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Bhopal:1.4 किलो के मासूम को दिल की गंभीर बीमारी,एम्स के डॉक्टरों ने 35 मिनट में बचाई जान, मध्य भारत का रिकॉर्ड

Mon, 13 Jul 2026 06:21 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 13 Jul 2026 06:21 PM IST
सार

सागर के एक महीने के मासूम का वजन सिर्फ 1.4 किलो था। दिल की एक नस जन्म के बाद बंद नहीं हुई थी। कई अस्पतालों ने कम वजन और ज्यादा खतरा बताकर इलाज से इनकार कर दिया। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकार की और महज 35 मिनट में बिना ओपन हार्ट सर्जरी के दिल की नस बंद कर दी। दावा है कि मध्य भारत में इतने कम वजन के बच्चे पर यह प्रक्रिया पहली बार सफल हुई है।

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Bhopal: AIIMS doctors save the life of a 1.4 kg infant suffering from a severe heart condition in 35 minutes—a
एक माह का मासूम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 महज एक महीने की उम्र और वजन सिर्फ 1.4 किलो। सांस लेने में परेशानी और मां का दूध पीते ही थक जाने वाला सागर का मासूम गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रहा था। कई अस्पतालों में परिजन इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे, लेकिन बच्चे का बेहद कम वजन देखकर जोखिम ज्यादा बताया गया। आखिरकार एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने मासूम का इलाज किया और सिर्फ 35 मिनट में दिल की गंभीर गड़बड़ी को ठीक कर दिया। एम्स भोपाल के मुताबिक, मध्यप्रदेश और पूरे मध्य भारत में इतने कम वजन के बच्चे का सफल ट्रांसकैथेटर पीडीए डिवाइस क्लोजर पहली बार किया गया है।
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दिल की नस खुली रह गई थी, फेफड़ों पर बढ़ रहा था दबाव
बच्चे को जन्मजात हृदय रोग पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (पीडीए) था। सरल शब्दों में कहें तो दिल से जुड़ी एक रक्त वाहिका, जिसे जन्म के बाद अपने आप बंद हो जाना चाहिए था, वह खुली रह गई थी। इसके कारण फेफड़ों में जरूरत से ज्यादा खून पहुंच रहा था और दिल पर दबाव बढ़ता जा रहा था। बच्चे को तेज सांस चलने, दूध पीने में परेशानी और वजन नहीं बढ़ने जैसी दिक्कतें हो रही थीं। समय पर इलाज नहीं होता तो हार्ट फेल होने का खतरा भी था।
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डॉक्टरों ने स्वीकार की चुनौती
सिर्फ 1.4 किलो वजन के बच्चे में यह प्रक्रिया बेहद मुश्किल थी। बच्चे की रक्त वाहिकाएं इतनी छोटी और नाजुक थीं कि कैथेटर के जरिए डिवाइस को सही जगह पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह के नेतृत्व में डॉ. सुदेश प्रजापति, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंबर कुमार और वरिष्ठ एनेस्थीसिया टीम ने प्रक्रिया की। आधुनिक तकनीक और विशेष उपकरणों की मदद से डॉक्टरों ने केवल 35 मिनट में पीडीए को डिवाइस लगाकर बंद कर दिया।
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ऑपरेशन के कुछ देर बाद मां का दूध पीने लगा मासूम
प्रक्रिया सफल होने के बाद बच्चे को कैथ लैब में ही वेंटिलेटर से हटा दिया गया। कुछ समय बाद मासूम ने सामान्य रूप से मां का दूध पीना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने इसे तेजी से सुधार का अच्छा संकेत बताया। डॉ. भूषण शाह ने बताया कि एम्स पहुंचने के समय बच्चे को सांस लेने और दूध पीने में गंभीर परेशानी थी। कम वजन के कारण प्रक्रिया तकनीकी रूप से काफी जोखिम भरी थी, लेकिन समय पर इलाज ही बच्चे के स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी था।

कई अस्पतालों से मायूस लौटे माता-पिता, एम्स में मिली उम्मीद
बच्चे के माता-पिता ने बताया कि वे इलाज के लिए कई अस्पतालों में गए थे। कम वजन और ज्यादा जोखिम का हवाला देकर प्रक्रिया मुश्किल बताई गई। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने परिवार को भरोसा दिया और बच्चे का सफल इलाज किया।

प्रक्रिया के बाद मासूम को सामान्य रूप से दूध पीते देखकर परिवार भावुक हो गया। परिजन ने इलाज करने वाली पूरी मेडिकल टीम का आभार जताया।

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एम्स भोपाल ने दिल के इलाज में बनाया नया रिकॉर्ड
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. डॉ. माधवानन्द कर और चिकित्सा अधीक्षक ने कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया टीम को बधाई दी है। एम्स प्रबंधन का कहना है कि इस सफलता ने जटिल हृदय रोगों के इलाज में संस्थान की क्षमता को और मजबूत किया है। यहां बेहद कम वजन के नवजात से लेकर वयस्क मरीजों तक की जटिल हृदय प्रक्रियाएं की जा रही हैं।
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