सद्भाव की अयोध्या : गुजराती मंदिर में राम के साथ होती है मक्का-मदीना की आरती
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दे मस्त फकीरी वह जिससे, शाहों की पर्वाह न हो।
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मैं भी न किसी का शाह बनूं, मेरा भी कोई शाह न हो।
रामनगरी में यह संदेश देने वाले स्वामी नारायण मंदिर के सत्यकुलाचार्य साधु स्व. लालजी भाई सत्यस्नेही अब नहीं रहे, मगर उनका बनवाया सर्वधर्म समभाव मंदिर आपसी प्रेम व एकता की अनोखी अलख जगा रहा है। इस गुजराती मंदिर में सत्य-अहिंसा की बड़ी मूर्तियों के साथ राम-कृष्ण, यीशु, बुद्ध, महावीर, जरथुस्त्र की प्रतिमा स्थापित है। विग्रह के साथ एक किनारे मक्का तो दूसरे किनारे मदीना की फोटो भी लगी है। रोज सुबह-शाम आरती होती है। यहां एक साथ सभी धर्मों के रंग देख आने वाले भक्त-पर्यटक भाव विह्वल नजर आते हैं।
हनुमानगढ़ी से चंद कदम दूर दंतधावनकुंड के पास गुजराती भवन में स्थित सर्वधर्म समभाव मंदिर में जो भी आता है, भगवान के हर रूप का दर्शन कर धन्य महसूस करता है। मंदिर के बाहर दीवार पर मस्तफकीरी की प्रार्थना और सबसे बड़ी भिक्षाएं का संदेश पत्थर पर खुदा है। अयोध्या विवाद के फैसले के मद्देनजर पुलिस की बढ़ती गश्त व लोगों की चिंताओं के बीच गुजरातियों का सर्वधर्म समभाव मंदिर अलग ही छटा बिखेर रहा है।
श्री स्वामीनारायण मंदिर रायगंज के महंत स्वामी देवप्रसाद दास कहते हैं कि गुजराती भवन में सर्वधर्म समभाव मंदिर की नींव साधु लालजी भाई सत्यस्नेही ने डाली थी, उनका 20 जनवरी 2010 को 85 साल की उम्र में निधन हो गया है। अब इसकी देखरेख के लिए प्रबंधक राकेश शर्मा करते हैं। वे सुबह-शाम स्थानीय लोगों के साथ सभी धर्म के भगवान, प्रतीकों व अनुयायियों की एक साथ आरती-वंदन करते हैं। गुजरात आने वाले भक्त जरूर दर्शन करते हैं।'आपसी सद्भाव रहे, प्राणी मात्र की हिंसा न हो, कुरीतियां बंद हो, यही था संदेश'
वे कहते हैं कि आपसी सद्भाव रहे, प्राणी मात्र की हिंसा न हो, कुरीतियां बंद हो, यही स्वामीजी का प्रमुख संदेश था। अयोध्या में हमेशा सर्वधर्म का सम्मान हुआ है, सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने पर भी ऐसा ही माहौल रहेगा। अहमदाबाद से दोस्तों के साथ गुजराती मंदिर आए युवा भार्गव पटेल कहते हैं कि बाहर लोग बहुत डर फैला रहे हैं, मगर यहां सब शांत और भीड़भाड़ है। वे यहां दर्शन के बाद शाम को छपिया में रात्रि विश्राम करेंगे।सर्वधर्म समभाव ही हिंदुस्तान की पहचान: हाजी
फैसला चाहे जो आए सद्भाव नहीं बिगड़ेगा: इकबाल
अयोध्या विवाद के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि अयोध्या में सभी धर्मों के पैगबंर-अनुयायी पैदा हुए और धुनी भी रमाई। राम से लेकर बुद्ध व शीष पैगंबर तक सभी ने आपसी एकता व सद्भाव का संदेश दिया है। यह सिलसिला तबसे चलता आ रहा है, अयोध्या फिर इसमें पास होगी।