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Lucknow News: ई रिक्शा, ई आटो की बिक्री पर अंकुश लगाने की मांग
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मंडलायुक्त को भेजा पत्र, अवैध चार्जिंग स्टेशनों की समस्या भी उठाई
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। जाम की वजह बने ई-रिक्शा और ई-ऑटो की बिक्री की संख्या तय करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में टैम्पो-टैक्सी एवं आटो रिक्शा संयुक्त मोर्चा की ओर से मंडलायुक्त को पत्र भी लिखा है।
मोर्चा का दावा है कि हाईकोर्ट ने रिट पर आदेश में कहा है कि एक साल में ई-आटो व ई रिक्शा का पंजीकरण संख्या निर्धारित कर इसमें कमी लाई जा सकती है। इस पर विचार किया जा सकता है। वर्तमान में प्रतिमाह हजार तक ई-रिक्शा व ई-आटो की बिक्री हो रही है। मोर्चा अध्यक्ष प्रभात कुमार दीक्षित(पंकज) ने बताया कि लखनऊ में प्रतिमाह 300 ई-रिक्शा व 600 ई-आटो पंजीकृत हो रहे हैं। अब तक सवा लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। इसमें करीब 35 हजार के पंजीकरण समाप्त भी चुके हैं, फिर भी संचालन हो रहा है। इससे शहर में जाम लग रहा है। मोर्चा की की ओर से पहले भी कई प्रत्यावेदन दिए गए थे, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लखनऊ की 75 लाख की आबादी के सापेक्ष 1.25 लाख ई-रिक्शा व ई-ऑटो, 7500 सीएनजी आटो रिक्शा व विक्रम टेम्पो, 150 सीएनजी बसें, 150 इलेक्ट्रिक बसें, 15000 एप आधारित टैक्सियां व करीब दस हजार वैध व अवैध बाइक टैक्सियां संचालित हैं। करीब 22.50 लाख निजी वाहन भी पंजीकृत होकर संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को परमिट से मुक्त रखा है। इसके कारण ही लखनऊ में प्रतिवर्ष ई-आटो व ई-रिक्शा सवारी वाहनों का अंधाधुंध पंजीकरण हो रहा है।
घरेलू बिजली से चार्ज हो रहे ई-वाहन
उपाध्यक्ष किशोर वर्मा पहलवान ने बतायाकि मंडलायुक्त को लिखे पत्र में वाहनों की चार्जिंग घरेलू बिजली कनेक्शनों या अवैध चार्जिंग स्टेशनों से होती है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। ई-रिक्शा व ई-आटो सवारी वाहन में पंजीकृत होने के बावजूद मालभाड़ा भी बेधड़क ढो रहे हैं। इससे राजस्व हानि हो रही है।
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। जाम की वजह बने ई-रिक्शा और ई-ऑटो की बिक्री की संख्या तय करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में टैम्पो-टैक्सी एवं आटो रिक्शा संयुक्त मोर्चा की ओर से मंडलायुक्त को पत्र भी लिखा है।
मोर्चा का दावा है कि हाईकोर्ट ने रिट पर आदेश में कहा है कि एक साल में ई-आटो व ई रिक्शा का पंजीकरण संख्या निर्धारित कर इसमें कमी लाई जा सकती है। इस पर विचार किया जा सकता है। वर्तमान में प्रतिमाह हजार तक ई-रिक्शा व ई-आटो की बिक्री हो रही है। मोर्चा अध्यक्ष प्रभात कुमार दीक्षित(पंकज) ने बताया कि लखनऊ में प्रतिमाह 300 ई-रिक्शा व 600 ई-आटो पंजीकृत हो रहे हैं। अब तक सवा लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। इसमें करीब 35 हजार के पंजीकरण समाप्त भी चुके हैं, फिर भी संचालन हो रहा है। इससे शहर में जाम लग रहा है। मोर्चा की की ओर से पहले भी कई प्रत्यावेदन दिए गए थे, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लखनऊ की 75 लाख की आबादी के सापेक्ष 1.25 लाख ई-रिक्शा व ई-ऑटो, 7500 सीएनजी आटो रिक्शा व विक्रम टेम्पो, 150 सीएनजी बसें, 150 इलेक्ट्रिक बसें, 15000 एप आधारित टैक्सियां व करीब दस हजार वैध व अवैध बाइक टैक्सियां संचालित हैं। करीब 22.50 लाख निजी वाहन भी पंजीकृत होकर संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को परमिट से मुक्त रखा है। इसके कारण ही लखनऊ में प्रतिवर्ष ई-आटो व ई-रिक्शा सवारी वाहनों का अंधाधुंध पंजीकरण हो रहा है।
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घरेलू बिजली से चार्ज हो रहे ई-वाहन
उपाध्यक्ष किशोर वर्मा पहलवान ने बतायाकि मंडलायुक्त को लिखे पत्र में वाहनों की चार्जिंग घरेलू बिजली कनेक्शनों या अवैध चार्जिंग स्टेशनों से होती है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। ई-रिक्शा व ई-आटो सवारी वाहन में पंजीकृत होने के बावजूद मालभाड़ा भी बेधड़क ढो रहे हैं। इससे राजस्व हानि हो रही है।