यूपी: सीएम योगी बोले- पहले डर से कोई निवेश नहीं करता था, सपा सरकार में नीचे से तीसरे नंबर पर था प्रदेश
यूपी विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने सत्ता और विपक्ष के बीच हुई सार्थक चर्चा के लिए सभी सदस्यों का आभार जताया। साथ ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय पर चुटकी लेते हुए कहा कि शिवपाल यादव का श्राप उन्हें न लगे और वे स्वस्थ रहें।
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सीएम योगी ने कहा, स्थानीय स्तर पर भी रोजगार का सृजन होना चाहिए, जिस राज्य के पास एमएसएमई का नेटवर्क होगा, वह राज्य औद्योगिक निवेश को करने में सफल हो सकता है। 2017 से पहले संभावनाएं थी, लेकिन आप लोगों की सरकार के भय के नाते कोई निवेश करने को तैयार नहीं था।
2018 में हमने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की शुरुआत की। आज हमारे यहां 96 लाख एमएसएमई यूनिट है। जिसका भी रजिस्ट्रेशन हुआ है, उन्हें राज्य सरकार 5 लाख रुपए का बीमा दे रही है। लोगों का विश्वास बढ़ा है।
अब तक प्रदेश में 1.10 लाख युवाओं को सीएम ऋण योजना से ब्याज मुक्त और गारंटी मुक्त लोन दिया। मैं तो मंत्री जी से कहूंगा कि उन लोगों की ट्रेनिंग दी जाए। हम तो बस इतना चाहते हैं कि वह ट्रेनिंग हासिल करके अच्छा करें और फिर मूल धन वापस कर दें।
पहली बार उत्तर प्रदेश ने अपना आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री ने हमसे कहा कि करना चाहिए कि नहीं, हमने कहा कि अगर हमने काम किया है तो प्रस्तुत करना ही चाहिए। और हमने इसे प्रस्तुत किया। सरकार द्वारा निरंतर किए जाने वाले प्रयास के चलते यह सब संभव हो पाया।
9,12,696 करोड़ रुपये के इस बजट को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को दसवां बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। उन्होंने विपक्ष द्वारा वित्तीय स्वीकृतियों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि स्वीकृतियां समय पर जारी की जाती हैं और व्यय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
बजट पर विपक्ष को दिखाया आईना
राजकोषीय अनुशासन पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आइना दिखाते हुए कहा कि वर्ष 2016-17 में राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 4.39 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 2.97 प्रतिशत रह गया है। इसी प्रकार ऋणग्रस्तता भी लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत के आसपास आ गई है और 2026-27 तक इसे 23 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि 2016-17 में प्रति व्यक्ति आय लगभग 43,000 रुपये थी, जो 2024-25 के अंत तक 1,20,000 रुपये से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती और विकास की गति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में उत्तर प्रदेश बड़े राज्यों में निचले पायदान पर था, लेकिन आज प्रदेश ने अपनी जीएसडीपी को 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया है और 2026-27 में इसे 40 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर को दी गई प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुदान की मांगों पर चर्चा का उद्देश्य विभागों को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही योजनाबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ करने के लिए मार्गदर्शन देना है। सभी विभाग अपनी-अपनी कार्ययोजनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं जिससे बजट का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कैपिटल एक्सपेंडिचर को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2016-17 में यह लगभग 71,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1,77,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया निवेश केवल ढांचा निर्माण नहीं करता, बल्कि रोजगार सृजन, उद्योगों के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया गया एक रुपये का निवेश पांच से छह गुना प्रतिफल देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य इसी बजट के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और यह बजट उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
संवाद ही समाधान का मार्ग
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने सदन के संचालन के लिए अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दो सप्ताह तक चले बजट सत्र में महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण से लेकर विभिन्न नियमों के अंतर्गत उठाए गए विषयों और बजट पर विस्तृत चर्चा तक, सभी मुद्दों पर सार्थक विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था के रूप में विधानसभा की गरिमा और जिम्मेदारी का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सामान्य बजट 2026-27 को उनके सहयोगी वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में प्रस्तुत किया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय और वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव सहित सभी सदस्यों के वक्तव्यों को ध्यानपूर्वक सुना और सुझावों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट चर्चा में सत्ता पक्ष के 109 और विपक्ष के 58 सदस्यों सहित कुल 167 सदस्यों ने भाग लिया। अनुदान की मांगों पर भी व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने इसे स्वस्थ संसदीय परंपरा का उदाहरण बताया और कहा कि संवाद ही समाधान का मार्ग है।