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Lucknow News: मेहनत, हौसले और अनुशासन की कहानी बने सीएमए के नतीजे
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लखनऊ। द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) के लखनऊ चैप्टर ने जून 2026 सत्र की सीएमए फाइनल और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। इस बार नतीजे सिर्फ मेधावियों की सूची तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की प्रेरक कहानियां भी सामने आईं। सीएमए फाइनल में आभास सिंह और इंटरमीडिएट में अंकिता सिंह ने लखनऊ चैप्टर में शीर्ष स्थान हासिल किया। कई विद्यार्थियों ने बिना कोचिंग, नियमित सेल्फ स्टडी और पारिवारिक सहयोग के दम पर सफलता अर्जित कर यह साबित किया कि लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी पूंजी है।
सीएमए फाइनल परीक्षा में कुल 151 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें 28 सफल रहे। इनमें 16 छात्रों ने तीन ग्रुप और पांच छात्रों ने चार ग्रुप (बोथ ग्रुप) पास किए। फाइनल का कुल पास प्रतिशत 16.55 रहा। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में 413 परीक्षार्थियों में से 53 सफल हुए। इनमें 40 छात्रों ने ग्रुप-1 और 10 छात्रों ने ग्रुप-2 में सफलता हासिल की।
सीएमए फाइनल के टॉप मेधावी
आभास सिंह – 54.12% (बोथ ग्रुप)
उज्ज्वल केसरवानी – 52.25% (बोथ ग्रुप)
संस्कृति गुप्ता – 51.12% (बोथ ग्रुप)
संजीविनी कपूर – 50.50% (बोथ ग्रुप)
प्राची गुप्ता – 44.87% (बोथ ग्रुप)
सीएमए इंटरमीडिएट के टॉप मेधावी
अंकिता सिंह – 56.00% (बोथ ग्रुप)
अंशिता रस्तोगी – 51.75% (बोथ ग्रुप)
साकेत मौर्या – 50.62% (बोथ ग्रुप)
मानसी पाठक – 50.00% (बोथ ग्रुप)
समीक्षा पांडेय – 67.50% (दूसरा ग्रुप)
किसी ने बिना कोचिंग पाई सफलता, किसी ने परिवार के संघर्ष को बनाया ताकत
शुरुआत में मुझे काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि मेरे परिवार में कोई भी इस क्षेत्र से नहीं जुड़ा था। मैंने फैजाबाद पब्लिक स्कूल से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिना किसी मार्गदर्शन के सीएमए फाउंडेशन में दाखिला लिया। दोनों ग्रुप की ऑनलाइन पढ़ाई की और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। यही मेरी सफलता का सबसे बड़ा आधार बना। - आभास सिंह, फाइनल पास
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मैंने इस परीक्षा के लिए लगातार छह महीने तक कड़ी मेहनत की। इस दौरान किसी पार्टी या सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। मेरी मेहनत रंग लाई और पहले ही प्रयास में मुझे यह सफलता मिली। - संस्कृति गुप्ता, फाइनल पास
मैंने रोजाना तय शेड्यूल के अनुसार पढ़ाई की। मेरी सफलता में मेरे माता-पिता और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। - उज्ज्वल केसरवानी, फाइनल पास
मैंने हमेशा अपने लक्ष्य पर फोकस रखा और उसी का परिणाम है कि मुझे सफलता मिली। मैं सीएमए की तैयारी कर रहे युवाओं से कहना चाहूंगी कि बिना हिम्मत हारे, ईमानदारी और अनुशासन के साथ पढ़ाई करें, सफलता जरूर मिलेगी। - संजीविनी कपूर, फाइनल पास
मेरे पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। सीएमए की पढ़ाई के दौरान मेरे बड़े भाइयों ने मेरा हर कदम पर साथ दिया। मेरा मानना है कि यह कम फीस में उज्ज्वल भविष्य देने वाला बेहतरीन प्रोफेशनल कोर्स है। - मीर हमजा, फाइनल पास
मैंने पहले ही प्रयास में दोनों ग्रुप पास किए हैं। यह सफलता मुझे बिना किसी कोचिंग के, केवल स्वयं अध्ययन से मिली है। मेरे पिता शंभू निषाद निजी नौकरी करते हैं और मेरी मां दुर्गा निषाद गृहिणी हैं। मेरी सफलता में परिवार और शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है। मैं सभी छात्रों से कहना चाहूंगी कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उस पर पूरा ध्यान रहे, तो सफलता जरूर मिलती है। -अंकिता निषाद, इंटरमीडिएट पास
परीक्षा की तैयारी के दौरान मेरे परिवार और इंस्टीट्यूट के सदस्यों ने मेरा पूरा सहयोग किया। अब मेरा अगला लक्ष्य सीएमए फाइनल परीक्षा पास करना है। मेरे पिता किसान हैं और मैं उनका नाम रोशन करना चाहता हूं। - साकेत मौर्या, इंटरमीडिएट पास
मैं और मेरे भाई देवेंद्र सिंह, दोनों ने इंटरमीडिएट परीक्षा पास की है। हमारा घर अमेठी में है, लेकिन हम दोनों लखनऊ में रहकर रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे। हमारी सफलता में मेरे चाचा का सबसे बड़ा योगदान रहा है। - शिवेंद्र विक्रम सिंह, इंटरमीडिएट पास
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सीएमए फाइनल परीक्षा में कुल 151 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें 28 सफल रहे। इनमें 16 छात्रों ने तीन ग्रुप और पांच छात्रों ने चार ग्रुप (बोथ ग्रुप) पास किए। फाइनल का कुल पास प्रतिशत 16.55 रहा। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में 413 परीक्षार्थियों में से 53 सफल हुए। इनमें 40 छात्रों ने ग्रुप-1 और 10 छात्रों ने ग्रुप-2 में सफलता हासिल की।
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सीएमए फाइनल के टॉप मेधावी
आभास सिंह – 54.12% (बोथ ग्रुप)
उज्ज्वल केसरवानी – 52.25% (बोथ ग्रुप)
संस्कृति गुप्ता – 51.12% (बोथ ग्रुप)
संजीविनी कपूर – 50.50% (बोथ ग्रुप)
प्राची गुप्ता – 44.87% (बोथ ग्रुप)
सीएमए इंटरमीडिएट के टॉप मेधावी
अंकिता सिंह – 56.00% (बोथ ग्रुप)
अंशिता रस्तोगी – 51.75% (बोथ ग्रुप)
साकेत मौर्या – 50.62% (बोथ ग्रुप)
मानसी पाठक – 50.00% (बोथ ग्रुप)
समीक्षा पांडेय – 67.50% (दूसरा ग्रुप)
किसी ने बिना कोचिंग पाई सफलता, किसी ने परिवार के संघर्ष को बनाया ताकत
शुरुआत में मुझे काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि मेरे परिवार में कोई भी इस क्षेत्र से नहीं जुड़ा था। मैंने फैजाबाद पब्लिक स्कूल से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिना किसी मार्गदर्शन के सीएमए फाउंडेशन में दाखिला लिया। दोनों ग्रुप की ऑनलाइन पढ़ाई की और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। यही मेरी सफलता का सबसे बड़ा आधार बना। - आभास सिंह, फाइनल पास
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मैंने इस परीक्षा के लिए लगातार छह महीने तक कड़ी मेहनत की। इस दौरान किसी पार्टी या सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। मेरी मेहनत रंग लाई और पहले ही प्रयास में मुझे यह सफलता मिली। - संस्कृति गुप्ता, फाइनल पास
मैंने रोजाना तय शेड्यूल के अनुसार पढ़ाई की। मेरी सफलता में मेरे माता-पिता और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। - उज्ज्वल केसरवानी, फाइनल पास
मैंने हमेशा अपने लक्ष्य पर फोकस रखा और उसी का परिणाम है कि मुझे सफलता मिली। मैं सीएमए की तैयारी कर रहे युवाओं से कहना चाहूंगी कि बिना हिम्मत हारे, ईमानदारी और अनुशासन के साथ पढ़ाई करें, सफलता जरूर मिलेगी। - संजीविनी कपूर, फाइनल पास
मेरे पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। सीएमए की पढ़ाई के दौरान मेरे बड़े भाइयों ने मेरा हर कदम पर साथ दिया। मेरा मानना है कि यह कम फीस में उज्ज्वल भविष्य देने वाला बेहतरीन प्रोफेशनल कोर्स है। - मीर हमजा, फाइनल पास
मैंने पहले ही प्रयास में दोनों ग्रुप पास किए हैं। यह सफलता मुझे बिना किसी कोचिंग के, केवल स्वयं अध्ययन से मिली है। मेरे पिता शंभू निषाद निजी नौकरी करते हैं और मेरी मां दुर्गा निषाद गृहिणी हैं। मेरी सफलता में परिवार और शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है। मैं सभी छात्रों से कहना चाहूंगी कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उस पर पूरा ध्यान रहे, तो सफलता जरूर मिलती है। -अंकिता निषाद, इंटरमीडिएट पास
परीक्षा की तैयारी के दौरान मेरे परिवार और इंस्टीट्यूट के सदस्यों ने मेरा पूरा सहयोग किया। अब मेरा अगला लक्ष्य सीएमए फाइनल परीक्षा पास करना है। मेरे पिता किसान हैं और मैं उनका नाम रोशन करना चाहता हूं। - साकेत मौर्या, इंटरमीडिएट पास
मैं और मेरे भाई देवेंद्र सिंह, दोनों ने इंटरमीडिएट परीक्षा पास की है। हमारा घर अमेठी में है, लेकिन हम दोनों लखनऊ में रहकर रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे। हमारी सफलता में मेरे चाचा का सबसे बड़ा योगदान रहा है। - शिवेंद्र विक्रम सिंह, इंटरमीडिएट पास