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MP News: फर्जी दस्तावेजों पर 40 लाख का बैंक लोन, व्यापारी समेत पांच पर EOW ने की FIR
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 31 Jan 2026 06:32 PM IST
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सार
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से 40 लाख रुपये का लोन लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने कार्रवाई की है। इस मामले में एक व्यापारी, सह-ऋणी और बैंक के तत्कालीन अधिकारियों समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
ईओडब्ल्यू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संपत्ति के फर्जी और कूट-रचित दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से 40 लाख रुपये का ऋण लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ा खुलासा किया है। मामले में एक व्यापारी, सह-ऋणी और बैंक के तत्कालीन अधिकारियों सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। केनरा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर के उप महाप्रबंधक आनंद शिवानंद की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में बताया गया कि चंद्रशेखर पचोरी नामक व्यापारी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से मशीन खरीदने के नाम पर 40 लाख रुपये का लोन हासिल किया और बाद में किश्तों का भुगतान नहीं किया। जांच में सामने आया कि 12 अप्रैल 2018 को चंद्रशेखर पचोरी ने “जय शिव एंड कंपनी” के नाम से केनरा बैंक की नंदा नगर शाखा में चालू खाता खुलवाया था। इसके बाद नवलखा शाखा में 40 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया, जिसमें राममोहन अग्रवाल को सह-ऋणी (को-ओब्लिगेंट) बनाया गया।
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ऋण स्वीकृति के लिए जिस संपत्ति को बंधक बताया गया, वह उषा नगर एक्सटेंशन स्थित एक प्लॉट था। बैंक को दी गई लीगल रिपोर्ट में सह-ऋणी को उस संपत्ति का वैध मालिक बताया गया, जबकि जांच में यह पाया गया कि उक्त प्लॉट पर पहले ही बहुमंजिला इमारत बनाकर फ्लैट और दुकानें वर्षों पहले बेची जा चुकी थीं। ऋण स्वीकृति के समय सह-ऋणी उस संपत्ति का मालिक ही नहीं था।
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EOW की जांच में यह भी सामने आया कि बैंक कर्मचारियों द्वारा संपत्ति का भौतिक सत्यापन गलत तरीके से किया गया। तत्कालीन शाखा प्रबंधक और क्रेडिट मैनेजर ने जरूरी तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए ऋण को मंजूरी दी। वहीं, बहुमंजिला भवन के मौजूद होने के बावजूद दस्तावेजों में इसे जानबूझकर छिपाया गया। लोन की किश्तें समय पर जमा नहीं होने के कारण 1 मई 2023 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक द्वारा कराई गई जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इस मामले में EOW ने चंद्रशेखर पचोरी, राममोहन अग्रवाल, तत्कालीन शाखा प्रबंधक जतिन गुप्ता, क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी और शांता मार्केटिंग के प्रोपराइटर के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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ऋण स्वीकृति के लिए जिस संपत्ति को बंधक बताया गया, वह उषा नगर एक्सटेंशन स्थित एक प्लॉट था। बैंक को दी गई लीगल रिपोर्ट में सह-ऋणी को उस संपत्ति का वैध मालिक बताया गया, जबकि जांच में यह पाया गया कि उक्त प्लॉट पर पहले ही बहुमंजिला इमारत बनाकर फ्लैट और दुकानें वर्षों पहले बेची जा चुकी थीं। ऋण स्वीकृति के समय सह-ऋणी उस संपत्ति का मालिक ही नहीं था।
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EOW की जांच में यह भी सामने आया कि बैंक कर्मचारियों द्वारा संपत्ति का भौतिक सत्यापन गलत तरीके से किया गया। तत्कालीन शाखा प्रबंधक और क्रेडिट मैनेजर ने जरूरी तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए ऋण को मंजूरी दी। वहीं, बहुमंजिला भवन के मौजूद होने के बावजूद दस्तावेजों में इसे जानबूझकर छिपाया गया। लोन की किश्तें समय पर जमा नहीं होने के कारण 1 मई 2023 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक द्वारा कराई गई जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इस मामले में EOW ने चंद्रशेखर पचोरी, राममोहन अग्रवाल, तत्कालीन शाखा प्रबंधक जतिन गुप्ता, क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी और शांता मार्केटिंग के प्रोपराइटर के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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