{"_id":"69c2fcfc4c8d61684106bd1c","slug":"poor-road-engineering-causes-30-of-accidents-dr-baluja-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1660192-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"30% हादसों की वजह है खराब सड़क इंजीनियरिंग : डॉ. बलूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
30% हादसों की वजह है खराब सड़क इंजीनियरिंग : डॉ. बलूजा
विज्ञापन
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम
विज्ञापन
लखनऊ। सड़क हादसों के पीछे केवल चालक की गलती ही नहीं, बल्कि खराब रोड इंफ्रास्ट्रक्चर भी एक बड़ी वजह है। करीब 30 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं रोड इंफ्रा फेल्योर के कारण होती हैं। हादसों की सही वजह जानने के लिए उनकी वैज्ञानिक तरीके से जांच बेहद जरूरी है।
यह बात इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (आईआरटीई) के अध्यक्ष व कॉलेज ऑफ ट्रैफिक मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. रोहित बलूजा ने कहीं। मौका था मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम के शुभारंभ का।
उन्होंने कहा कि शहरों में ट्रैफिक इंजीनियरिंग की कमी साफ दिखती है। सिग्नल, साइन बोर्ड और लेन मैनेजमेंट का सही अनुपालन नहीं हो रहा है, वहीं कई जगह स्टॉप लाइन तक नहीं है। सड़क निर्माण एजेंसियों को ट्रैफिक इंजीनियरिंग का पर्याप्त ज्ञान न होने से जाम और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने इस दिशा में प्रशिक्षण की जरूरत पर बल दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से सुनिश्चित होगी। सरकार का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी लाना है। उन्होंने युवाओं और स्काउट-गाइड की भूमिका को अहम बताते हुए सभी से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।
परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि प्रदेश के 75 जिलों से आए स्काउट-गाइड प्रशिक्षकों को सड़क सुरक्षा, प्राथमिक सहायता और जागरूकता से जुड़े प्रशिक्षण दिए जाएंगे। इसके अलावा एनसीसी और एनएसएस के युवाओं को भी इस मुहिम से जोड़ने की योजना है। कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड के स्टेट चीफ कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार, विशेष सचिव पीडब्ल्यूडी अमित कुमार और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
Trending Videos
यह बात इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (आईआरटीई) के अध्यक्ष व कॉलेज ऑफ ट्रैफिक मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. रोहित बलूजा ने कहीं। मौका था मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम के शुभारंभ का।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि शहरों में ट्रैफिक इंजीनियरिंग की कमी साफ दिखती है। सिग्नल, साइन बोर्ड और लेन मैनेजमेंट का सही अनुपालन नहीं हो रहा है, वहीं कई जगह स्टॉप लाइन तक नहीं है। सड़क निर्माण एजेंसियों को ट्रैफिक इंजीनियरिंग का पर्याप्त ज्ञान न होने से जाम और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने इस दिशा में प्रशिक्षण की जरूरत पर बल दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से सुनिश्चित होगी। सरकार का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी लाना है। उन्होंने युवाओं और स्काउट-गाइड की भूमिका को अहम बताते हुए सभी से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।
परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि प्रदेश के 75 जिलों से आए स्काउट-गाइड प्रशिक्षकों को सड़क सुरक्षा, प्राथमिक सहायता और जागरूकता से जुड़े प्रशिक्षण दिए जाएंगे। इसके अलावा एनसीसी और एनएसएस के युवाओं को भी इस मुहिम से जोड़ने की योजना है। कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड के स्टेट चीफ कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार, विशेष सचिव पीडब्ल्यूडी अमित कुमार और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय सड़क सुरक्षा संवाद कार्यक्रम