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MP News: कर्मचारियों के मूल दस्तावेज नहीं रख सकेंगे नियोक्ता, 'राइट टू डिस्कनेक्ट' का अधिकार मिलेगा
Wed, 22 Jul 2026 09:35 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 22 Jul 2026 09:35 AM IST
सार
मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को मध्य प्रदेश कोड ऑन एम्पावरिंग वर्क स्पेसेज (लेबर पावर कोड) विधेयक-2026 पारित कर दिया। नए कानून का उद्देश्य कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना, सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना और आधुनिक कार्य व्यवस्था के अनुरूप श्रम कानूनों में बदलाव करना है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित नए श्रम कानून के तहत अब कोई भी नियोक्ता अपने कर्मचारियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पहचान पत्र या पासपोर्ट अपने पास नहीं रख सकेगा। इसके अलावा कर्मचारी की सहमति के बिना उसका स्थानांतरण भी नहीं किया जा सकेगा। विधेयक में पहली बार कर्मचारियों को 'राइट टू डिस्कनेक्ट' का अधिकार दिया गया है। यानी कर्मचारी को तय कार्य समय के बाद काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कर्मचारी को ड्यूटी के बाद भी उपलब्ध रहने के लिए कहा जाता है, तो उस समय को ओवरटाइम माना जाएगा।
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कानून के अनुसार एक दिन में अधिकतम 12 घंटे तक ही काम कराया जा सकेगा। वहीं, रात की पाली या जोखिम वाले कार्यस्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है। महिलाओं के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। अब महिलाओं से रात्रि पाली में तभी काम कराया जा सकेगा, जब वे लिखित सहमति दें। साथ ही नियोक्ता को उनके लिए मुफ्त और सुरक्षित परिवहन तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
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इस कानून के दायरे में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन डिलीवरी करने वाले कर्मचारी, कैब चालक और ऐसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिक भी शामिल होंगे, जिन्हें इस कानून के तहत अधिकार और सुरक्षा मिलेगी। विधेयक में बेगार (जबरन श्रम) और श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने के भी प्रावधान किए गए हैं, ताकि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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कानून के अनुसार एक दिन में अधिकतम 12 घंटे तक ही काम कराया जा सकेगा। वहीं, रात की पाली या जोखिम वाले कार्यस्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है। महिलाओं के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। अब महिलाओं से रात्रि पाली में तभी काम कराया जा सकेगा, जब वे लिखित सहमति दें। साथ ही नियोक्ता को उनके लिए मुफ्त और सुरक्षित परिवहन तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
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इस कानून के दायरे में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन डिलीवरी करने वाले कर्मचारी, कैब चालक और ऐसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिक भी शामिल होंगे, जिन्हें इस कानून के तहत अधिकार और सुरक्षा मिलेगी। विधेयक में बेगार (जबरन श्रम) और श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने के भी प्रावधान किए गए हैं, ताकि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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