सेहत की बात: दवाएं बेअसर होने पर पार्किंसंस बीमारी पर प्रभावी है नई तकनीक, जागरुकता वाकथॉन में दी गई जानकारी
दवाएं बेअसर होने पर पार्किंसंस बीमारी पर नई तकनीक प्रभावी है। राजधानी में जागरुकता वाकथॉन में इसके बारे में जानकारी दी गई। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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पार्किंसंस की बीमारी में दवाएं बेअसर होने पर नई तकनीक से नियंत्रण किया जा सकता है। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) का इस्तेमाल करते हुए अब तक 10 मरीजों को राहत मिल चुकी है। लखनऊ में गोमती नगर के लोहिया पार्क में आयोजित पार्किंसंस जागरुकता वाकथॉन में पीजीआई में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रो. रुचिका टंडन ने ये जानकारी दी।
प्रो. रुचिका टंडन ने बताया कि न्यूरोलॉजिकल बीमारी पार्किंसंस दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है, जो शरीर की हरकतों को नियंत्रित करता है। इस बीमारी में दिमाग में डोपामिन नामक रसायन कम बनता है। इससे शरीर की गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
इस बीमारी की वजह से हाथ, पैर या शरीर में कंपन, चलने-फिरने में धीमापन, मांसपेशियों में जकड़न और संतुलन बनाने में कठिनाई शामिल है। अवसाद, चिंता, नींद की समस्या और कुछ मामलों में याददाश्त में कमी भी बीमारी के लक्षण हैं। डॉ. अमृता मोर और डॉ. प्रदीप गुप्ता ने बताया कि पार्किंसंस के मरीज शारीरिक ही नहीं, मानसिक तनाव का भी सामना करते हैं।
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस)
डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक सर्जिकल तकनीक है, जो उन पार्किंसंस मरीजों के लिए उपयोगी है, जिन पर दवाएं प्रभावी नहीं रह जातीं। इसमें दिमाग के विशेष हिस्सों में छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड बैटरी जैसे उपकरण से जुड़े होते हैं। यह उपकरण हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है, जिससे दिमाग की असामान्य गतिविधि नियंत्रित होती है और लक्षणों में राहत मिलती है।