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UP Politics: 'ओवैसी से दूरी, सॉफ्ट हिंदुत्व व पीडीए पर दांव', 2027 में यूपी फतह करने को सपा की नई रणनीति

Tue, 28 Jul 2026 11:17 AM IST
Bhupendra Singh अजीत खरे, अमर उजाला, लखनऊ/नई दिल्ली
अजीत खरे, अमर उजाला, लखनऊ/नई दिल्ली Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 28 Jul 2026 11:17 AM IST
सार

यूपी की चुनावी जंग में समाजवादी पार्टी ओवैसी से दूरी बनाए रखने के संकेत दे रही है। वहीं सॉफ्ट हिंदुत्व व पीडीए पर दांव चल सकती है। मुस्लिम तुष्टीकरण की छवि से बचने की रणनीति और कांग्रेस के साथ तालमेल पर जोर दिख रहा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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SP new strategy to conquer UP in 2027 Keeping distance from Owaisi and betting on Soft Hindutva and PDA
2027 में यूपी फतह करने को सपा की नई रणनीति। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही समाजवादी पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद पार्टी अब उसी सामाजिक समीकरण को 2027 में भी दोहराना चाहती है। इसी रणनीति के तहत सपा कांग्रेस के साथ तालमेल बनाए रखने की पक्षधर है, लेकिन सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से दूरी बनाए रखने के संकेत दे रही है।

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एआईएमआईएम लंबे समय से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनने की इच्छा जता रही है। हाल के दिनों में उसने एक बार फिर सपा के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार सपा नेतृत्व फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर उत्साहित नहीं है। पार्टी का मानना है कि एआईएमआईएम के साथ खुला राजनीतिक गठजोड़ उसके व्यापक सामाजिक विस्तार की रणनीति को नुकसान पहुंचा सकता है।

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सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति छोड़ना नहीं चाहती सपा

सूत्रों का कहना है कि सपा अब खुद को केवल मुस्लिम समर्थक दल की पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं रखना चाहती। 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने टिकट वितरण और चुनावी भाषणों में इस रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया। पार्टी ने 80 सीटों में केवल चार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे और सभी विजयी रहे। पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की बात करते हुए भी पार्टी ने अल्पसंख्यक राजनीति का आक्रामक प्रदर्शन करने से परहेज किया। 

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इसीलिए, एआईएमएम के साथ खुली नजदीकी भाजपा को एक बार फिर सपा पर 'मुस्लिम तुष्टीकरण' का आरोप लगाने का अवसर दे सकती है। यही वजह है कि पार्टी फिलहाल ओवैसी से दूरी में ही राजनीतिक भलाई देख रही है।

मुस्लिम यादव समीकरण रहेगा लेकिन बिना शोर के

सपा की पारंपरिक राजनीति मुस्लिम यादव (एमवाई) समीकरण पर आधारित रही है, लेकिन 2024 में इसे व्यापक पीडीए गठजोड़ में बदलने का प्रयास किया। मुस्लिम मतदाताओं को साथ रखने की कोशिश जारी रही, मगर उसका सार्वजनिक प्रदर्शन सीमित रखा गया। साथ ही गैर-यादव पिछड़े वर्गों को साधने पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी मानती है कि यही संतुलन उसे व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता दिला सकता है।

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