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UP News: यूपी के अस्पतालों में जूनियरों को कमान, सीनियर दरकिनार; स्वास्थ्य विभाग में चल रहा पसंद-नापसंद का खेल

Mon, 27 Jul 2026 08:45 AM IST
Bhupendra Singh चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 27 Jul 2026 08:45 AM IST
सार

यूपी के सरकारी अस्पतालों में सीनियर्स को दरकिनार कर जूनियरों को कमान दी जा रही है। ऐसे में वरिष्ठता की अनदेखी से डॉक्टर्स में आक्रोश बढ़ रहा है। सीएमओ पर मनमानी के आरोप लग रहे हैं। यही नहीं दागी डॉक्टरों को भी प्रभारी बना दिया गया है। इस पर पीएमएस एसोसिएशन ने नाराजगी जताई है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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juniors are being handed reins while seniors are being sidelined In govt hospitals in UP
यूपी में जूनियर डॉक्टर बन रहे प्रभारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में विभिन्न जिलों में वरिष्ठों की अनदेखी करके कनिष्ठ डॉक्टरों को प्रभारी की जिम्मेदारी दे दी गई है। इसे लेकर वरिष्ठ डॉक्टरों में आक्रोश है। उनका कहना है कि चहेतों को उपकृत करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) मनमानी कर रहे हैं। कई जिलों में सीएमओ पर मनमानी का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ डॉक्टर अवकाश पर चले गए हैं। इससे चिकित्सकीय कार्य भी प्रभावित हो रहा है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) एसोसिएशन ने इस रवैये पर नाराजगी जताई है।

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केस 1

गाजीपुर में गौरा बाजार और मुहम्मदाबाद में ट्रॉमा सेंटर खुले हैं। इनमें सिर्फ मुहम्मदाबाद स्थित ट्रॉमा सेंटर का संचालन हो रहा है। यहां लेवल 4 के डॉ. नंद किशोर प्रसाद कार्यरत हैं। वह एनेस्थेटिस्ट हैं। यहां ट्रॉमा के प्रभारी की जिम्मेदारी लेवल एक के डॉ. रुद्रकांत सिंह को बना दिया गया है। ऐसे में 19 जून को वाराणसी मंडल के अपर निदेशक ने सीएमओ से इस मनमानी के संबंध में रिपोर्ट मांगी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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केस 2

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संडीला का प्रभारी लेवल एक के डॉ. मनोज सिंह को बनाया गया है। यहां पर उनके अधीन लेवल तीन के डॉ. सरोज और लेवल दो के डॉ. इरशाद कार्य कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब डॉ. मनोज सिंह के खिलाफ वर्ष 2024-25 में सीएचसी अहिरौरी में रहते वक्त करीब 17 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सीएमओ को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी लिख चुके हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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वरिष्ठता क्रम में ही मिले जिम्मेदारी : एसोसिएशन

प्रांतीय चिकित्सा सेवा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यशवीर सिंह और महासचिव डॉ. शरद वैश्य ने भी इस व्यवस्था का विरोध किया है। उनका कहना है कि शासनादेश में अलग-अलग लेवल तय किया गया है। स्पष्ट है कि वरिष्ठता क्रम में ही जिम्मेदारी सौंपी जाए। वरिष्ठ डॉक्टरों की अनदेखी से चिकित्सकीय कार्य भी प्रभावित होता है। संघ के स्तर पर स्वास्थ्य महानिदेशक को भी ज्ञापन दिया गया है।



अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने कहा कि कई स्थानों से शिकायतें मिली हैं। इसे दिखवाया जा रहा है। सीएमओ को निर्देशित किया जाएगा कि किसी भी कीमत पर वरिष्ठों की अनदेखी न करें ताकि अस्पताल की व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे। जहां पर दागियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे भी दिखवाया जाएगा। 

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