'हीरोइन नहीं विद्या को कहिए शौचालय की देवी'
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विद्या बालन को नया नाम मिल गया है। यह नाम सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन मजे की बात यह है कि विद्या को इस नाम से कोई आपत्ति नहीं बल्कि वह खुश हो रही हैं।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष व आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिर सोच को बदलता है और शौचालय शौच के तरीकों को। अभिनेत्री विद्या बालन बॉलीवुड छोड़कर स्वच्छता अभियान से जुड़ी हैं।
इसलिए उन्हें शौचालय की देवी कहा जाना चाहिए। इस पर विद्या बालन ने प्रतिक्रिया व्यक्त की कि हिन्दुस्तान में देवी होना सौभाग्य की बात है। चाहे वह शौचालय की हो या फिर मंदिर की।
दरअसल, स्वामी चिदानंद सरस्वती व विद्या बालन लखनऊ में आयोजित एक निजी आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे, जहां स्वामी चिदानंद सरस्वती अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि घर-घर में शौचालय बनने के बाद ही मंदिर बनने चाहिए और भण्डारों पर होने वाला खर्च ट्वाइलेट निर्माण पर किया जाना चाहिए।
चिदानंद सरस्वती ने आगे कहा कि एक ट्वायलेट यूनिवर्सिटी भी बनाई जानी चाहिए। इस अवसर पर पूर्व मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि लोग जब पूछते हैं कि मैंने अपने 15 महीनों के कार्यकाल में क्या किया तो जवाब देता हूं कि विद्या बालन को स्वच्छता का दूत बनाया।
बाद में विद्या बालन ने स्वामी चिदानंद सरस्वती के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी कि शौचालय की देवी कहा गया, यह सौभाग्य की बात है। चूंकि, भारत में देवी पूजनीय होती है।
शौचालय को बनाएं विद्या जैसा सेक्सी
विद्या ने कहा कि भले ही तकनीकी स्तर पर बहुत बदलाव नजर नहीं आता हो, पर एक बात है कि जागरुकता अवश्य फैली है। स्वच्छता को लेकर लोगों की सोच बदल रही है, जोकि अच्छी बात है।
कार्यक्रम में वर्ल्ड ट्वाइलेट ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक जैकसिम ने कहा कि शौचालय ऐसी जगह होती है, जिसे इन्ज्वॉय किया जाना चाहिए। दिन में छह से आठ बार शौचालय जाना चाहिए।
इतना ही नहीं अपने शौचालय को विद्या बालन की तरह सेक्सी बनाएं। इस पर जब विद्या से प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने मुस्कुराकर सवाल टाल दिया।
‘कहानी’, ‘डर्टी पिक्चर’, ‘अधूरी कहानी’ सरीखी तमाम फिल्मों में अभिनय कर चुकीं अभिनेत्री विद्या बालन का मानना है कि उनके किरदारों की आवाज लोगों तक पहुंच रही है, यही उनका प्रयास है। इसीलिए हर फिल्म के किरदार को सशक्त व यादगार बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करती हैं।