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Budget 2026: टैरिफ से जूझती लेदर इंडस्ट्री को कस्टम नियमों और विदेशी निवेश में राहत, खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Mon, 02 Feb 2026 09:40 AM IST
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सार
Budget 2026: टैरिफ से जूझती लेदर इंडस्ट्री को कस्टम नियमों और विदेशी निवेश में राहत मिलेगी। साथ ही एमएसएमई को मजबूती, लेदर सेक्टर को राहत, कस्टम नियमों में सरलीकरण से लागत घटेगी। डिजाइन और एफडीआई से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। आगे पढ़ें पूरी खबर...
लेदर इंडस्ट्री को आंशिक राहत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों के बीच केंद्रीय बजट ने लेदर इंडस्ट्री को आंशिक राहत दी है। उद्योग का मानना है कि एमएसएमई, कस्टम नियमों में सरलीकरण, डिजाइन और विदेशी निवेश से जुड़े फैसलों से यूपी के लेदर सेक्टर को मजबूती मिलेगी, हालांकि कुछ अहम मांगें अब भी लंबित हैं। अनुमान है कि इन प्रावधानों से अगले तीन साल में यूपी के लेदर बाजार में करीब 5000 करोड़ रुपये का उछाल आएगा और लगभग 3000 करोड़ रुपये का नया विदेशी निवेश आएगा।
लेदर इंडस्ट्री के मुताबिक बजट में हर सेक्टर को टच किया गया है। लेदर सेक्टर की 95–98 फीसदी इकाइयां एमएसएमई के तहत आती हैं। बजट में ट्रेड स्कीम का सरलीकरण और 10 हजार करोड़ रुपये से एमएसएमई चैंपियन बनाने की पहल को उद्योग के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। इससे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी बेहतर लाभ मिलेगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्थापना से घरेलू डिजाइन क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को अवसर मिलेंगे। फेमा में संशोधन के बाद फुटवियर सेक्टर में सीधा विदेशी निवेश आने का रास्ता साफ होगा।
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लेदर इंडस्ट्री के मुताबिक बजट में हर सेक्टर को टच किया गया है। लेदर सेक्टर की 95–98 फीसदी इकाइयां एमएसएमई के तहत आती हैं। बजट में ट्रेड स्कीम का सरलीकरण और 10 हजार करोड़ रुपये से एमएसएमई चैंपियन बनाने की पहल को उद्योग के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। इससे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी बेहतर लाभ मिलेगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की स्थापना से घरेलू डिजाइन क्षमता बढ़ेगी और युवाओं को अवसर मिलेंगे। फेमा में संशोधन के बाद फुटवियर सेक्टर में सीधा विदेशी निवेश आने का रास्ता साफ होगा।
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कस्टम्स सरलीकरण से लागत में कमी
क्रस्ट और फिनिश्ड लेदर पर ड्यूटी खत्म करने की उम्मीद पूरी नहीं हुई, हालांकि दरों में कुछ कमी की गई है। कस्टम एक्ट के सरलीकरण से अब निर्यात के लिए पैक माल नहीं खोला जाएगा। एआई स्कैनर से जांच होगी। फैक्टरी-सील कंटेनर सीधे पोर्ट तक जाएंगे, जिससे करीब तीन दिन की बचत और ट्रांजेक्शन लागत में कमी आएगी। कोरियर में अनलिमिटेड वैल्यू की छूट से निर्यात ऑर्डर में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना है।नियमों में अहम बदलाव
- ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट में निर्यात की समय सीमा 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल
- फुटवियर अपर आयात को मंजूरी
- एफडीआई संशोधन से अगले वर्षों में 20 फीसदी ग्रोथ का अनुमान
यूपी का लेदर बाजार
- देश से कुल निर्यात : 46 हजार करोड़
- यूपी से निर्यात : 15 हजार करोड़
- यूपी का घरेलू कारोबार : 20 हजार करोड़
- नए बदलावों का असर : 15 फीसदी सालाना
फैक्ट फाइल
- लेदर सेक्टर की 95–98% इकाइयां एमएसएमई के अंतर्गत
- 10 हजार करोड़ रुपये से “एमएसएमई चैंपियन” पहल
- ट्रेड स्कीम का सरलीकरण, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को बढ़ावा
- फैक्टरी-सील कंटेनर सीधे पोर्ट तक, 3 दिन की बचत
- अगले 3 साल में 5000 करोड़ का बाजार उछाल, 3000 करोड़ नया एफडीआई अनुमान
एफडीडीआई के अध्यक्ष व चर्म निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष आर के जालान ने कहा कि इंडस्ट्री की कई मांगें मानी गई हैं। लेदर सेक्टर को फायदा होगा। फुटवियर अपर का आयात की अनुमति नहीं थी। इसे भी मंजूरी मिल गई। ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट की समयसीमा एक साल होना बड़ी राहत है। ग्रोथ 10–12 फीसदी रहने की उम्मीद है।
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष मुख्तारुल अमीन का कहना है कि बजट में वित्तमंत्री से काफी कुछ मिला लेकिन कुछ का इंतजार अभी बाकी है। फिनिश्ड लेदर पर ड्यूटी कम नहीं हुई। रॉ हाइड पर ड्यूटी नहीं बढ़ाई गई। हालांकि कस्टम्स में संशोधन ईज आफ डूइंग की दिशा में उठाया गया अच्छा कदम है।
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष मुख्तारुल अमीन का कहना है कि बजट में वित्तमंत्री से काफी कुछ मिला लेकिन कुछ का इंतजार अभी बाकी है। फिनिश्ड लेदर पर ड्यूटी कम नहीं हुई। रॉ हाइड पर ड्यूटी नहीं बढ़ाई गई। हालांकि कस्टम्स में संशोधन ईज आफ डूइंग की दिशा में उठाया गया अच्छा कदम है।
