डीएम साहब सुन लीजिए: पढ़ाई की फीस के लिए भी पैसे नहीं, पिता की नौकरी की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची बेटी
सिंगरौली में जमीन अधिग्रहण के पांच साल बाद भी रोजगार नहीं मिलने से दिव्यांग राधा पनिका पिता की नौकरी और अपनी पढ़ाई की फीस के लिए कलेक्ट्रेट पहुंची। तहसीलदार ने व्हीलचेयर पर बैठाकर जांच और जल्द सहायता का भरोसा दिया।
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सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील के नौडिया गांव की रहने वाली दिव्यांग युवती राधा पनिका अपने पिता को रोजगार और अपनी पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची। एनसीएल की ब्लॉक-बी परियोजना के लिए जमीन, मकान और खेत अधिग्रहित किए जाने के पांच साल बाद भी परिवार को रोजगार मिलने का इंतजार है। दोनों पैरों से दिव्यांग राधा जमीन पर घिसटते हुए प्रशासनिक परिसर में पहुंची और अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई। तहसीलदार सविता यादव ने उसे तत्काल व्हीलचेयर पर बैठाया और प्रकरण की जांच कर जल्द सहायता का भरोसा दिया।
पांच साल से दफ्तरों के चक्कर
राधा के पिता श्याम सुंदर पनिका ने बताया कि करीब पांच साल पहले नोटिस क्रमांक 1467 के माध्यम से शासकीय भूमि पर बने उनके आवास का मुआवजा सीसीएल की गोरबी परियोजना की ओर से दिया गया था। उस समय प्रबंधन ने परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने का आश्वासन भी दिया था। हालांकि, मुआवजे की राशि परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं थी।
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श्याम सुंदर के अनुसार, अधिकारियों ने अजंता राधा अर्थ मूवर्स लिमिटेड में काम दिलाने का भी आश्वासन दिया था। इसके बाद से परिवार वर्ष 2020-21 से लगातार रोजगार की मांग को लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। उनका कहना है कि वे करीब 20 से 25 बार कंपनी और लगभग 30 बार एनसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय जा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
फीस जमा नहीं होने से पढ़ाई पर संकट
परिवार में पति-पत्नी और तीन बच्चे हैं। परिवार का भरण-पोषण अनिश्चित दैनिक मजदूरी से होता है। श्याम सुंदर के मुताबिक, रोजाना करीब 300 रुपये की मजदूरी कमाना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कर्ज लेकर अपनी दिव्यांग बेटी राधा का सतना के एक संस्थान में डीएलएड पाठ्यक्रम में दाखिला कराया था। अब आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण आगामी शिक्षण शुल्क जमा करना मुश्किल हो गया है।
इसी परेशानी के चलते परिवार दाखिले से जुड़े दस्तावेज लेकर जिला मुख्यालय पहुंचा और प्रशासन से मदद की मांग की। तहसीलदार सविता यादव ने राधा और उसके पिता की समस्या सुनी। उन्होंने प्रकरण की जांच कराने और शिक्षा या रोजगार के संबंध में जल्द सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
