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Ram Mandir: राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग, प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी; महंत धर्मदास ने लगाई ये गुहार
Wed, 01 Jul 2026 03:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 01 Jul 2026 03:47 AM IST
सार
हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत धर्मदास ने कहा कि श्रीराम मंदिर का प्रबंधन मौजूदा ट्रस्ट के बजाय साधु-संतों को सौंपा जाना चाहिए।
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने ट्रस्ट में भगवान श्रीराम के वंशजों, राम मंदिर आंदोलन के कारसेवकों के परिजनों और आंदोलन से जुड़े लोगों को प्रतिनिधित्व देने की मांग करते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगे।
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साधु-संतों को सौंपा जाए मंदिर का प्रबंधन : धर्मदास
हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत धर्मदास ने कहा कि श्रीराम मंदिर का प्रबंधन मौजूदा ट्रस्ट के बजाय साधु-संतों को सौंपा जाना चाहिए। ट्रस्ट पैसे का हिसाब-किताब रख सकता है, लेकिन धार्मिक और प्रशासनिक कामकाज संतों के हाथों में ही रहने चाहिए।
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मामले का राजनीतिकरण न किया जाए : मायावती
बसपा सुप्रीमो और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा, मीडिया में इस बारे में आ रही खबरें अति गंभीर व चिंतनीय है। ऐसे लोग कतई बख्शे नहीं जाने चाहिए, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं है।
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पुलिस को सब पता था, रकम बरामद कराने में जुटी थी...
चढ़ावा चोरी का मामला पुलिस को भी पहले दिन से पता था। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ मिलकर पुलिस रकम बरामद करवाने में मदद कर रही थी। इसका खुलासा सीसीटीवी फुटेज से ही हुआ है, जिसमें पुलिसकर्मी अविनाश शुक्ला को गाड़ी में बैठाते कैद हुए हैं। साथ में एक बैग है, जिसमें बरामद रकम बताई जा रही है।
हकीकत में पुलिस भी वही कर रही थी, जो ट्रस्ट के पदाधिकारी कह रहे थे। इसलिए सवालों के जवाब में सिर्फ पुलिस की चुप्पी थी। छह जून को चढ़ावा चोरी का मामला मीडिया में आया था। जब मामले ने तूल पकड़ा और ट्रस्टी सवालों से घिरे, तब एसआईटी गठन की मांग हुई। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद 23 जून को केस दर्ज किया गया।
एफआईआर होने से पहले तक कोई भी पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। हर किसी का जवाब था कि पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं है, क्योंकि कोई शिकायत नहीं मिली है। लेकिन दो दिन पहले एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें कुछ लोग अविनाश शुक्ला के घर जाकर उसको कार में बैठाते नजर आ रहे हैं।