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Jabalpur News: ईडी द्वारा कुर्क की गई 45 करोड़ की संपत्ति कैनरा बैंक के सुपुर्द, विशेष न्यायालय ने दिए आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 08:52 PM IST
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सार
प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुर्क की गई 45 करोड़ रुपये की तीन संपत्तियां विशेष न्यायालय के आदेश पर कैनरा बैंक को बहाल कर दीं। मामला फर्जी वाहन ऋण लेकर 18.32 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें पुष्पेंद्र सिंह आरोपी है।
विशेष न्यायालय के आदेश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मनी लॉन्ड्रिंग के एक प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कुर्क की गई 45 करोड़ रुपये मूल्य की तीन संपत्तियों को विशेष न्यायालय ने कैनरा बैंक के पक्ष में बहाल करने के आदेश दिए थे। विशेष न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए ईडी ने उक्त कुर्क संपत्तियां कैनरा बैंक के सुपुर्द कर दी हैं।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह सामने आया था कि जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कई वाहन ऋण लिए, लेकिन वाहनों की डिलीवरी नहीं की गई। ऋण की राशि का उपयोग निजी लाभ और बकाया भुगतान के लिए किया गया। आरोपियों द्वारा वाहन ऋण के नाम पर करीब 18 करोड़ 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
ये भी पढ़ें- आरटीआई एक्ट के तहत जानकारी प्राप्त करने बीपीएल कार्ड धारक से मांगे चार लाख, कार्रवाई के निर्देश
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुष्पेंद्र सिंह तथा कैनरा बैंक के कुछ अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी प्रकरण दर्ज किया था। ईडी ने पीएमएलए अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपी पुष्पेंद्र सिंह एवं अन्य की चल व अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। मार्च 2024 में अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद विशेष न्यायालय पीएमएलए, जबलपुर ने आरोप तय किए थे।
इसके पश्चात कैनरा बैंक द्वारा कुर्क की गई 45 करोड़ रुपये मूल्य की तीन संपत्तियों को बैंक के पक्ष में बहाल करने के लिए विशेष न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। विशेष न्यायालय ने 29 जनवरी 2025 को संपत्तियों को कैनरा बैंक के पक्ष में बहाल करने के आदेश पारित किए। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए ईडी ने कुर्क की गई संपत्तियों को बैंक के पक्ष में बहाल कर दिया है।
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प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह सामने आया था कि जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कई वाहन ऋण लिए, लेकिन वाहनों की डिलीवरी नहीं की गई। ऋण की राशि का उपयोग निजी लाभ और बकाया भुगतान के लिए किया गया। आरोपियों द्वारा वाहन ऋण के नाम पर करीब 18 करोड़ 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पुष्पेंद्र सिंह तथा कैनरा बैंक के कुछ अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी प्रकरण दर्ज किया था। ईडी ने पीएमएलए अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपी पुष्पेंद्र सिंह एवं अन्य की चल व अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। मार्च 2024 में अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद विशेष न्यायालय पीएमएलए, जबलपुर ने आरोप तय किए थे।
इसके पश्चात कैनरा बैंक द्वारा कुर्क की गई 45 करोड़ रुपये मूल्य की तीन संपत्तियों को बैंक के पक्ष में बहाल करने के लिए विशेष न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। विशेष न्यायालय ने 29 जनवरी 2025 को संपत्तियों को कैनरा बैंक के पक्ष में बहाल करने के आदेश पारित किए। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए ईडी ने कुर्क की गई संपत्तियों को बैंक के पक्ष में बहाल कर दिया है।

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