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यूपी: प्रदेश में चाइनीज मांझे के उत्पादन और बिक्री पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से कहा-लगाएं पूर्ण प्रतिबंध

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 30 Mar 2026 07:44 PM IST
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सार

Chinese manjha in UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में खतरनाक चीनी मांझे से हो रही मौतों और घायलों पर सख्त रुख अपनाया है।

UP: High Court cracks down on production and sale of Chinese manjha, urges government to impose complete ban
चाइनीज मांझे से हो रही है लगातार मौतें। - फोटो : iStock
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विस्तार

 इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में खतरनाक चीनी मांझे से हो रही मौतों और घायलों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को चीनी मांझे के उत्पादन व बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। साथ ही, इस अपराध के अपराधियों को जवाबदेह बनाने को कहा है।

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कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक दफ्तर के पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अफसर से 20 अप्रैल को हलफनामे पर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने दिए। यह सुनवाई स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की वर्ष 2018 की जनहित याचिका पर हुई। याचिका में चीनी मांझे पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। याची ने अखबारों की खबरों का हवाला दिया, जिसमें हाल ही में करीब 20 लोग जख्मी हुए और कुछ की मौत भी हुई। कोर्ट ने पहले 11 फरवरी को सरकारी अमले के देर से जागने पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रभावी कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए थे। साथ ही, चीनी मांझे का शिकार हुए लोगों को मुआवजा व इलाज का खर्च देने पर विचार करने को कहा था।
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जवाबदेही और रोकथाम
कोर्ट ने कहा कि चीनी मांझे के मामले में जवाबदेही सिर्फ उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल करने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसकी रोकथाम का दायित्व न निभा पाने वालों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसके लिए एक समुचित कार्य योजना पेश करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि बिक्री और इस्तेमाल जारी रहता है, तो राज्य सरकार को पीड़ितों के इलाज व मुआवजे के लिए विवश किया जा सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 11 फरवरी के आदेश के तहत चार विभागों को नीति बनाने में शामिल होना होगा। इन विभागों में पर्यावरण, कॉमर्शियल टैक्स एमएसएमई, विधि और गृह विभाग शामिल हैं। सरकार ने नीति बनाने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने मामले को 20 अप्रैल को शुरुआती 10 मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

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