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Lucknow News: लोकबंधु अस्पताल की इमरजेंसी में टार्च की रोशनी में हुआ इलाज
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टाॅर्च की रोशनी में मरीज को लगाया गया विगो।
- फोटो : स्रोत : वीडियोग्रैब्
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लखनऊ। लोकबंधु अस्पताल में शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक बिजली गुल हो गई। इस दौरान जनरेटर भी नही चल पाया। ऐसे में मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इमरजेंसी में इलाज किया गया। करीब आधे घंटे बाद बिजली आई। इस दौरान मरीज व तीमारदार अंधेरे में पसीने से तरबतर हो गए हैं। करीब दो बजे बिजली आने के बाद मरीज-तीमारदार व डॉक्टर-कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।
अस्पताल में बिजली जाते ही इमरजेंसी, रेडियोलॉजी विभाग, ओपीडी और वार्ड में अंधेरा छा गया। इस दौरान न तो जनरेटर चला और न ही इनवर्टर बैकअप काम आया। सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी की रही। जहां करीब आधे घंटे तक डॉक्टरों ने मोबाइल के टॉर्च के सहारे मरीजों का इलाज किया। इस दौरान किसी मरीज को ऑक्सीजन लगाई जा रही थी, किसी को ग्लूकोज चढ़ाने के लिए वीगो लगाया जा रहा था। गंभीर घायलों के टांके भी मोबाइल की रोशनी में लगाए गए।
रेडियोलॉजी विभाग पर भी बिजली गुल होने का बड़ा असर पड़ा। एक्सरे, सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांच प्रभावित हो गई। वार्डों में एसी बंद हो गए, जिससे उमस और गर्मी के बीच मरीजों की परेशानी बढ़ गई। कई मरीज बेड पर गर्मी व उमस से बेहाल हो गए। तीमारदार उन्हें हाथ से हवा करते नजर आए।
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एक दिन पहले सात घंटे गुल रही बिजली
लोकबंधु अस्पताल में बृहस्पतिवार शाम भी करीब साढ़े सात बजे अस्पताल के विद्युत पैनल में खराबी आने से करीब सात घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। इससे पैथोलॉजी, वार्ड और अन्य विभाग प्रभावित हुए थे। भर्ती मरीजों की खून की जांच में देरी हुई और कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हुईं। इस दौरान अस्पताल की बैकअप व्यवस्था भी पूरी तरह फेल रही। डीजल की कमी और तकनीकी खराबी से जनरेटर का संचालन प्रभावित रहा, इनवर्टर ने भी धोखा दे दिया। दूसरे दिन शुक्रवार को भी बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने से अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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टाॅर्च की रोशनी में इमरजेंसी में मरीजों का इलाज होने का आरोप गलत है। कुछ देर के लिए बिजली गुल हुई थी। जनरेटर बैकअप मिलने के बाद बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई थी।
- डॉ. राजेश,
कार्यवाहक निदेशक, लोकबंधु अस्पताल
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अस्पताल में बिजली जाते ही इमरजेंसी, रेडियोलॉजी विभाग, ओपीडी और वार्ड में अंधेरा छा गया। इस दौरान न तो जनरेटर चला और न ही इनवर्टर बैकअप काम आया। सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी की रही। जहां करीब आधे घंटे तक डॉक्टरों ने मोबाइल के टॉर्च के सहारे मरीजों का इलाज किया। इस दौरान किसी मरीज को ऑक्सीजन लगाई जा रही थी, किसी को ग्लूकोज चढ़ाने के लिए वीगो लगाया जा रहा था। गंभीर घायलों के टांके भी मोबाइल की रोशनी में लगाए गए।
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रेडियोलॉजी विभाग पर भी बिजली गुल होने का बड़ा असर पड़ा। एक्सरे, सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांच प्रभावित हो गई। वार्डों में एसी बंद हो गए, जिससे उमस और गर्मी के बीच मरीजों की परेशानी बढ़ गई। कई मरीज बेड पर गर्मी व उमस से बेहाल हो गए। तीमारदार उन्हें हाथ से हवा करते नजर आए।
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एक दिन पहले सात घंटे गुल रही बिजली
लोकबंधु अस्पताल में बृहस्पतिवार शाम भी करीब साढ़े सात बजे अस्पताल के विद्युत पैनल में खराबी आने से करीब सात घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। इससे पैथोलॉजी, वार्ड और अन्य विभाग प्रभावित हुए थे। भर्ती मरीजों की खून की जांच में देरी हुई और कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हुईं। इस दौरान अस्पताल की बैकअप व्यवस्था भी पूरी तरह फेल रही। डीजल की कमी और तकनीकी खराबी से जनरेटर का संचालन प्रभावित रहा, इनवर्टर ने भी धोखा दे दिया। दूसरे दिन शुक्रवार को भी बिजली व्यवस्था ध्वस्त होने से अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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टाॅर्च की रोशनी में इमरजेंसी में मरीजों का इलाज होने का आरोप गलत है। कुछ देर के लिए बिजली गुल हुई थी। जनरेटर बैकअप मिलने के बाद बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई थी।
- डॉ. राजेश,
कार्यवाहक निदेशक, लोकबंधु अस्पताल