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यूपी: चुनाव के ठीक पहले बदली यूपी की राजनीति, ब्राह्मण वोट हुआ प्रासंगिक; अखिलेश के PDA में अब आया पंडित भी

Thu, 06 Aug 2026 07:39 AM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 06 Aug 2026 07:39 AM IST
सार

Elections in UP: यूपी में चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां वैसे-वैसे जातीय समीकरणों को नए तरीके से देख रही हैं। अभी अखिलेश का पूरा फोकस ब्राह्मण वोटर हो गए हैं। 

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UP: Politics has shifted just before the elections, with Brahmin votes becoming relevant; Akhilesh Yadav's PDA
अखिलेश ने बदला पीडीए का गणित। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने सियासी दलों को जातीय समीकरण खासतौर पर ब्राह्मण समेत सवर्ण समाज के वोटबैंक को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल, भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद ब्राह्मण समाज में पैदा हुए गुस्से को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट बांकीपुर पर भाजपा की हार का कारण माना जा रहा है। इसका असर बुधवार को लखनऊ में आयोजित जनेश्वर मिश्र जंयती कार्यक्रम में भी नजर आया।

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समाजवादी चिंतक मिश्र के जयंती कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुलकर ब्राह्मण कार्ड चला। उन्होंने कहा कि सपा के पीडीए में पी का मतलब पंडित है। उन्होंने भाजपा पर ब्राह्मणों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। कानपुर के विकास दुबे पर कहा, सैटेलाइट इमेज निकाली जाएगी तो साफ हो जाएगा कि किसने गाड़ी पलटाई। गोरखपुर में तो इन्हें (भाजपा नेतृत्व को) हाता भी नहीं भाता है।
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अखिलेश ने प्रयागराज में शंकराचार्य के बिना स्नान किए लौटने और बटुकों की पिटाई के मुद्दे को पूरे ब्राह्मण समाज के अपमान से जोड़ा। साथ ही उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और सपा छोड़कर भाजपा में गए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय पर भी निशाना साधा। इससे उन्होंने उच्च वर्ग को यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा के ये ब्राह्मण चेहरे उनके सच्चे हितैषी नहीं हैं।
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सपा अध्यक्ष ने कहा कि कुशीनगर में कुछ लोगों को मिलने से पहले नहलाया गया। वहीं, उन्होंने गोरखपुर में शिक्षकों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार के जख्म को भी कुरेदा। वह यह बताना भी नहीं भूले कि भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर कोई काम नहीं किया। सिर्फ सपा सरकार के बनाए लोकभवन में उनकी प्रतिमा लगाई है।पंडितों पर सांस्कृतिक हमले का उल्लेख करते हुए अखिलेश ने कहा कि इसी सरकार में इस समाज पर विवादित फिल्म भी बनाई गई। इस दौरान उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद माता प्रसाद पांडेय को देने को ब्राह्मण सम्मान से जोड़कर दिखाया।

खुद को बताया सनातनी परंपराओं का वाहक

UP: Politics has shifted just before the elections, with Brahmin votes becoming relevant; Akhilesh Yadav's PDA
चुनावी तैयारियों में जुटे अखिलेश। - फोटो : अमर उजाला।

अखिलेश ने यह कहकर खुद को सनातनी परंपराओं का वाहक बताने का प्रयास भी किया कि हमारी सनातनी परंपराओं में चढ़ावा और दान की रसीद नहीं होती है। भाजपाई रसीद मांग रहे हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए कहा कि इनके यहां एक रसीद घोटाला करने वाले डिप्टी सीएम भी हैं। ब्राह्मण समाज को लुभाने में सपा अध्यक्ष कितने सफल हुए, यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन पीडीए में पंडित का दांव और विधानसभा चुनाव 2027 में ब्राह्मणों को उचित प्रतिधिनित्व देने के वादे ने सपा की नई रणनीतिक चाल को साफ जरूर किया है।

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