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MP news: नौकरी पर संकट का डर,सड़कों पर उतरे शिक्षक,भोपाल में DPI घेराव,TET आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में प्रदर्शन

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 08 Apr 2026 05:57 PM IST
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सार

टीईटी अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ भोपाल में शिक्षकों ने DPI मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने इसे नौकरी पर खतरा बताते हुए आदेश रद्द करने की मांग की है। प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपे गए हैं और 11 अप्रैल को बड़े आंदोलन की तैयारी है।

MP News: Fearing Job Insecurity, Teachers Take to the Streets; DPI Gherao in Bhopal; Statewide Protests Agains
शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के नए आदेश के खिलाफ शिक्षक संगठनों का गुस्सा खुलकर सामने आया। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय के बाहर जुटे और जोरदार नारेबाजी करते हुए घेराव किया। प्रदर्शन में आसपास के जिलों से भी शिक्षक शामिल हुए, जिससे आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने साफ कहा कि वे टीईटी परीक्षा देने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि इस आदेश को पूरी तरह निरस्त किया जाए। उनका आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के नाम पर ऐसा निर्णय थोप रही है, जिससे हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
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प्रदेशभर में एक साथ विरोध, कलेक्ट्रेटों में सौंपे ज्ञापन
यह विरोध सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रहा। शिक्षक संगठनों ने पूरे मध्यप्रदेश में एक साथ आंदोलन शुरू किया है। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए हैं, जिसमें टीईटी आदेश वापस लेने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग प्रमुख है।
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DPI के आदेश ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में DPI भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से अधिक समय बचा है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा पास न करने की स्थिति में सेवा समाप्त की जा सकती है। इसी प्रावधान ने शिक्षकों की चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं।

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पुराने शिक्षकों पर नया नियम क्यों?
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि आरटीई कानून 2009 में लागू हुआ और टीईटी 2011 से अनिवार्य किया गया, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर यह शर्त लागू करना गलत और अन्यायपूर्ण है। इसे “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पुराने मामलों पर नए नियम थोपने जैसा बताया जा रहा है।

1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे में
संगठनों के अनुसार इस आदेश का असर करीब 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय यह शर्त लागू नहीं थी, इसलिए अब इसे आधार बनाकर नौकरी पर संकट खड़ा करना उचित नहीं है। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में सभी प्रमुख शिक्षक संगठन एक मंच पर आ गए हैं। हाल ही में हुई बैठक में तय किया गया कि टीईटी के साथ-साथ अन्य मुद्दों जैसे डिजिटल अटेंडेंस और सेवा वृद्धि पर भी संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी जाएगी।

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11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर बड़ा आंदोलन
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान स्थानीय विधायक, मंत्री और सांसदों को ज्ञापन देकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। संगठनों का कहना है कि यदि जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

 
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