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सुना है क्या: आज 'न जाने कौन कान में फूंक आए', 'मंत्रीजी की दिलेरी और साहब काट रहे लोहे से लोहा' के किस्से

Tue, 04 Aug 2026 08:44 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 04 Aug 2026 08:44 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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wonder who whispered in whose ear story alongwith Minister boldness and boss pitting iron against iron
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'जाने कौन कान में फूंक आए' की कहानी। इसके अलावा 'मंत्रीजी की दिलेरी' और 'साहब काट रहे लोहे से लोहा' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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न जाने कौन कान में फूंक आए

हाथी वाले दल के बड़े-बड़े महावत भितरघात से परेशान हैं। न जाने कौन मुखिया के कान में क्या फूंक आए, जिससे मुसीबत खड़ी हो जाए। एक वरिष्ठ पदाधिकारी तो सारा हाल जानने के बाद भी अनजान बने रहने में भलाई मान रहे हैं। पहले ही वह समर्थकों के निशाने पर रहते हैं। किसी प्रपंच में नाम आ गया तो ज्यादा लानत-मलामत होने लगेगी। सबसे ज्यादा दिक्कत खुराफात करने वाले एक बिना वोट वाले नेता से है। वह इतना सक्रिय रहते हैं कि दक्षिणा देने वालों के लिए उनके दरवाजे दिन-रात खुले हैं। बाकियों की तरफ तो वह झांकते तक नहीं हैं।

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मंत्रीजी की दिलेरी

मंत्रीजी जितनी बेबाकी से बोल रहे हैं, उतनी ही दिलेरी से फाइल पर लिख भी रहे हैं। यह भी नहीं देख रहे कि जो लिख रहे हैं, वो नियमसंगत है या नहीं। मातहत अधिकारियों को उनके लिखे पर अमल रोकने में पसीने छूट रहे हैं। जब से उच्चस्तर से मंत्रीजी की प्रशंसा हुई है, तब से वे और भी फूले नहीं समा रहे हैं। अब तो मातहत भी कहने लगे हैं कि मंत्रीजी तो झोला उठाकर चल देंगे, यहां तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

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साहब काट रहे लोहे से लोहा

भारी तनाव के कारण एक साहब का इन दिनों शुगर लेवल बढ़ गया है। इसे कम करने के लिए साहब ने नया तरीका भी ईजाद कर लिया है। दरअसल पिछले दिनों हाई लेवल मीटिंग में साहब नहीं पहुंचे तो उनकी काफी मलामत हुई थी। तभी से साहब भारी तनाव में हैं। वैसे भी साहब का महकमा इंजीनियरों के मोलभाव को लेकर चर्चा में रहता है। इसकी जानकारी ऊपर तक पहुंच गई है। ऐसे में तनाव बढ़ने से साहब ने शाम की खुराक बढ़ा दी है। किसी ने उन्हें ऐसा न करने से रोका तो साहब बोले कि अब लोहे से लोहा काटने का यही सबसे आसान तरीका है।

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