशन पर पहुंचते हैं। वहां कुछ देर तक छिपने के बाद जो भी ट्रेन मिल जाती उससे आगे निकल जाते हैं।
 

गोमतीनगर में डकैती डालने घर में घुसे थे बदमाश
एडीसीपी पूर्वी के मुताबिक, इस गिरोह ने गोमतीनगर इलाके में शुक्रवार को एक घर पर धावा बोला था। गोमतीनगर फ्लाईओवर के पास स्थित इस मकान में देर रात डकैत घुसे थे। उनके अंदर घुसते ही कुछ देर में उसी मकान के सामने से पुलिस टीम गश्त करती हुई निकली। सायरन की आवाज से डकैत कुछ देर के लिए छिप गए। दोबारा प्रयास शुरू किया तो फिर पुलिस की दूसरी गाड़ी आती दिखी। पुलिस के मुताबिक, इस गाड़ी में सवार पुलिसकर्मी जिस मकान में डकैत घुसे थे, उसी के सामने करीब 10 मिनट तक रुके रहे। डकैतों ने बताया कि जब पुलिस टीम रुकी तो उनको लगा कि मकान मालिक को संदेह हो गया है। उसने ही पुलिस को सूचना दे दी है। इसके बाद वे लोग बिना वारदात किए ही निकल गए।

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Bangladeshi robbers are attacking in Lucknow.
मुठभेड़ के बाद मौजूद पुलिसकर्मी व अन्य। - फोटो : amar ujala

सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए थे सभी आरोपियों के चेहरे
पुलिस के मुताबिक, गोमतीनगर में शुक्रवार को जिस मकान में बदमाश घुसे थे। उसमें और आसपास के कई घरों में सीसीटीवी कैमरे लगे थे। उनमें सभी बदमाशों की तस्वीर कैद हो गई। पुलिस को जब शनिवार को सूचना मिली तो फुटेज खंगाली जिसमें सभी डकैतों की साफ तस्वीर मिली। इसके बाद उनकी तलाश तेज हुई। रविवार को डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन की सर्विलांस टीम व गोमतीनगर क्राइम टीम संयुक्त रूप से संदिग्धों की तलाश में जुटी थी। इसी बीच टीम चिनहट के विकल्पखंड इलाके में पहुंची जहां इंस्पेक्टर चिनहट घनश्याम मणि त्रिपाठी की टीम भी साथ हो ली। मल्हौर के पास रेलवे पटरी के पास कुछ संदिग्ध दिखे। पुलिस ने घेराबंदी शुरू की तो डकैतों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में दो बदमाश घायल हो गए। एक सिपाही भी चोटिल हो गया।

जेवरात बेचकर नकदी भेजते थे घर
पुलिस के मुताबिक, डकैती के दौरान मिले जेवरात को बदमाश पश्चिम बंगाल वापस जाते समय रास्ते के किसी भी शहर में उतरकर बेच देते थे। ज्यादातर जेवर पश्चिम बंगाल के ही जिलों में बेचते थे। वहां के सराफा कारोबारी ज्यादा पूछताछ नहीं करते हैं। मिली रकम को 24 परगना के रास्ते सीमा पर अपने परिवारीजनों या परिचितों को बुलाकर घर भेज देते हैं। इसके बाद फिर वापस आकर वारदात को अंजाम देने में जुट जाते हैं।

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