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लखनऊ ने कराया था भारतीय क्रिकेट टीम में मेरा कमबैक : नवजोत सिंह सिद्धू
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क्रिकेट के किस्सों से लेकर राजनीति के उतार-चढ़ाव और जिंदगी के फलसफे तक खुलकर बोले सिद्धू, दर्शकों को खूब हंसाया
पूर्व भारतीय क्रिकेटर, कमेंटेटर और राजनीतिज्ञ नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को अमर उजाला संवाद में क्रिकेट के किस्सों से लेकर राजनीति के उतार-चढ़ाव और जिंदगी के फलसफे तक खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने लखनऊ का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मेरे मुश्किल दौर में लखनऊ ने ही तीन साल बाद मेरा भारतीय क्रिकेट टीम में कमबैक कराया था।
सिद्धू ने कहा, प्रणाम करता हूं मैं इस भूमि को क्योंकि ये मेरे अस्तित्व में है। मेरा जो कमबैक हुआ 1987 में उसकी बुनियाद लखनऊ के शीश महल टूर्नामेंट ने रखी थी। उस टूर्नामेंट में सात मैचों में सात सौ रन बने थे जिससे टीम में उनकी जगह बनी। उन्होंने कहा, भयग्रस्त होना सबसे बड़ी कमजोरी है। जब किसी चीज से भय लगे तो वो चीज सबसे पहले करो। भय पर विजय पाओ। लीडर वो है, जो पीछे चलने वालों में विश्वास जगा दे। दुनिया में सबसे बड़ा रोग- मेरे बारे में क्या कहेंगे लोग। जिंदगी में जब आलोचना आए, तो कहना तुमसे बेहतर कोई नहीं है।
सारी पार्टियां एक ही गलती करती हैं...
सिद्धू ने कहा, जरूरी नहीं है कि जो आपको बढ़िया लगे, वही आपकी राह हो। बढ़िया तो मुझे पालिटिक्स लगी। लेकिन सारी पार्टियां एक ही भूल करती रहीं, धूल उनके चेहरे पर थी और साफ तमाम आईने करती रहीं। राजनीति इसलिए अच्छी लगी कि वह लोगों को ताकत देती है। मेरे लिए वह मिशन था। अब मैं राजनीति से दूर जा चुका हूं।
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सचिन का साहस और कपिल की अंग्रेज़ी
पाकिस्तान के दौरे पर भारतीय टीम के साथ गए 15 साल के सचिन तेंदुलकर को जब नाक पर गेंद लगी और जर्सी खून से भीग गई तो मुझे लगा कि ये तो गया लेकिन सचिन ने कहा, मैं खेलेगा। उसके बाद तो जो भी हुआ वह इतिहास में दर्ज है। इसी तरह से 1983 का एक वाकया सुनाया जब कपिल देव का इंटरव्यू लेने विदेशी पत्रकार आए। कपिल को अंग्रेजी ज्यादा अच्छी आती नहीं थी। मैने उनसे कहा कि जैकी श्राफ की नई फिल्म लगी है हीरो। वह देखकर आते हैं। कपिल देव से पत्रकारों ने पूछा कि हम दूसरा कपिल क्यों नहीं पैदा कर पा रहे हैं? कपिल ने कहा कि मेरी मां 62 साल की हैं, पिता नहीं है। इसलिए दूसरा कपिल नहीं पैदा कर पाए।
शाहरुख खान की एक लाइन ने बदल दी जिंदगी
सिद्धू ने कहा, शाहरुख से 1987 में मिला था मैं। उन दिनों में वो सर्कस और फौजी में काम कर रहे थे। मैंने उससे पूछा कि इसके बाद क्या करेगा, उसने कहा- बॉलीवुड। मैंने उससे कहा- बॉलीवुड में कोई तेरा है नहीं, वहां लोग तुझे खा जाएंगे।शाहरुख ने कहा, मेरा किसी से कॉम्पिटीशन नहीं है। मेरा कॉम्पिटीशन खुद से है। उस लाइन ने मेरी जिंदगी बदल दी।
संगठन की शक्ति पर दिया जोर
सिद्धू ने अमर उजाला के मंच से संगठन की शक्ति पर बात की। उन्होंने कहा, संगठित हुई शक्ति जीत का कारण बनती है, विभाजित शक्ति पतन का कारण बनती है। चींटियां भी एक साथ मिलकर हाथी की खाल खींच सकती हैं।
शायरी से जीता दिल
सिद्धू ने अमर उजाला के मंच पर अपने खास अंदाज में शायरी सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा, 'वो दरिया ही नहीं, जिसमें नहीं रवानी, जब जोश ही नहीं किस काम की तेरी जवानी।' उन्होंने आगे कहा, जरूरी नहीं है कि जो आपको बढ़िया लगे, वही आपकी राह हो।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर, कमेंटेटर और राजनीतिज्ञ नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को अमर उजाला संवाद में क्रिकेट के किस्सों से लेकर राजनीति के उतार-चढ़ाव और जिंदगी के फलसफे तक खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने लखनऊ का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मेरे मुश्किल दौर में लखनऊ ने ही तीन साल बाद मेरा भारतीय क्रिकेट टीम में कमबैक कराया था।
सिद्धू ने कहा, प्रणाम करता हूं मैं इस भूमि को क्योंकि ये मेरे अस्तित्व में है। मेरा जो कमबैक हुआ 1987 में उसकी बुनियाद लखनऊ के शीश महल टूर्नामेंट ने रखी थी। उस टूर्नामेंट में सात मैचों में सात सौ रन बने थे जिससे टीम में उनकी जगह बनी। उन्होंने कहा, भयग्रस्त होना सबसे बड़ी कमजोरी है। जब किसी चीज से भय लगे तो वो चीज सबसे पहले करो। भय पर विजय पाओ। लीडर वो है, जो पीछे चलने वालों में विश्वास जगा दे। दुनिया में सबसे बड़ा रोग- मेरे बारे में क्या कहेंगे लोग। जिंदगी में जब आलोचना आए, तो कहना तुमसे बेहतर कोई नहीं है।
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सारी पार्टियां एक ही गलती करती हैं...
सिद्धू ने कहा, जरूरी नहीं है कि जो आपको बढ़िया लगे, वही आपकी राह हो। बढ़िया तो मुझे पालिटिक्स लगी। लेकिन सारी पार्टियां एक ही भूल करती रहीं, धूल उनके चेहरे पर थी और साफ तमाम आईने करती रहीं। राजनीति इसलिए अच्छी लगी कि वह लोगों को ताकत देती है। मेरे लिए वह मिशन था। अब मैं राजनीति से दूर जा चुका हूं।
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शाहरुख खान की एक लाइन ने बदल दी जिंदगी
सिद्धू ने कहा, शाहरुख से 1987 में मिला था मैं। उन दिनों में वो सर्कस और फौजी में काम कर रहे थे। मैंने उससे पूछा कि इसके बाद क्या करेगा, उसने कहा- बॉलीवुड। मैंने उससे कहा- बॉलीवुड में कोई तेरा है नहीं, वहां लोग तुझे खा जाएंगे।शाहरुख ने कहा, मेरा किसी से कॉम्पिटीशन नहीं है। मेरा कॉम्पिटीशन खुद से है। उस लाइन ने मेरी जिंदगी बदल दी।
संगठन की शक्ति पर दिया जोर
सिद्धू ने अमर उजाला के मंच से संगठन की शक्ति पर बात की। उन्होंने कहा, संगठित हुई शक्ति जीत का कारण बनती है, विभाजित शक्ति पतन का कारण बनती है। चींटियां भी एक साथ मिलकर हाथी की खाल खींच सकती हैं।
शायरी से जीता दिल
सिद्धू ने अमर उजाला के मंच पर अपने खास अंदाज में शायरी सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा, 'वो दरिया ही नहीं, जिसमें नहीं रवानी, जब जोश ही नहीं किस काम की तेरी जवानी।' उन्होंने आगे कहा, जरूरी नहीं है कि जो आपको बढ़िया लगे, वही आपकी राह हो।