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यूपी का 'धनकुबेर': काली कमाई को रिटायर ARTO बताते रहे यहां से मिला गिफ्ट, बैंक ट्रांजेक्शन सामने देख उगला सच

Fri, 10 Jul 2026 08:27 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Sharukh Khan Updated Fri, 10 Jul 2026 08:27 AM IST
सार

यूपी के 'धनकुबेर' ने विजिलेंस छापे की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को खूब गुमराह किया। सेवानिवृत्त एआरटीओ काली कमाई को ससुराल से गिफ्ट मिलने का बहाना बनाते रहे। हालांकि बैंक ट्रांजेक्शन सामने देखकर सच उगल दिया। 35 करोड़ की काली कमाई के मामले में विजिलेंस की टीम जल्द पूछताछ कर सकती है। ईडी भी शिकंजा कसेगा।

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Retired ARTO lalit kumar kept claiming that his ill-gotten wealth of 35 crore gift from his in-laws in Lucknow
Retired ARTO lalit kumar - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सेवानिवृत्त एआरटीओ ललित कुमार बुधवार को विजिलेंस छापे की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को गुमराह करते रहे। उनके पास मिली संपत्तियों और सोना-चांदी के बारे में जब सख्ती से पूछताछ की गई तो इसे ससुराल से मिला गिफ्ट बताने लगे। जब अधिकारियों ने उनके बैंक खातों से संपत्तियां खरीदने के लिए हुए ट्रांजेक्शन सामने रखकर सवाल किए तो वह कोई जवाब नहीं दे सके।
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विजिलेंस ने ललित के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई का ब्योरा
बृहस्पतिवार को अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। अब उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा और उनका विस्तृत बयान भी दर्ज होगा। विजिलेंस उनकी और परिजनों की अन्य संपत्तियों का पता भी लगा रही है। हालांकि अब तक की जांच में उनके पास किसी बेनामी संपत्ति का पता नहीं चला है। 
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अधिकतर संपत्तियां उन्होंने अपने और परिजनों के नाम पर खरीदी थी, जो उनकी कुल आय से 35 गुना अधिक पाए गए हैं। विजिलेंस ने उनकी अन्य संपत्तियों का पता लगाने के लिए कई सब रजिस्ट्रार कार्यालयों को पत्र भी लिखा है।

इसमें उनके परिजनों के नाम पर हुई खरीद फरोख्त का ब्योरा भी देने का अनुरोध किया गया है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सेवाकाल के दौरान जिन जिलों में उनकी तैनाती थी, वहां कोई शिकायत तो नहीं की गई थी।
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संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक
विजिलेंस ने छापे में ललित की जिन 15 संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए हैं, उनकी मौजूदा बाजार कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक है। विजिलेंस की जांच में पता चला कि इन संपत्तियों को 13 करोड़ रुपये में खरीदा गया था।

अब राज्य सरकार इन संपत्तियों को जब्त करने की दिशा में कदम उठाएगी। वहीं, विजिलेंस की कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी ललित पर अपना शिकंजा कस सकता है। 

यह है पूरा मामला
आय से अधिक संपत्ति के मामले में रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ के अलीगंज स्थित आवास पर विजिलेंस छापे में काली कमाई का खुलासा हुआ है।

 

छापे में पैकेट में छिपाकर रखे 1.62 करोड़ रुपये नकद, करीब 20 करोड़ के सोने चांदी के 22 किलो बिस्किट व आभूषण, 13 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों के दस्तावेज और करोड़ों के अन्य निवेश के साक्ष्य मिले। शुरुआती आकलन में बरामद संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 35 करोड़ रुपये है।

 

मूलरूप से रायबरेली के नूर मार्केट के रहने वाले आगरा के तत्कालीन एआरटीओ ललित वर्तमान में लखनऊ में रहते हैं। आईजी विजिलेंस मंजिल सैनी ने बताया कि ललित के खिलाफ परिवहन आयुक्त द्वारा वर्ष 2020 में की गई शिकायत के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) के कानपुर सेक्टर ने जांच की थी। 

 

जांच में ललित की आय सभी वैध स्रोतों से करीब 93 लाख रुपये की मिली थी जबकि संपत्तियों को खरीदने एवं भरण पोषण में 1.62 करोड़ रुपये खर्च करने की पुष्टि हुई थी। एसीओ ने 11 जून 2024 को कानपुर सेक्टर के थाने में ललित पर एफआईआर दर्ज की थी जिसकी विवेचना शासन ने विजिलेंस को सौंपी थी।

विजिलेंस ने अदालत से सर्च वारंट लेकर मंगलवार को उनके अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी के आवास पर पुलिस बल की मौजूदगी में छानबीन की। छापे की कार्रवाई बुधवार सुबह पूरी हुई। डीजीपी राजीव कृष्ण ने टीम में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों को एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। 

दो तिजोरियों में मिले जेवरात
छापे में ललित के घर पर कई लॉकर व ज्वैलर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो तिजोरियां मिली हैं जिसमें नकदी, सोने-चांदी के बिस्किट और जेवरात बरामद हुए। इसके अलावा टोयोटा इनोवा, हुंडई आई-20 कार, रिवॉल्वर, विभिन्न बैंकों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड, फिक्स डिपॉजिट आदि में करीब एक करोड़ से भी अधिक के निवेश के सुबूत मिले।

तीन साल पहले भी हुई थी जांच, दब गया था मामला
एआरटीओ रहे ललित कुमार के यहा विजिलेंस की कार्रवाई का मामला, विभाग में हड़कंप
आगरा में तैनात रहे पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस की टीम ने तीन साल पहले भी छापा मारा था। सूत्र बताते हैं कि मामले को दबा दिया गया था। वहीं बुधवार को विजिलेंस की कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। भ्रष्ट अफसर सकते में आ गए हैं।

 

इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हलचल तेज हो गई है। विभाग के भीतर यह चर्चा है कि इस कार्रवाई का असर उन अधिकारियों पर भी पड़ सकता है, जिनके खिलाफ लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही हैं। 

 

सूत्रों का दावा है कि कई अधिकारी अपनी कथित बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन को लेकर सतर्क हो गए हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी व्यापक जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार, ललित कुमार के कार्यकाल को लेकर पहले भी कई तरह की शिकायतें सामने आती रही थीं। 

 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि वाहन फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य परिवहन संबंधी सेवाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां अर्जित किए जाने को लेकर जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
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