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Lucknow News: पूर्णिमा के दिन ही सप्तर्षियों को भगवान शिव ने दिया था संदेश
Fri, 31 Jul 2026 09:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 31 Jul 2026 09:20 PM IST
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अयोध्या। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की अयोध्या इकाई ने राज मोहन मनूचा गर्ल्स डिग्री कॉलेज में गुरु पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। परिषद के संरक्षक लक्ष्मीकांत सिंह ने बताया कि गुरु-शिष्य परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रथम गुरु भगवान शिव ने आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन ही सप्तर्षियों को उपदेश दिया था। उन्होंने महर्षि व्यास के योगदान का भी उल्लेख किया।
परिषद के प्रांत उपाध्यक्ष प्रोफेसर सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इस के सूत्र तैत्तिरीय उपनिषद की वल्लरी में और स्कंद पुराण के गीता पर्व में निरूपित है। अयोध्या इकाई की अध्यक्ष मंजूषा मिश्रा ने गुरु की सार्थकता को पहचानने का समय बताया। उन्होंने कहा कि गुरु वही है जो शिष्य की छिपी हुई प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारता है।
महामंत्री डॉक्टर असीम त्रिपाठी ने कबीर के दोहों और संस्कृत श्लोकों से गुरु महिमा पर विचार रखे। इकाई की उपाध्यक्ष मीनू दुबे ने गुरु के दार्शनिक अर्थ पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गुरु के महत्व को जीवन के हर क्षेत्र में आवश्यक बताया। उत्सव में कई कवियों ने गुरु के चरणों में अपनी श्रद्धा कविताओं से निवेदित की।
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कार्यकारिणी सदस्य स्वदेश रश्मि ने अपनी रचना गुरु शब्द मेरे कानों में अमृत घोलता है प्रस्तुत की। ऊष्मा वर्मा सजल, वेद प्रकाश द्विवेदी प्रचंड और कामेश मणि पाठक ने भी गुरु महिमा पर अपनी रचनाएं सुनाईं। शाखा के कोषाध्यक्ष विश्व प्रकाश टेकचंदानी रूपन ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम में राम प्रकाश दुबे, दीपक मिश्र, रोहित श्रीवास्तव, डॉक्टर वीरेंद्र दुबे, दिलीप कुमार पांडेय व राम प्रकाश त्रिपाठी उपस्थित रहे।
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परिषद के प्रांत उपाध्यक्ष प्रोफेसर सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इस के सूत्र तैत्तिरीय उपनिषद की वल्लरी में और स्कंद पुराण के गीता पर्व में निरूपित है। अयोध्या इकाई की अध्यक्ष मंजूषा मिश्रा ने गुरु की सार्थकता को पहचानने का समय बताया। उन्होंने कहा कि गुरु वही है जो शिष्य की छिपी हुई प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारता है।
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महामंत्री डॉक्टर असीम त्रिपाठी ने कबीर के दोहों और संस्कृत श्लोकों से गुरु महिमा पर विचार रखे। इकाई की उपाध्यक्ष मीनू दुबे ने गुरु के दार्शनिक अर्थ पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गुरु के महत्व को जीवन के हर क्षेत्र में आवश्यक बताया। उत्सव में कई कवियों ने गुरु के चरणों में अपनी श्रद्धा कविताओं से निवेदित की।
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कार्यकारिणी सदस्य स्वदेश रश्मि ने अपनी रचना गुरु शब्द मेरे कानों में अमृत घोलता है प्रस्तुत की। ऊष्मा वर्मा सजल, वेद प्रकाश द्विवेदी प्रचंड और कामेश मणि पाठक ने भी गुरु महिमा पर अपनी रचनाएं सुनाईं। शाखा के कोषाध्यक्ष विश्व प्रकाश टेकचंदानी रूपन ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम में राम प्रकाश दुबे, दीपक मिश्र, रोहित श्रीवास्तव, डॉक्टर वीरेंद्र दुबे, दिलीप कुमार पांडेय व राम प्रकाश त्रिपाठी उपस्थित रहे।