सद्भाव की अयोध्या : अफवाहें अपनी जगह, यहां जगा रहे भाईचारे की अलख
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रामनगरी का अपना एक राग व मिजाज है। द्वेष-विद्वेष की भावनाओं से दूर यहां प्रेम व सद्भाव बरबस बरसता है। बाहर चाहे जो अफवाहें फैल रही हों, लेकिन अयोध्या अपने पुरातन मिठास का मधुर संगीत बजाती नजर आ रही है।
मुस्लिम मोहल्लों में निकाह हो या हिंदू मोहल्लों के धार्मिक अनुष्ठान, लोग एक-दूसरे के कार्यक्रमों में शिरकत कर सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं। हिंदू समुदाय 9 नवंबर से शुरू हो रही लगन की प्रतीक्षा में है। कहीं संशय में शादियां टाली जा रही हैं, तो कहीं बुकिंग करके शादी की तैयारी चल रही है।
अमर उजाला टीम मंगलवार को शहर का मिजाज परखने नवाब शुजाउद्दौला के मकबरे के निकट पहुंची, तो आपसी सद्भाव का अलग ही नजारा था। जहां एक ओर अयोध्या की सरहदों के 14 कोसी की परिधि में लाखों श्रद्धालु जय श्रीराम के उद्घोष कर रहे थे, वहीं नवाब शुजाद्दौला के मकबरे के निकट एक मुस्लिम परिवार की शादी में हिंदू समाज की सहभागिता अपने आप में सौहार्द की बेहतरीन कड़ियां पिरोती दिखी। यहां एक राजनीतिक पार्टी के जिला कार्यालय पर शादी का पंडाल लगा हुआ था।
पूरा कार्यालय एक गेस्ट हाउस व मैरिज हाल के स्वरूप में दिख रहा था। पीछे के हिस्से में खाना बन रहा था। बीच के हिस्से में स्टेज बना था और बाहरी हिस्से में खाने का इंतजाम था। पता करने पर जानकारी हुई कि पास के ही एक मुस्लिम परिवार मो. नईम के यहां शादी है। थोड़ी देर में लोगों की आमद बढ़ी। शहर के कुछ चर्चित चेहरे भी दिखाई दिए।
'हमारे बीच हिंदू-मुस्लिम जैसा कोई दायरा नहीं'
साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एसबी सिंह का पूरा परिवार शादी में शिरकत कर रहा था। सिर्फ शिरकत ही नहीं बल्कि परिवार पूरी तन्मयता से शादी कार्यक्रम को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में लगा था। खाना मेज तक पहुंचाना व आगंतुकों के स्वागत में कोई कसर परिवार नहीं छोड़ रहा था। आखिर में दो बजे के आसपास बाराबंकी जनपद से बारात आई।
बारात के पहुंचते ही एचबी सिंह के पुत्र राना रोहित ने दूल्हे का माला पहनाकर स्वागत किया। साथ ही खाने की मेजों पर भी लगातार लोगों को खाना परोसते दिखाई दिए। शादी समारोह के मुख्य कर्ताधर्ता मो. नईम बताते हैं कि राना रोहित सिंह के साथ उनके घरेलू संबंध हैं।
दोनों परिवारों में अमीरी-गरीबी की लंबी खाई होने के बाद भी हर सामाजिक, धार्मिक कार्यों में एसबी सिंह का परिवार उनके साथ खड़ा रहता है। राना रोहित सिंह बताते हैं कि मो नईम का परिवार हमारा ही परिवार है। हमारे बीच हिंदू मुस्लिम जैसा कोई दायरा नहीं है।