सुना है क्या: फिर डोला माननीय का मन, साथ ही '13 नंबर कमरे का खौफ व रिटायरमेंट के बाद बना रहे दबदबा' के किस्से
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'फिर डोला माननीय का मन' की कहानी। इसके अलावा '13 नंबर कमरे का खौफ' और 'रिटायरमेंट के बाद भी बना रहे दबदबा' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
फिर डोला माननीय का मन
इन दिनों सूबे में सियासी दलों में पाला पदलने की बयार क्या चली, कई माननीयों का मन भी डगमागने लगा है। ऐसे ही एक माननीय हैं जो मौसम की तरह पार्टी बदलने में माहिर हैं। लंबे तक सियासी बनवास झेलने के बाद 2022 में उन्हें एक सियासी ठिकाना मिला तो संयोग से सासंद चुन लिए गए, लेकिन बदलते माहौल में माननीय एक बार फिर पाला बदलने की तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन भगवा दल उनके चाल-चरित्र से वाकिफ है, इसलिए भाव नहीं मिल रहा है। अब माननीय ऐसी कड़ी की तलाश कर रहे रहे हैं जो उनकी मंशा को पूरा कराने में कारगर हो। माननीय अपने कुछ खास लोगों को भगवा दल से समीकरण साधने ठेका दे रखा है।
13 नंबर कमरे का खौफ
एक पूर्व प्रधानमंत्री के लिए 13 नंबर किसी अपशगुन से कम नहीं था। अब यह नंबर एक केंद्रीय जांच एजेंसी के अफसरों के लिए खौफ का सबब बन चुका है। दरअसल, एजेंसी के एक अहम पद पर तैनात होने वाले अधिकारी को 13 नंबर का कमरा दिया जाता है। इसके बाद उसके पांव टिकते ही नहीं हैं और किसी न किसी अप्रत्याशित वजह से हटा दिया जाता है। जिसका कार्यकाल कम से कम 5 साल होना चाहिए, वह छह महीने में ही विदा हो जाता है। वैसे कमरे के नंबर के साथ विभाग में अंदरखाने चुगलियों को भी इसकी वजह माना जा रहा है। हालांकि इस बार चुगली करने वाले अधिकारी को ही 1500 किमी दूर नमस्ते कर दिया गया है।
रिटायरमेंट के बाद भी बना रहे दबदबा
यूपी में घूमने-फिरने और कला से जुड़े विभाग में एक सेवानिवृत्त अधिकारी अंगद की तरह पांच जमाए हुए है। उन पर कुछ खास लोगों का वरदहस्त बताया जा रहा है। पिछले दिनों उन्हें कुछ समय के लिए हटाया गया लेकिन वो फिर से जोर-जुगाड़ लगाकर फिर से विभाग में आ गए। चर्चा है कि उनमें ऐसा क्या खास है कि विभाग उन्हें इतने समय बाद भी खींच रहा है। जो वर्तमान में तैनात अधिकारी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं वे हैं कि विभाग में अपना दबदबा बनाए रखने में जुटे रहते हैं।