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मध्य प्रदेश में नई ट्रांसफर पॉलिसी की तैयारी: एक माह के लिए हटेगा प्रतिबंध,प्रभारी मंत्रियों को मिलेंगे अधिकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 16 Apr 2026 02:36 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति 2026 जल्द लागू हो सकती है। मोहन सरकार एक महीने के लिए ट्रांसफर पर लगी रोक हटा सकती है। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने ड्राफ्ट तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिसे इसी माह के अंत तक कैबिनेट में पेश किया जा सकता है।
वल्लभ भवन, भोपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 की नई तबादला नीति लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के संकेतों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) नीति का ड्राफ्ट तैयार करने में जुट गया है, जिसे अप्रैल के अंत तक कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। सरकार हर साल की तरह इस बार भी तबादलों पर लगी रोक को सीमित अवधि के लिए हटाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, करीब एक महीने की विंडो खोली जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों में कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि, अनियंत्रित तबादलों पर रोक लगाने के लिए एक सीमा तय की गई है-किसी भी विभाग में कुल तबादले उसके कैडर के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे।
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इस बार की नीति में एक बड़ा बदलाव प्रभारी मंत्रियों की भूमिका को लेकर देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों को अपने जिलों में तबादलों पर पहले जैसे अधिकार दिए जा सकते हैं। यानी उनकी स्वीकृति के बिना सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। इससे जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय बढ़ने की संभावना है। वहीं, स्थानीय स्तर पर कलेक्टर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले पहले कलेक्टर स्तर पर प्रस्तावित होंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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पिछले साल अपेक्षाकृत कम तबादले होने के कारण इस बार कर्मचारियों में उम्मीदें बढ़ी हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को नई नीति से राहत मिलने की संभावना है। बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने भी तबादला प्रतिबंध हटाने की मांग रखी थी, जिससे साफ है कि इस बार प्रक्रिया ज्यादा सक्रिय रहने वाली है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद मई की शुरुआत से तबादलों का दौर शुरू होने के आसार हैं।
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इस बार की नीति में एक बड़ा बदलाव प्रभारी मंत्रियों की भूमिका को लेकर देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों को अपने जिलों में तबादलों पर पहले जैसे अधिकार दिए जा सकते हैं। यानी उनकी स्वीकृति के बिना सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। इससे जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय बढ़ने की संभावना है। वहीं, स्थानीय स्तर पर कलेक्टर की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले पहले कलेक्टर स्तर पर प्रस्तावित होंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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पिछले साल अपेक्षाकृत कम तबादले होने के कारण इस बार कर्मचारियों में उम्मीदें बढ़ी हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को नई नीति से राहत मिलने की संभावना है। बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने भी तबादला प्रतिबंध हटाने की मांग रखी थी, जिससे साफ है कि इस बार प्रक्रिया ज्यादा सक्रिय रहने वाली है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद मई की शुरुआत से तबादलों का दौर शुरू होने के आसार हैं।

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