सुना है क्या: साहब की धुंआधार बैटिंग की चर्चा, बोझ उठाने को तैयार; चर्चा में आए सेहत सुधार वाले अफसर
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'साहब की धुंआधार बैटिंग की चर्चा' की कहानी। इसके अलावा 'बोझ उठाने को तैयार' और 'चर्चा में आए सेहत सुधार वाले अफसर' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
साहब की धुंआधार बैटिंग की चर्चा
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग एक साहब अक्सर चर्चा में रहते हैं। कभी अपने कामकाज को लेकर तो कभी अपने व्यवहार को लेकर। विभाग बदलने के बाद भी साहब के कार्य व्यवहार में बहुत बदलाव नहीं आया है। आलम यह है कि साहब कभी भी किसी का भी भरी महफिल हाल खराब कर सकते हैं।
हाल ही में उनके एक मातहत ने तेजी दिखाते हुए विभाग में व्यापक स्तर पर फेरबदल कर दिया। फिर क्या था साहब न सिर्फ फायर हुए बल्कि रातोंरात सारे फेरबदल पर भी पानी फेर दिया। इसके बाद साहब की धुंआधार बैटिंग फिर चर्चा में है।
बोझ उठाने को तैयार
अगले कुछ महीनों में कई बड़े विभाग खाली होने वाले हैं। उनकी जिम्मेदारी उठाने के लिए अभी से सक्रियता बढ़ गई है। जिसकी जहां तक पहुंच, वहां तक जुगत भिड़ाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसे लेकर एक तरफ ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में चर्चा है तो दूसरी तरफ नीचे वाले स्टाफ में शर्तें लग रही हैं।
सबसे ज्यादा चार नौकरशाहों पर लगा है कि किसे कौन सी कुर्सी मिलेगी। बहरहाल...हाशिये पर खड़े एक आला अफसर भी धीरे से बुदबुदाते सुने गए...बोझ तो हम भी उठाने को तैयार हैं कोई दे तो सही...
चर्चा में आए सेहत सुधार वाले अफसर
स्वास्थ्य महानिदेशालय के एक अफसर इन दिनों चर्चा में है। वे देर शाम कुछ खास लोगों के साथ फाइलें निपटाने में जुटते हैं। फाइलों के साथ हंसी- ठिठोली का दौर बाहर बैठे लोगों को चुभता है। वे नाक भौं सिकोड़े इधर- उधर घूमते रहते हैं। दो दिन पहले इस अफसर की वीडियो भी बनाने की कोशिश की गई। हालांकि सफलता नहीं मिली। ऐसे में चर्चा आम है कि सेवा के अंतिम समय में यह अफसर कहीं अपनी हरकतों की वजह से फंस न जाए।