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UP: जेवर एयरपोर्ट से जुड़ने पर एक फ्लाइट महीने में बचाएगी एक करोड़, यूपी में महज एक प्रतिशत लगता है वैट
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 27 Apr 2026 10:53 AM IST
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सार
विमानन उद्योग के अनुसार, कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में टैक्स में मामूली बदलाव भी कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डालता है। वैट में अंतर का सीधा सा अर्थ है कि लखनऊ के बाद जेवर एयरपोर्ट से एयरलाइंस कंपनियों का परिचालन दिल्ली के मुकाबले काफी सस्ता पड़ेगा।
- फोटो : X @AwasthiAwanishK
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विस्तार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लॉन्च के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर लगने वाले वैट यानी टैक्स का मुद्दा गरमा गया है। नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच एटीएफ पर वैट की दरों में भारी अंतर एयरलाइंस के लिए बड़ी चिंता का विषय बन रहा है। यह भविष्य में उड़ानों और परिचालन रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
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नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एटीएफ पर 25 प्रतिशत लगने वाला बैट उत्तर प्रदेश में महज 1 प्रतिशत रह जाता है। विमानन उद्योग के अनुसार, कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में टैक्स में मामूली बदलाव भी कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डालता है। वैट में अंतर का सीधा सा अर्थ है कि लखनऊ के बाद जेवर एयरपोर्ट से एयरलाइंस कंपनियों का परिचालन दिल्ली के मुकाबले काफी सस्ता पड़ेगा।
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उन्हें सीधे-सीधे 24 फीसदी की बचत होगी दिल्ली में एटीएफ की कीमत करीब 96000 रुपये प्रति किलोलीटर है, जिस पर 25 प्रतिशत वैट जोड़ने से 24000 रुपये किलोलीटर अतिरिक्त लागत आती है। वहीं उत्तर प्रदेश में एक किलोलीटर एटीएफ 80164 रुपये का है। इस पर वैट केवल 802 रुपये है। उड़ान के नजरिये से देखें तो लखनऊ-दिल्ली रूट पर एक सामान्य विमान करीब 3 किलोलीटर ईंधन खपत करता है। ऐसे में दिल्ली से ईंधन भराने पर एयरलाइंस को एक तरफ की उड़ान पर ही जेवर की तुलना में लगभग 72 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। यानी केवल जेवर से जुड़ने पर एक फ्लाइट हर महीने एक करोड़ से ज्यादा की बचत केवल सस्ते ईंधन से कर लेगी।
एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इतना बड़ा अंतर एयरलाइंस को जेवर एयरपोर्ट से ईंधन भराने के लिए प्रेरित कर सकता है। धीरे धीरे उड़ानों का एक हिस्सा कम टैक्स वाले हवाई अड्डों की ओर शिफ्ट हो सकता है, जिससे एनसीआर के भीतर यात्री ट्रैफिक का संतुलन बदलने की आशंका है। कम परिचालन लागत वाले एयरपोर्ट अधिक उड़ानों को आकर्षित करते हैं, जिससे वहां यात्री संख्या और कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट के संचालन शुरू होने के साथ ही एयरलाइंस अपनी लागत और नेटवर्क की दोबारा समीक्षा कर सकती हैं। इतना तय है कि जेवर का सीधा मुकाबला दिल्ली एयरपोर्ट से होगा।
राज्यकर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि यूपी में हवाई सेवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए 3 जनवरी 2022 को एटीएफ पर बैट घटाकर केवल एक प्रतिशत कर दिया गया, जबकि उससे पहले 21 फीसदी बैट था। 2027 तक रीजनल कनेक्टिविटी सर्विस पर वैट खत्म कर दिया गया है। यह जेवर एयरपोर्ट के लिए गेमचेंजर साबित होंगी।
एटीएफ पर यूपी में सबसे कम वैट
| राज्य | वैट |
| यूपी | 1 फीसदी |
| लद्दाख | 1 फीसदी |
| राजस्थान | 2 फीसदी |
| उत्तराखंड | 2 फीसदी |
| पंजाब | 4.4 फीसदी |
| जम्मू एंड कश्मीर | 5 फीसदी |
| हिमाचल | 17.5 फीसदी |
| चंडीगढ़ | 20 फीसदी |
| हरियाणा | 21 फीसदी |
| दिल्ली | 25 फीसदी |

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