राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 24 जून को हाईकोर्ट सुना सकता है अहम फैसला, कैग करेगा जांच?; सामने आए पुराने विवाद भी
Ram temple offerings stolen: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सोमवार को होने वाली सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में 24 जून को बड़ा फैसला हो सकता है।
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अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में समयाभाव की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर 24 जून को सुनवाई संभावित है। याचिका में मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है। यह याचिका न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्म अवकाश कालीन खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी।
समय की कमी के कारण अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर सकी और अब 24 जून को सुनवाई हो सकती है। अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा दाखिल याचिका में अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में आने वाले धन के कथित गबन की जांच सी बी आई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही कैग से पूरे मामले का ऑडिट कराए जाने की भी अनुरोध किया गया है।
राम मंदिर....दो साल में चार विवाद, उठते रहे सवाल
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद दो साल में राम मंदिर से चार बड़े विवाद सामने आए। मामलों में ट्रस्ट के पदाधिकारियों व प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते रहे, लेकिन किसी भी मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। इस बार हुए चढ़ावा चोरी मामले ने तूल पकड़ लिया है। क्योंकि इसमें सीधा जुड़ाव श्रद्धालुओं से है, इसलिए हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के कुछ महीने बाद रामलला का मुकुट चोरी हो गया था। ट्रस्ट की तरफ से मामला दबाया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद वह उजागर हो गया था। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के करीबी के पास से ही मुकुट बरामद हुआ था, जो कारसेवकपुरम में मिला था। यह विवाद खत्म हुआ ही था कि जमीन का विवाद सामने आ गया। जिसमें जमीनों की खरीद में तमाम सवाल उठाए गए थे। हालांकि इसमें कोई खास कार्रवाई नहीं हुई थी। आज भी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गूंजता रहता है।
वहीं, पिछले साल दर्शन पास घोटाला हुआ था। तमाम लोग फर्जी पास बनाकर लोगों को दर्शन करवाते थे। वे श्रद्धालुओं से रकम भी वसूलते थे। यहां तक कि इसमें पुलिसकर्मियों की भी भूमिका उजागर हुई थी। तब इस मामले में कार्रवाई की गई थी। इस व्यवस्था में सुधार करते हुए क्यूआर कोड वाले पास जारी किए जाने लगे। हालांकि अभी भी दर्शन करवाने में कुछ लोग खेल करते हैं, लेकिन उस तरह के फर्जीवाड़े पर रोक लगाई गई।
यह मामला थमा तो अब चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया। जिसमें बड़े पैमाने पर खेल हुआ। मामूली कर्मचारी ही नहीं, ट्रस्ट व प्रबंधन के लोग भी सवालों के घेरे में हैं। लगातार एक के बाद एक विवाद होने से ट्रस्ट की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि स्पष्ट है कि व्यवस्थाओं में जो पारदर्शिता होनी चाहिए, वह नहीं है। अगर पहले ही मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाती और निगरानी तंत्र बेहतर किया जाता, तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगता।