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MP News: DPI में रिटायरमेंट के अगले दिन ही दोबारा पोस्टिंग? कांग्रेस ने खोला मोर्चा,विधानसभा में गूंजेगा मामला

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Wed, 11 Feb 2026 05:48 PM IST
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सार

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि लोक शिक्षण संचालनालय में सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियमों के विरुद्ध आउटसोर्सिंग के जरिए दोबारा नियुक्त किया गया। बिना विज्ञापन और पारदर्शी प्रक्रिया के 35 से 64 हजार रुपए तक मानदेय पर पोस्टिंग देने का दावा किया गया है।

MP News: Re-posting to DPI the day after retirement? Congress opens front, issue to be heard in the Assembly
कांग्रेस नेता की प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश के लोक शिक्षण तंत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता विवेक त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि उद्यमिता विकास केंद्र (सेडमैप), लोक शिक्षण संचालनालय और एक निजी मैनपावर एजेंसी की मिलीभगत से सेवानिवृत्त अधिकारियों को नियमों को दरकिनार कर दोबारा उसी विभाग में नियुक्त किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में रिटायरमेंट के अगले ही दिन पुनर्नियुक्ति कर दी गई। कांग्रेस ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय सहित स्कूल शिक्षा, श्रम, गृह, एमएसएमई विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय और पुलिस महानिदेशक को भेजी है। पार्टी ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
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प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय
पत्रकार वार्ता में त्रिपाठी ने इसे संगठित नियुक्ति घोटाला बताते हुए कहा कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। उनके मुताबिक संबंधित पदों पर न तो कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया, न ऑनलाइन आवेदन मांगे गए और न ही पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बावजूद सेवानिवृत्त प्रथम श्रेणी अधिकारियों को आउटसोर्सिंग के जरिए 35 हजार से 64 हजार रुपए तक मासिक मानदेय पर तैनात कर दिया गया।
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 सरकार से कई सवाल भी पूछे 
- क्या इन पदों के लिए सेडमैप पोर्टल पर कभी विज्ञापन जारी हुआ?
- चयन प्रक्रिया क्या थी और कितने आवेदन प्राप्त हुए?
- संबंधित मैनपावर एजेंसी को भुगतान किस नियम के तहत किया गया?
- वर्ष 2020 से अब तक कितनी ऐसी नियुक्तियां की गईं?

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विधानसभा में उठेगा मुद्दा
त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक उठाया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। कांग्रेस ने मांग की है कि कथित फर्जी नियुक्तियां तत्काल निरस्त की जाएं, संबंधित एजेंसी की अनुमति रद्द हो और मामले की जांच ईओडब्ल्यू या एसआईटी से कराई जाए।
 
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