सुना है क्या: 'गड्ढे में डूबा रिस्पांस टाइम' की कहानी, साथ ही 'कमिश्नर का फ्लैट व भयभीत माननीय' के किस्से
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'गड्ढे में डूबा रिस्पांस टाइम' की कहानी। इसके अलावा 'कमिश्नर बहादुर का फ्लैट' और '... कुर्सी के डर से तो भयभीत नहीं हैं माननीय' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
गड्ढे में डूबा रिस्पांस टाइम
उद्योग नगरी में इंजीनियर की मौत ने कागजों पर बेहतर रिस्पांस टाइम की पोल खोल दी। जिस गड्ढे में इंजीनियर को डूबने से बचाना था, उसमें उसके साथ रिस्पांस टाइम के दावे भी दफन हो गए। हैरानी की बात है कि इस पर कोई एक्शन तो दूर, जिम्मेदार बोलना भी नहीं चाहते हैं। वर्षों से जमे अफसरों की मानों तो कोई जिम्मेदारी तक नहीं थी। उन्होंने मौके पर जाना भी गवारा नहीं समझा। इनमें कुछ इतने ताकतवर हैं कि उनके खिलाफ जनप्रतिनिधि भी अपनी जुबान सिले हुए हैं। फिलहाल अफसरों के हिस्से की खरी-खोटी खुद सुन रहे हैं।
कमिश्नर बहादुर का फ्लैट
कमिश्नर बहादुर ने नोएडा में अपनी पत्नी के नाम आलीशान फ्लैट खरीदा है। फ्लैट की कीमत करोड़ों में है। नंबर-1 में ही 50 लाख रुपये की स्टाम्प ड्यूटी दी गई है। कुल मूल्य का बड़ा हिस्सा नकद दिया गया है। मामला उनके ही किसी बड़बोले खास ने लीक कर दिया है। पता चला है कि एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि ऐसे और कितने फ्लैट व प्लॉट का कमिश्नर बहादुर ने इंतजाम कर लिया है। वैसे उनकी पत्नी की आय का इतना बड़ा स्रोत किसी ब्लैक होल के रहस्य से कम नहीं।
... कुर्सी के डर से तो भयभीत नहीं हैं माननीय
संगठन से सरकार में भी भूमिका निभाने वाले दो माननीयों के बीच फोटो फ्रेम में आने को लेकर हुई धक्का-मुक्की इन दिनों चर्चा में हैं। दरअसल बीते दिनों दिल्ली में भगवा दल के संगठात्मक कार्यक्रम के मौके पर हो रही समूह फोटोग्राफी के दौरान राष्ट्रीय स्तर के एक पूर्व माननीय आगे खड़े हो गए, तो प्रदेश स्तरीय माननीय को यह नागवार गुजरा। क्योंकि अक्सर मुखिया से साथ फोटो में रहने वाले माननीय को दूसरे का फ्रेम में रहना बर्दाश्त नहीं था। लिहाजा उन्होंने फौरन अपने वरिष्ठ नेता को दूसरी ओर धकेल दिया और उनके स्थान पर खुद खड़े हो गए। ताकि मुखिया के साथ फ्रेम में बने रहें। उनका यह वीडियो खूब वायरल हुआ। चर्चा है कि इन दिनों माननीय को कुर्सी जाने का भय सता रहा है, इसलिए वह मुखिया के साथ दिखने का एक भी मौका गंवाना नहीं चाहते।
