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सुना है क्या: 'अभी फिल्म बाकी है' की कहानी, साथ ही 'बादशाहत कायम रहे और कार्यकाल विस्तार की उम्मीद' के किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 01 Feb 2026 09:57 AM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

suna hai kya full film is still left story plus tales of May reign continue and hope for an extension
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'अभी पूरी फिल्म बाकी है...' की कहानी। इसके अलावा '...ताकि कायम रहे बादशाहत' और 'साहब को कार्यकाल विस्तार की उम्मीद' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

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अभी तो पूरी फिल्म बाकी है

योजना में खेल को लेकर खुलेआम माननीय को घेरने की वजह से सुर्खियों में आए माननीय भले ही क्षेत्र की सेवा को अपना एजेंडा बता रहे हैं लेकिन इसके पीछे उनके हिडेन एजेंडा की भी खूब चर्चा हो रही है। इसमें कहा जा रहा है कि माननीय ने कई कामों की सिफारिश की थी लेकिन सब पेडिंग हैं। लिहाजा माननीय भी अपना गुस्सा निकालने का अवसर तलाश रहे थे। चर्चा है कि माननीय के एजेंडे में अभी कई और मुद्दों की फिल्म है जिसे वह किसी न किसी मंत्री के सामने रिलीज करने की तैयारी में जुटे हैं।

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...ताकि कायम रहे बादशाहत

चिकित्सा शिक्षा विभाग के सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों में बादशाहत कायम रखने के लिए होड़ लगी है। यह होड़ उनके मूल काम चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार या शोध की नहीं है बल्कि संस्थान के मुखिया और मुखिया के मजबूत पिलर माने जाने वाले लोगों तक पहुंचने की है। पिछले दिनों एक संस्थान में उनके ही मातहतों ने धुआं उड़ा दिया। वह भी दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर। मुखिया के चेहरे प्रोफेसर ने मोर्चा संभाला लेकिन फेल हो गए। अब वे मुखिया के आकाओं के दरबार में अपनी बादशाहत बनाए रखने के लिए पसीना बहा रहे हैं। अब देखना यह है कि वे सफल हो पाते हैं या नहीं?

साहब को कार्यकाल विस्तार की उम्मीद

प्रदेश में उच्चस्तर की पढ़ाई वाले संस्थानों में निमयानुसार मुखिया का कार्यकाल समाप्त होने के तीन महीने पहले नए मुखिया की चयन प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। लेकिन, प्रदेश के काफी पुराने व प्रमुख तकनीकी संस्थान के मुखिया इस पर कुंडली मारकर बैठे हैं। उनका कार्यकाल पूरा होने में बहुत कम समय बाकी है लेकिन वह इसका विज्ञापन जारी नहीं कर रहे हैं। परिसर में चर्चा है कि साहब, कार्यकाल विस्तार की उम्मीद में हैं। इसके लिए वे बड़े साहब से लेकर कई जगह चक्कर काट रहे हैं। साथ ही कई नए संस्थानों में भी हाथ-पैर मार रहे हैं।

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