UP: चंपत राय के इस्तीफे के खिलाफ थे ज्यादातर सदस्य, इसलिए स्वीकार करना पड़ा; जानें बैठक के अंदर की बात
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए। अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई। भविष्य की व्यवस्था के लिए समिति बनाने का निर्णय हुआ। ट्रस्ट ने कीमती वस्तुओं के गायब होने की खबरों का खंडन किया और पारदर्शिता का भरोसा दिया।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने दावा किया है कि वह चंपत राय का इस्तीफा नहीं लेना चाहते थे। उन्होंने कहा कि केवल वही नहीं, बल्कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य भी चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे।
महंत दिनेंद्र दास ने आरोप लगाया कि चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने लिया और पूरे घटनाक्रम में उनकी ही प्रमुख भूमिका रही। उन्होंने कहा कि बैठक में चंपत राय द्वारा सौंपे गए इस्तीफे की प्रति भी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि बैठक में ऑनलाइन जुड़े सदस्य परासरण ने ट्रस्ट डीड का हवाला देते हुए कहा कि चंपत राय द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद वह स्वतः प्रभावी माना जाएगा। इसी आधार पर इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। हालांकि, महंत दिनेंद्र दास का कहना है कि ट्रस्ट डीड में इस्तीफे की जो प्रक्रिया और नियम निर्धारित हैं, उनका इस मामले में पालन नहीं किया गया।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी हैं तो इस पूरे मामले में उनकी भी जिम्मेदारी बनती है। उनका कहना था कि इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए थी और ट्रस्ट के सभी सदस्यों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।
चढ़ावा चोरी विवाद के बीच आए इस बयान से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर मतभेद और गहराते दिखाई दे रहे हैं। अब चोरी की जांच के साथ-साथ चंपत राय के इस्तीफे की प्रक्रिया भी नए विवाद का विषय बन गई है।
कृष्ण मोहन के नाम पर ट्रस्टी एक मत रहे
अब आगे कैसे व्यवस्था होगी, ये चर्चा शुरू हुई। तय हुआ कि मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए कृष्ण मोहन को महासचिव बनाया जाए। इस नाम पर ज्यादातर सदस्य सहमत हो गए। साथ ही, आगे चलकर सीईओ की नियुक्ति करने पर भी ट्रस्टी राजी हो गए।
इसके लिए 3 सदस्यों के नाम रखे गए। इनमें रिटायर्ड जस्टिस प्रदीप कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े के नाम शामिल थे। ये लोग मिलकर स्टैंडर्ड तय करेंगे, जिन्हें 22 जुलाई की मीटिंग में सदस्यों के सामने रखा जाएगा।
चंपत राय के इस्तीफे के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने का दायित्व अंतरिम रूप से कृष्ण मोहन को सौंपा गया है। उन्हें अपनी नई टीम गठित कर सभी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके साथ ही ट्रस्ट ने मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें मंदिर से अन्य कीमती वस्तुओं के गायब होने का दावा किया जा रहा था। ट्रस्ट ने साफ किया कि ये बातें पूरी तरह भ्रामक हैं; मंदिर में भेंट स्वरूप प्राप्त लगभग 2,800 प्रकार की सामग्रियों का पूरा रजिस्टर पूरी तरह सुरक्षित है और सभी वस्तुएं अपनी जगह पर हैं। आवश्यकता पड़ने पर इस रिकॉर्ड को सार्वजनिक भी किया जाएगा।
बैठक से बाहर रहे चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा
बैठक के सबसे बड़े घटनाक्रम में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा बैठक से बाहर रहे। वहीं, मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े गोपाल राव को भी बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यदि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा बैठक में मौजूद रहेंगे तो वे बैठक का हिस्सा नहीं बनेंगे। सदस्यों के इसी रुख के बाद दोनों बैठक में शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि यह फैसला बैठक की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था।
चंपत राय के बचाव में उतरी वीएचपी
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने सोमवार को कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर जो भी निर्णय लेगा, वह उसका सम्मान करेगी। वीएचपी ने जोर देकर कहा कि केवल आरोपों से किसी का दोष सिद्ध नहीं हो जाता।
संतों के विवेक पर पूरा भरोसा
आरएसएस के इस सहयोगी संगठन ने यह भी कहा कि राम मंदिर में दान के कथित गबन (घोटाले) की चल रही जांच को अपने निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाना चाहिए। वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि संगठन इस बैठक के नतीजों पर कोई कयास नहीं लगाएगा और उन्हें ट्रस्ट के विवेक पर पूरा भरोसा है। ट्रस्ट खुद ही फैसला करेगा और इसकी घोषणा करेगा। वह जो भी फैसला लेगा, हम उसका सम्मान करेंगे। ट्रस्ट से जुड़े संतों के विवेक पर हमें पूरा भरोसा है।
जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक किसी को अपराधी न समझें
सुरेंद्र जैन ने चंपत राय और अनिल मिश्रा का बचाव करते हुए कहा कि केवल आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक किसी को अपराधी न समझें। जांच एजेंसी को अपना काम करने दें और जांच के नतीजों का इंतजार करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जांच पूरी होने से पहले ही चंपत राय को दोषी ठहराने की कोशिश की है।
कई आरोप जांच में टिक नहीं पाए
जैन ने दावा किया कि चंपत राय के खिलाफ लगाए गए कई आरोप जांच में टिक नहीं पाए हैं। उन्होंने कहा कि वीएचपी नेता ने जांच से बचने की कोशिश नहीं की है, बल्कि उन्होंने एसआईटी के गठन का समर्थन किया है और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती निष्कर्ष सामने आने के तुरंत बाद मंदिर ट्रस्ट ने तत्परता दिखाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई और किसी को भी बचाने का प्रयास नहीं किया।